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स्टालिन की बढ़ती मुसीबत
By EditorialPublished on
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक सुप्रीमो एमके स्टालिन मुश्किल में हैं और एक के बाद एक आने वाले राजनीतिक संकट से उबरने में असमर्थ हैं । एक दशक बाद 2021 में तमिलनाडु की सत्ता में आया द्रमुक अपने कार्यकाल की मध्यावधि में है। अगर द्रमुक और उसके नेता स्टालिन की राजनीतिक गतिशीलता का विश्लेषण किया जाए, तो रिकॉर्ड बहुत खराब होगा । सच्चाई यह है कि स्टालिन अपने पिता एम करुणानिधि की तरह पारदर्शी भी नहीं हैं ।
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक सुप्रीमो एमके स्टालिन मुश्किल में हैं और एक के बाद एक आने वाले राजनीतिक संकट से उबरने में असमर्थ हैं । एक दशक बाद 2021 में तमिलनाडु की सत्ता में आया द्रमुक अपने कार्यकाल की मध्यावधि में है। अगर द्रमुक और उसके नेता स्टालिन की राजनीतिक गतिशीलता का विश्लेषण किया जाए, तो रिकॉर्ड बहुत खराब होगा । सच्चाई यह है कि स्टालिन अपने पिता एम करुणानिधि की तरह पारदर्शी भी नहीं हैं । दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार महीनों में तीन बार तमिलनाडु का दौरा किया है, आगे 25 केंद्रीय मंत्रियों के असंख्य दौरों का कार्यक्रम है, जबकि भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा इस साल दो बार राज्य का दौरा कर चुके हैं। काशी तमिल संगमम के बाद सौराष्ट्र तमिल संगमम का आयोजन हो रहा है। प्रधानमंत्री मन की बात में अक्सर शिल्पियों से फोन पर बात करते हैं। बीते दस वर्षों में 18 अत्यंत सामान्य तमिलों को पद्म पुरस्कार • मिल चुका है। ये कुछ ऐसे बिंदु हैं,जिनके जरिये भाजपा ने तमिल राजनीति में अपनी पैठ बनाई है। ये सब भी द्रमुक सहित अन्य पार्टियों के लिए परेशानी का कारण हैं।
इस बीच तमिलनाडु में कई विस्फोटक राजनीतिक घटनाएं हुई हैं। राज्य में कई द्रमुक कार्यकर्ता मारे गए हैं। द्रमुक के पदाधिकारी सोशल मीडिया पर खुलेआम बस संचालकों, राशन दुकानदारों आदि को धमकाते देखे गए हैं। राज्य के राज्यपाल आरएन रवि के खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं और उत्तर भारतीयों के खिलाफ बयान दिए जा रहे हैं। स्टालिन के लिए प्रमुख राजनीतिक संकट ये हैं-
1. एडापति पलानीस्वामी के नेतृत्व वाले प्रमुख विपक्ष अन्नाद्रमुक को चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट से पार्टी महासचिव के रूप में मान्यता मिली और दो पत्तियों वाला चुनाव चिह्न आवंटित किया गया। यह स्टालिन के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि उन्होंने सोचा था कि ओ पन्नीरसेल्वम, जो द्रमुक के प्रति काफी विनम्र हैं, दो पत्तियों वाला चुनाव चिह्न पाने के लिए अंतहीन कानूनी लड़ाई लड़ सकते हैं। पर द्रमुक की उम्मीद टूट गई।
2. एक चौंकाने वाले खुलासे में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने केंद्रीय भाजपा नेतृत्व के सक्रिय समर्थन से चेन्नई में 'डीएमके फाइल्स' वीडियो जारी किया, जो कुछ हद तक भाजपा द्वारा तैयार 'कांग्रेस फाइल्स' की तर्ज पर है । 'डीएमके फाइल्स' वरिष्ठ द्रमुक नेताओं के चुनावी हलफनामों का संकलन है। लेकिन केंद्र सरकार के आधिकारिक सूत्रों द्वारा कथित तौर पर कुछ नए आरोप लगाए गए थे। इसके अलावा तमिलनाडु के वित्तमंत्री पीटीआर त्यागराजन का कथित तौर पर एक ऑडियो क्लिप जारी हुआ, जिसमें राज्य के पहले परिवार द्वारा 30,000 करोड़ रूपये सट्टा लगाने का आरोप है। 72 घंटे बाद राज्य सरकार ने इस ऑडियो क्लिप को खारिज किया।
