Pratahkal - Udaipur - The haste to run the toy train in Gulab Bagh

उदयपुर : नगर निगम द्वारा गुलाब बाग (Gulab Bagh) में बच्चों की ट्रेन (Train) का राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया (Governor Gulabchand Kataria) से उद्घाटन करवाने को लेकर की गई जल्दबाजी की वजह से गुरुवार को ट्रायल लेने के दौरान ट्रेन दो बार अटक गई, जिस पर मौके पर क्रेन से ट्रेन को पीछे खींचा गया और बाद में सिर्फ इंजन को ही पटरियों पर दौड़ाया जो सफल रहा।
जानकारी के अनुसार गुलाब बाग में बच्चों की ट्रेन का उद्घाटन असम (Assam) के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया से करवाने को लेकर नगर निगम गुरूवार को जल्दबाजी में नजर आया। कटारिया के उदयपुर (Udaipur) में आखरी दिन के प्रवास को देखते हुए निगम के नेताओं ने आनन-फानन में ट्रेन और डिब्बों को उदयपुर मंगवा लिया और पटरियों पर चढ़ा दिया।
गुरुवार शाम को महापौर जी एस टांक, उपमहापौर पारस सिंघवी, गेराज समिति अध्यक्ष मनोहर चौधरी, अतिक्रमण निरोधी समिति के अध्यक्ष छोगालाल भोई और नगर निगम के अधिकारी गुलाबबाग पहुंचे और ट्रेन की ट्रायल (Trial) लेने का प्रयास किया। निगम के नेताओं और अधिकारियों ने इंजन और ट्रेन को एक साथ पटरियों पर चलाने का प्रयास किया तो स्टेशन से मात्र 200 मीटर चलने के बाद डिब्बे पटरी में फंस गए। काफी प्रयास के बाद भी जब ट्रैन आगे नहीं बढ़ी तो वहां पर मौजूद नेताओं, अधिकारियों और ठेका कंपनी के कर्मचारियों ने धक्का लगाकर ट्रेन को आगे बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली जिस पर मौके पर क्रेन बुलाई गई और ट्रेन को पुनः पीछे लिया।
इसके बाद एक बार फिर से ट्रेन को पटरी पर दौड़ाया गया तो फिर से पटरियों में फस गई। यह देखकर अधिकारियों और नेताओं के होश उड़ गए। इसके बाद छोगालाल भोई ने सुझाव दिया कि केवल इंजन को पटरी पर दौड़ाया जाए, यदि वह सफल रहता है तो बाद में इंजन के साथ डिब्बों को भी दौड़ाया जाए इस पर केवल इंजन को पटरी पर दौड़ाया गया तो सफलतापूर्वक दौड़ गया।
करीब 5 बार इंजन को पटरियों पर दौड़ाया गया। उद्घाटन के दौरान राज्यपाल के सामने ट्रेन पुनः पटरियों में ना फंस जाए, इसके लिए ट्रेन चलाने वाली ठेका कंपनी और निगम के अधिकारी रात भर मोके पर काम करते रहे ।
पूर्व बोर्ड में हुआ टेंडर इस बोर्ड में हुआ पूरा
गुलाब बाग में बच्चों की नई ट्रेन चलाने का काम भाजपा के ही पूर्व महापौर चंद्र सिंह कोठारी (Chandra Singh Kothari) के बोर्ड में शुरू किया गया, लेकिन कोठारी के समय में किए गए टेंडर में ट्रेन की पटेरिया भी बदली जानी थी और ट्रेन का रूट भी बदला जाना था जिससे गुलाब बाग में करीब 200 पेड़ घटने की संभावना हो गई थी ऐसे में पर्यावरण प्रेमियों के विरोध को देखते हुए निगम के इस बोर्ड ने ट्रेन का रूट पुराना ही रखा और ट्रेन को नहीं लेकर आए ।
Editorial

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