Pratahkal - Jaipur - Mahapanchayat of Kumawat Society
जयपुर : प्रदेशभर में राजनीतिक (Political) सरगर्मियों के शुरू होने के साथ ही संख्याबल रखने वाले समाज अपने-अपने शक्ति प्रदर्शन करने में लगे हुए हैं। इसी कड़ी में कुमावत समाज (Kumawat Samaj) भी राजधानी जयपुर के विद्याधर नगर स्थित स्टेडियम में रविवार 21 मई को सुबह 11 बजे से शक्ति प्रदर्शन करते हुए विभिन्न मांगों को लेकर राजनीतिक हुंकार भरेगा। कुमावत समाज की ओबीसी आरक्षण को 21 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर उसके वर्गीकरण की मुख्य मांग सहित कई मांगें हैं, जिनको सरकार के सामने रखा जाएगा।
कुमावत महापंचायत में लोकसभा (Lok Sabha) अध्यक्ष ओम बिड़ला मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित होंगे। वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत
(Ashok Gehlot)
, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सी.पी. जोशी (C.P. Joshi) व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा सहित कई दिग्गज नेताओं के आने की संभावना है। कुमावत समाज के नेता ताराचंद सिरोहिया, छोटूराम बड़ीवाल व युवा नेता दीनदयाल कुमावत ने यह जानकारी शुक्रवार को आयोजित हुई प्रेसवार्ता में पत्रकारों को दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 15 विधानसभा क्षेत्रों में कुमावत समाज का बाहुल्य है, जहां 25 से 70 हजार मतदाता हैं। वहीं लगभग 65 विधानसभा क्षेत्रों में 10 से 25 की संख्या में मतदाता हैं, जो किसी की भी राजनीतिक गणित गलत और सही करने का माद्दा रखते हैं। इसलिए उसी मुताबिक उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। दोनों पार्टियां भाजपा और कांग्रेस
(Congress)
उन्हें 7 विधानसभा चुनाव में दस-दस टिकिट, लोकसभा चुनाव में दो टिकिट 7 देवें। इसके साथ ही ओबीसी आरक्षण को 21 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने, समाज के छात्रावासों के लिए निशुल्क भूमि उपलब्ध कराने, कुमावत समाज के भवन निर्माण एवं वास्तु के कार्य से जुड़े कारीगरों के लिए शिल्पकार उत्थान के लिए स्थापत्य कला बोर्ड बनाने और उसके अधीन स्थापत्य कला यूनिवर्सिटी का गठन करे, जिससे रोजगार के अवसर मिले, प्रदेश की धरोहरों, स्मारकों पर इनके कुमावत वास्तुकारों के नाम लिखकर इन्हे सम्मान देने, जातिगत आधार पर जनगणना करने और शिल्पकला के नाम से डाक टिकट जारी करने की मुख्य मांगें हैं। प्रमुख युवा सामाजिक नेता दीनदयाल कुमावत ने अनुसार शुरू किए कुमावत महापंचायत में समाज को आने के लिए पिछले दिनों गए मोबाइल मिस्ड कॉलर अभियान के तहत अब तक एक लाख 72 हजार पंजीकरण हो चुके हैं।
Editorial

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