Pratahkal-Educationloan-Udaipur-BOI
उदयपुर. नगर संवाददाता | बैंक ऑफ इंडिया ((Bank of India) की फतहपुरा शाखा से शैक्षणिक ऋण (Education Loan) लिया लेकिन बैंक ने निर्धारित वार्षिक आय से कम होने के बावजूद न तो ब्याज में छूट दी और न ही सबसिडी दी । इस मामले में जिला उपभोक्ता मंच ने फरियादी को सबसिडी देने और मानसिक संताप, परिवाद व्यय कुल सात हजार रुपये अदा करने के आदेश दिये। इस फैसले के खिलाफ बैंक की ओर से राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग सर्किट बेंच उदयपुर (Udaipur) ने अपील को नामंजूर कर अधिनस्थ न्यायालय के फैसले को बहाल रखने के आदेश दिये।
प्रकरण के अनुसार कालीशंकर पुत्र शिवशंकर शुक्ला निवासी हिरणमगरी सेक्टर छह ने सरदारपुरा फतहपुरा स्थित बैंक ऑफ इंडिया शाखा जरिये प्रबंधक से केनरा बैंक की शाखा मधुबन एवं मानव संसाधन मंत्रालय जरिये सचिव नई दिल्ली से एक लाख रुपये का 17 मई 2009 को शैक्षणिक ऋण लिया। 14 जनवरी, 2011 को एक लाख रुपये शैक्षणिक ऋण प्राप्त किया। फरियादी ने बताया कि बैंक की यह शर्त थी कि जिन व्यक्तियों की वार्षिक आय साढ़े चार लाख रुपये से कम है उन व्यक्तियों को छूट या सबसिडी दिये जाने का प्रावधान है। इस संबंध में नोडल एजेंसी केनरा बैंक
(Canara Bank)
शाखा मधुबन में सम्पूर्ण दस्तावेज जमा करवा दिए लेकिन केनरा बैंक ने बैंक ऑफ इंडिया को उक्त दस्तावेज नहीं भेजे जिससे फरियादी को सबसिडी नहीं मिली। 11 सितम्बर 2012 को बैंक ऑफ इंडिया शाखा फतहपुरा के समक्ष 2010-11 एवं वर्ष 2011-12 का आयकर रिटर्न पेश किया और सबसिडी दिलाने का आग्रह किया लेकिन कार्यवाही नहीं की। इस पर फरियादी ने अपने अधिवक्ता चेतन चौधरी के जरिये बैंक ऑफ इंडिया शाखा फतहपुरा, केनरा बैंक शाखा मधुबन और मानव संसाधन मंत्रालय जरिये सचिव के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद पेश किया।
जिस पर दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जिला उपभोक्ता मंच ने बैंक ऑफ इंडिया शाखा फतहपुरा के खिलाफ आदेश पारित कर फरियादी को सबसिडी के साथ नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के रूप में राशि अदा करने के आदेश दिये साथ ही बैंक ऑफ इंडिया को मानसिक संताप की क्षतिपूर्ति और अभिभाषक शुल्क के सात हजार रुपये देने के आदेश दिये। इस फैसले के खिलाफ बैंक ऑफ इंडिया शाखा फतहपुरा ने कालीशंकर शुक्ला, केनरा बैंक शाखा मधुबन व मानव संसाधन मंत्रालय के खिलाफ राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग सर्किट बेंच में 1 फरवरी, 2016 को अपील की। अपील पर दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जिला उपभोक्ता मंच के फैसले को बहाल रखने के आदेश दिये ।

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