Pratahkal - Main News- United Nations and Security Council
नई दिल्ली : संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद (United Nations and Security Council) को लेकर प्रधानमंत्री मोदी (Prime Minister Modi) ने बड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने हिरोशिमा में चल रही जी -7 सत्र में संबोधन के दौरान कहा, ये संस्थाएं दुनिया की आज की दौर की हकीकत से कोसों दूर हैं और अब इनमें सुधार की बहुत जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक निकाय में सुधार की पुरजोर वकालत करते हुए रविवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद आज की दुनिया की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करेंगे तो वे केवल 'बातचीत का एक मंच भर बनकर रह जाएंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने चुन-चुनकर बताई खामियां
मोदी (Modi) ने हिरोशिमा में जी/ सत्र को संबोधित करते हुए आश्चर्य जताया कि जब इन चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र का गठन किया गया था तो विभिन्न मंचों को शांति और स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श क्यों करना पड़ा। उन्होंने यह विश्लेषण का विषय है, हमें विभिन्न मंचों पर शांति और स्थिरता की बात क्यों करनी पड़ रही है? शांति स्थापित करने के विचार से शुरू हुआ संयुक्त राष्ट्र आज संघर्षों को रोकने में सफल क्यों नहीं हो पा रहा है?
यूएन में सुधार की वकालत करता रहा है भारत
नई दिल्ली संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में सुधार के लिए जोरदार दबाव बना रही है। साथ ही भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक स्थायी सीट पर नजर गड़ाए हुए है। अभी के वक्त में यूएनएससी में पांच स्थायी सदस्य और 10 गैर-स्थायी सदस्य देश शामिल हैं जो संयुक्त राष्ट्र की महासभा द्वारा दो साल की अवधि के लिए चुने जाते हैं। पांच स्थायी सदस्य रूस, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस और संयुक्त राज्य अमेरिका
(America)
हैं और ये देश किसी भी मूल प्रस्ताव को वीटो कर सकते हैं। समकालीन वैश्विक वास्तविकता को दर्शाने के लिए स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की मांग बढ़ रही है। भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, जर्मनी और जापान सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के प्रबल दावेदार हैं, जिसके पास अंतर्राष्ट्रीय शांति (International peace) और सुरक्षा बनाए रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
आतंकवाद की अब तक, सही परिभाषा क्यों नहीं?
इस दौरान प्र.म. मोदी ने आतंकवाद (Terrorism) की परिभाषा को लेकर सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा, क्यों, संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद की परिभाषा तक को स्वीकार नहीं किया गया ? अगर कोई आत्ममंथन करे तो एक बात स्पष्ट हो जाती है कि पिछली सदी में बनाई गई संस्थाएं आज की इक्कीसवीं सदी की व्यवस्थाओं के अनुसार नहीं हैं। प्रधान मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र अब दुनिया की वर्तमान वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करता है। वह हकीकत से दूर है। इसलिए यह जरूरी है कि संयुक्त राष्ट्र जैसे बड़े संस्थानों में सुधारों को लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, उन्हें ग्लोबल साउथ (अल्प विकसित देशों) की आवाज भी बनना होगा। अन्यथा, हम केवल संघर्षो को खत्म करने के बारे में बात करते रहेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी के फैन हुए अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन
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बोले: मुझे आपका ऑटोग्राफ ले लेना चाहिए
टोक्यो : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है लेकिन अब तो दुनिया के बड़े-बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी ऐसा लगता है कि प्र.म. मोदी की लोकप्रियता के कायल हो गए हैं। दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन तो प्रधानमंत्री मोदी के इतने प्रशंसक बन चुके हैं कि वह उनका ऑटोग्राफ लेने की बात करने लगे हैं।
'मुझे आपका ऑटोग्राफ ले लेना चाहिए
जापान में क्वाड बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन जिस तरह से प्र.म. मोदी के पास आकर उनके गले लगे, उसे पूरी दुनिया ने देखा । अब खबर आई है कि क्वाड बैठक के दौरान जो बाइडन ने प्र.म. मोदी से कहा कि उनके कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उनके पास कई शीर्ष नागरिकों की इतने आवदेन आ रहे हैं कि उन्हें काफी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। बता दें कि प्र.म. मोदी जून में अमेरिका के दौरे पर जाने वाले हैं। जो बाइडन ने मोदी से ये भी कहा कि 'उन्हें प्र.म. मोदी का ऑटोग्राफ ले लेना चाहिए।
Editorial

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