Pratahkal - Udaipur - Jyestha Amavasya
उदयपुरवाटी : तीर्थ स्थल लोहार्गल में ज्येष्ठ अमावस्या (Jyestha Amavasya) पर सूर्य कुंड पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं (Devotees) की अच्छी-खासी चहल-पहल रही । इस मौके पर हजारों लोगों ने सूर्य कुंड में डुबकी लगाई । इसके बाद गो मुखी पर विप्र जनों से संकल्प ले कर, गो मुखी के पास विराजित ब्राह्मणों को श्रद्धानुसार सीदा, वस्त्र और दक्षिणा प्रदत कर उनका आशीर्वाद लिया, ज्येष्ठ मास की अमावस्या का खास महत्व होने पर लोगों ने अधिकाधिक दान- पुण्य करने की कोशिश की । इसके बाद सूर्य मंदिर में दर्शन किए। सूर्य मंदिर के पीछे बटक गंगा को देखा । इसके बाद बालाजी, शिव, गोपीनाथ, शुकदेव, हल्दिया, पांडव, रघुनाथ, नृसिंह, कावड़िया, मालकेतु, गणेश आदि मंदिरों में दर्शन कर भेंट दी। ज्ञान बावड़ी के पास, बगीची में वास्तविक भीम कुंड देखा जिसे भीम ने तीर्थाटन के दौरान अपनी गद्दा के प्रहार से बनाया था । और दादू पंथी महंत परमेश्वर दास ने अपनी बरसों की मेहनत से खुदाई कर पहाड़ से गिरे मलबे को हटा कर श्रद्धालुओं के सामने लाए और उन्होंने दिखा दिया की यह ही असली भीम कुंड है जबकि सूर्य मंदिर के पीछे बनी बटक गंगा को धार्मिक लाभ के लिए भीम कुंड का नाम दे दिया गया।
पांडवों के लोहार्गल में तीन प्रतीक हैं, पहला सूर्य कुंड पर बना युधिष्ठर के हाथों से स्थापित शिव मंदिर, दूसरा नृसिंह मंदिर के सामने बना पांडव मंदिर और तीसरा ज्ञान बावड़ी के पास बगीची में बना भीम कुंड । श्रद्धालु ही सोचे एक ही स्थान पर दो पाडंव मंदिर व दो भीम कुंड है तो वास्तविक इनमें है कौनसा । श्रद्धालुओं ने स्नान कर दीन-हीनों को भी दान कर पुण्य कमाया । यह सिलसिला दोपहर तक जोरों पर रहा।
Editorial

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