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महाराष्ट्र की धरा परआचार्य महाश्रमण का पदार्पण
By EditorialPublished on
आचार्य महाश्रमण ने रविवार (Sunday) को महाराष्ट्र (Maharashtra) में जब प्रवेश किया तो उनके अभिनंदन में जनसागर उमड़ पड़ा। अरब सागर के किनारे आस्था, भक्ति और उत्साह का महासागर लहरा उठा। उनके महाराष्ट्र सीमा में प्रवेश करने के साथ ही मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालुओं की शृंखला का जो शुभारम्भ हुआ, वह आचार्यश्री के प्रवास स्थल तक बना रहा।

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पालघर : आचार्य महाश्रमण ने रविवार (Sunday) को महाराष्ट्र (Maharashtra) में जब प्रवेश किया तो उनके अभिनंदन में जनसागर उमड़ पड़ा। अरब सागर के किनारे आस्था, भक्ति और उत्साह का महासागर लहरा उठा। उनके महाराष्ट्र सीमा में प्रवेश करने के साथ ही मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालुओं की शृंखला का जो शुभारम्भ हुआ, वह आचार्यश्री के प्रवास स्थल तक बना रहा। जगह-जगह पर उनके अभिनंदन में ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों, किशोर मण्डल, कन्या मण्डल आदि के द्वारा लगाई गई झांकियां लोगों को आकृष्ट कर रही थीं। प्रवेश के बाद आचार्य महाश्रमण पालघर जिले में स्थित बोर्डी में स्थित गोखले एज्युकेशन सोसायटी के अंतर्गत 123 साल पुराने सोनाबाई पेस्तोनजी हकिमजी हाईस्कूल पहुँचे।
इससे पूर्व आचार्य महाश्रमण ने गुजरात (Gujarat) के वलसाड जिले में स्थित उमरगाम से प्रस्थान किया। जैसे-जैसे वे महाराष्ट्र की सीमा के निकट पहुंच रहे थे। सीमा पर खड़े लोगों की संख्या बढ़ती जा रही थी। निर्धारित समयानुसार उन्होंने गुजरात और महाराष्ट्र में सीमा विभाजन का कार्य करने वाली वहिन्द्रा नदी का पुल पार किया तो महाराष्ट्रवासी प्रसन्नता से झूम उठे।उन्होंने जैसे ही सीमा में प्रवेश किया, बुलन्द जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा। रास्ते के दोनों ओर नजर आ रहे थे तो केवल श्रद्धानत होते मस्तक और जुड़े हुए हाथ। पंक्तिबद्ध रूप में आचार्य महाश्रमण के साथ प्रवेश करती धवल सेना मानों भी आध्यात्मिक लहर-सी प्रतीत हो रही थी। मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु अगवानी में पहुंचे। इसके बाद आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने कहा कि आचार्य तुलसी महाराष्ट्र आये थे और उन्होंने महाराष्ट्र में अपना चातुर्मास और मर्यादा महोत्सव भी किया था। आचार्य महाप्रज्ञ ने अपना मर्यादा महोत्सव किया था। उस समय मैं भी उनके साथ था। आज स्वतंत्र रूप में आना हुआ है। मुम्बई चातुर्मास के लिए आज हम महाराष्ट्र में आए हैं। महाराष्ट्र के लोगों में सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति रूपी मानवीय मूल्य विकास करते रहें। यहां की जनता में धार्मिक साधना की उन्नति होती रहे।
उनके मंगल प्रवचन के बाद साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभा ने मंगल प्रेरणा प्रदान की। अभिनंदन में महाराष्ट्र से संबद्ध मुनि चिन्मयकुमार, मुनि अर्हमकुमार व मुनि जितेन्द्रकुमार ने विचार रखे।
समारोह में महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक मंत्री हाजी अराफात शेख ने कहा कि मैं ऐसे महान संत के समक्ष कुछ बोल सकूं, इतनी काबिलियत नहीं है, किन्तु मैं महाराष्ट्र सरकार की ओर हार्दिक स्वागत करता हूं।
स्वागत अभिनंदन में तेरापंथ महिला मण्डल-घोलवड़, मुम्बई तेरापंथ समाज (Mumbai Terapanth Samaj) व पुणे तेरापंथ समाज ने स्वागत गीतों का संगान किया। मुम्बई चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष मदनलाल तातेड़, हितेश हिरण ने विचार रखे।

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