3. मुख्यमंत्री स्टालिन ने घोषणा की कि वह सामाजिक न्याय के प्रति सेवा के लिए पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह की आदमकद प्रतिमा चेन्नई में लगवाएंगे। जबकि कांग्रेस के प्रांतीय एवं केंद्रीय नेताओं का कहना है कि वीपी सिंह ने बोफोर्स घोटाले का आरोप लगाकर राजीव गांधी की पीठ में छुरा घोंपा, जो गांधी परिवार की हार का मुख्य कारण था। 1990 के बाद गांधी परिवार का कोई भी सदस्य प्रधानमंत्री नहीं बना। चर्चा है कि कांग्रेस के एक वरिष्ठ सदस्य ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया जताने के लिए द्रमुक नेताओं को फोन किया। क्या द्रमुक वीपी सिंह की प्रतिमा लगाकर कांग्रेस को संदेश देना चाहता है? जबकि राजीव गांधी के हत्यारे पेरारिवलन को स्टालिन द्वारा गले लगाने पर कांग्रेस पहले से ही नाराज है।
4. तमिलनाडु विधानसभा सत्र के आखिरी तीन दिनों में मुख्यमंत्रा स्टालिन ने दो संवेदनशील प्रस्ताव पेश किए। पहले प्रस्ताव में केंद्र से अनुसूचित जाति के उन सदस्यों को आरक्षण सहित वैधानिक सुरक्षा, अधिकार और रियायतें देने के लिए संविधान में संशोधन का आग्रह किया गया है, जो ईसाई बन गए हैं। इसने कई दक्षिणपंथी समर्थकों को उकसाया है, इसलिए भाजपा विधायक वनाथी श्रीनिवासन पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ सदन से बाहर चली गईं। स्टालिन ने कहा कि सरकार ने प्रस्ताव करने से पहले चर्चा की और कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ली। उन्होंने कहा कि हमने इसे हड़बड़ी में नहीं किया है। भाजपा के बहिर्गमन ने पुष्टि की है कि हमने ठीक किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि ईसाई धर्म अपनाने पेश के बाद भी आदि द्रविड़ों को जातिगत अत्याचारों का सामना करना पड़ा। दूसरा प्रस्ताव, जिसने भाकपा और माकपा सहित सत्तारूढ़ द्रमुक के सभी सहयोगियों को नाराज कर दिया, वह कारखाना अधिनियम, 1948 में संशोधन की मांग करने वाला विधेयक था, जिसमें दैनिक काम के घंटे 8 बढ़ाकर 12 घंटे कर दिए गए। स्टालिन भाजपा और प्रधानमंत्री को घेरने और आलोचना करने का मौका नहीं चूकते। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा कि द्रमुक इस बात को लेकर बहुत स्पष्ट है कि 2024 में किसे प्रधानमंत्री नहीं बनना है। उनका इशारा नरेंद्र मोदी की तरफ था। दूसरी तरफ तमिलनाडु में भाजपा नेता अन्नामलाई का युवाओं पर जबर्दस्त प्रभाव है। भाजपा 2024 के लोकसभा चुनाव में अकेले चुनाव लड़ना चाहती है। जबकि भाजपा के शीर्ष नेता अन्नामलाई के विचारों का समर्थन नहीं कर रहे हैं। तमिलनाडु एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां गठबंधन चुनावी राजनीति का क्रम है, चाहे द्रमुक हो या अन्नाद्रमुक यहां प्रत्येक पार्टी का मतदान प्रतिशत 25 फीसदी से कम है। जब तक गठबंधन नहीं होता, अकेली पार्टी राज्य प्रशासन नहीं चला सकती है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पलानीस्वामी को मुलाकात का समय दिया है। वह अमित शाह ही थे, जिन्होंने घोषणा की थी कि भाजपा- अन्नाद्रमुक गठबंधन जारी है। भाजपा ने अपनी रणनीति बना ली है। वह दक्षिणी राज्यों से 120 लोकसभा सीटों की उम्मीद कर रही है। कर्नाटक उसके लिए आसान है, लेकिन तमिलनाडु और तेलंगाना का चुनाव तनी हुई रस्सी पर चलने के समान है। भाजपा और कांग्रेस, दोनों तमिलनाडु को अपने लिए उपजाऊ मान रहे हैं। तमिलनाडु ने 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए कमर कस ली है। अगर भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी हैट्रिक लगाते हैं, तो 2026 में तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांटे की टक्कर होगी।

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