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अरावली हिल्स में अवैध पट्टे जारी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ चालान पेश
By EditorialPublished on
अरावली हिल्स (Aravalli Hills) रेंज में आने के बावजूद अधिकारियों ने दो खान मालिकों से मिलीभगत कर अवैध रूप से खनन पट्टे जारी कर अनुचित लाभ प्राप्त करने वाले खान, वन एवं पटवार मंडल के अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया। पेश आरोप पत्र के दौरान पांच अधिकारी को नोटिस से तलब किया जबकि चार आरोपियों को आरोप प्रमाणित होने पर भी फरार है और वही तीन आरोपी (Accused) की अनुसंधान (Research) के दौरान ही मृत्यु हो जाने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई ड्रॉप कर दी गई ।

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उदयपुर : अरावली हिल्स (Aravalli Hills) रेंज में आने के बावजूद अधिकारियों ने दो खान मालिकों से मिलीभगत कर अवैध रूप से खनन पट्टे जारी कर अनुचित लाभ प्राप्त करने वाले खान, वन एवं पटवार मंडल के अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया। पेश आरोप पत्र के दौरान पांच अधिकारी को नोटिस से तलब किया जबकि चार आरोपियों को आरोप प्रमाणित होने पर भी फरार है और वही तीन आरोपी (Accused) की अनुसंधान (Research) के दौरान ही मृत्यु हो जाने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई ड्रॉप कर दी गई ।
अरावली रेंज के अरावली हिल्स रेंज में आने के बावजूद उन्हें बाहर होना बताकर खान मालिकों को फायदा पहुंचाने और पद का दुरुपयोग करने वाले आरोपी अधिकारियों व लाभार्थियों के खिलाफ बुधवार को अदालत में आरोप पत्र पेश किया। सभी आरापियों को नोटिस से अदालत में तलब किया। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया। इस मामले में अनुसंधान के दौरान ही तीन आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है जबकि चार फरार है। क्रम एक की अदालत में एसीबी राजसमंद के डिप्टी अनूपसिंह (Deputy Anup Singh) ने अभियोजन विभाग के सहायक निदेशक राजेश कुमार पारीक के जरिए पीसी एक्ट 1988 की धारा 13/1 सहपठित धारा 13 / 2 एवं भादसं की धारा 120बी में आरोप पत्र पेश किया।
विशिष्ठ न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण (Special Court Corruption Prevention) मामलात क्रम एक की अदालत में खान विभाग अरावली हिल्स की रेंज में अवैध रूप से खनन पट्टे जारी करने के मामले में तत्कालीन एसीबी के तत्कालीन एएसपी डॉ राजेश भारद्वाज द्वारा दर्ज कराए गए मामले में तत्कालीन अतिरिक्त निदेशक (खान) हाल रिटायर्ड देवीसिंह पुत्र भैराराम मारू निवासी रॉयल राजविलास शौभागपुरा, तत्कालीन अधीक्षण खान अभियंता खान एवं भूविज्ञान विभाग उदयपुर जोन हाल रिटायर्ड पंकज पुत्र ईश्वरसिंह गहलोत निवासी सिरोही, तत्कालीन सहायक खनि अभियंता सलूम्बर हाल रिटायर्ड नाथूलाल पुत्र केवलराम मेघवाल निवासी बोयणा मावली, लाभार्थी खान मालिक देवानंद पुत्र गोकुल प्रसाद पटेल निवासी पिलादर सराड़ा और कृष्ण माइंस एण्ड ट्रेडर्स के मालिक (पार्टनर) हरीश अरोड़ा पुत्र रूपलाल वधावा निवासी बनेड़ा लेन फतहपुरा के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया।
इस मामले में अनुसंधान के दौरान ओमप्रकाश पुत्र नाथूलाल यादव निवासी कृष्णपुरा, तत्कालीन अधीक्षण भू वैज्ञानिक खान एवं भू विज्ञान विभाग उदयपुर अरूण कुमार पुत्र ब्रज मोहन त्रिवेदी निवासी मानसरोवर जयपुर, तत्कालीन सर्वेयर कार्यालय उप वन संरक्षक मुबारिक हुसैन पुत्र मोहम्मद हुसैन निवासी मंसूरी कॉलोनी मल्लातलाई, सुनील सनाढ्य इन सबकी मामले की जांच के दौरान ही मृत्यु हो गई । जबकि मामले में लिप्त तत्कालीन कनिष्ठ खनि कार्य निदेशक कार्यालय सहायक खनि अभियंता सलूम्बर सुनील सनाढ्य, विशिष्ठ न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण मामलात तत्कालीन पटवार मंडल मोरिला सलूम्बर का पटवारी भगवानलाल मेघवाल, तत्कालीन क्षेत्रीय वन अधिकारी सलूम्बर सुरेश मिश्रा और तत्कालीन वन पाल वननाका सलूम्बर भगवतसिंह के खिलाफ अपराध प्रमाणित पाया जबकि ये आरोपी अभी फरार हैं।
आरोप पत्र में बताया कि अधिकारियों ने खान मालिकों के साथ मिलीभगत कर पद एवं अधिकारों का दुरुपयोग कर षडयंत्र रचकर खनन मालिक देवानंद पटेल व कृष्णा माइंस एण्ड ट्रेडर्स के मालिका हरीश अरोड़ा को अनुचित रूप से लाभ पहुंचाने के लिए उपरोक्त दोनों खदानों के पट्टा अरावली हिल्स रेंज में आने के उपरांत भी अरावली रेंज से बाहर होना बताया तथा दोनों आरोपी मुबारिक हुसैन सर्वेयर ने पद एवं अधिकारों का दुरुपयोग कर अपराधिक षडयंत्र रचकर देवेंद्र पटेल और हरीश अरोड़ा को लाभ पहुंचाने के लिए दोनों खनन पट्टों को सरवेणी वेन वन क्षेत्र में आने के बावजूद वन क्षेत्र के बाहर होना बताकर बताया जो जांच से स्पष्ट हुआ है।
इस मामले में लिप्त आरोपी को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने सीआरपीसी की धारा 141/ ए के नोटिस से अदालत में चालान पेश करने के दौरान तलब किया। सभी आरोपियों की उपस्थिति में आरोप पत्र पीठासीन अधिकारी मधुसुदन मिश्रा के समक्ष पेश किया गया। सभी आरोपियों के खिलाफ पीठासीन अधिकारी मधुसूदन मिश्रा ने प्रसंज्ञान लिया है और मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को रखी है। इस दौरान नोटिस से पेश हुए आरोपियों की ओर से उनके अधिवक्ता धर्मेंद्र सिंह पंवार व अन्य ने जमानत का प्रार्थना पत्र पेश किया जिस पर दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद पीठसीन अधिकारी ने सभी आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया।

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