Pratahkal-Mumbai-Kakasa
धर्मनगरी चारभुजा (गढ़बोर) के प्रतिष्ठित हेमराज वख्तावरमल पटवारी के परिवार के मिठ्टालाल भवरलाल पटवारी का जीवन विशिष्टताओं से परिपूर्ण था। वे सहज, सरल, स्पष्टवादी, सिद्धांतप्रिय एवं सादगी पसंद थे। हाजिरजवाबी, तात्कालिक निर्णायकता आदि विशेषताओं से युक्त उनका व्यक्तित्व व कृतित्व सभी के लिये अनबोला संदेश था। उनकी याददाश्त गजब की थी। स्नेहिल एवं अपनत्व भरे व्यवहार से वे सभी के प्रिय थे। उन्होंने अपने ससुराल लावा सरदारगढ़, आमेट एवं स्नेही स्वजनों के क्षेत्रों में भी अलग पहचान बनायी एवं लोगों के चहेते बने। चारभुजा में उन्होंने पुजारी गुर्जर समाज तथा दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालुओं में आत्मीय व्यवहार बनाया। उन्होंने संघर्ष भरी राहों पर चलकर परिवार की राहों में खुशियों के फूल बिछाये। जीवन संगिनी शांतादेवी व उन्होंने परिवार के प्रत्येक सदस्य को सद्संस्कारों से शिक्षित, पल्लवित व पुष्पित किया। पूरा परिवार संघ समर्पित परिवार है।
उनके पुत्र अशोक पटवारी तेरापंथी सभा, मुंबई के सदस्य, भगवती मुंबई सभा उपाध्यक्ष, विजय मुंबई (Mumbai) सभा के पूर्व मंत्री व वर्तमान उपाध्यक्ष के साथ आचार्य महाश्रमण चातुर्मास व्यवस्था समिति, मुंबई के सहमंत्री, पुत्री निर्मला नौलखा प्रवक्ता उपासिका व जैन तत्वज्ञान स्कालर, मीना बाबेल अध्यक्ष महिला मंडल भीलवाड़ा के साथ ही जवाई जवरीमल नौलखा कांदिवली सभा के पूर्व अध्यक्ष व राजीव बाबेल भीलवाड़ा सभा सदस्य, पुत्रवधू लीला पटवारी पूर्व आंचलिक सहसंयोजिका मुंबई ज्ञानशाला हैं।
अतिथियों के आगमन से उनका रोम रोम प्रसन्नता से सराबोर हो जाता था। यही संस्कार उन्होंने परिवार के प्रत्येक सदस्य में बीजारोपित किये। वे धर्म संघ एवं संघपति के प्रति समर्पित, प्रतिवर्ष गुरु दर्शन सेवा, साधु संतों की सेवा में अग्रणी रहते थे। देहावसान के पश्चात आचार्य महाश्रमण, साध्वी प्रमुखा विश्रुतविभा व क़रीब 27 चारित्र आत्माओं के मंगल संदेश प्राप्त हुए। चारित्र आत्माओं के नियमित दर्शन, सेवा, उपासना, प्रवचन लाभ, प्रतिदिन 5-6 सामायिक, गुरूइंगित शनिवारीय 7-8 की सामयिक वे करते एवं चारभुजा मंदिर व जैन मंदिर दर्शन का नियमित क्रम था। वे ऊपर से जितने कठोर, मजबूत, दृढ़ संकल्पित थे अंदर से उतने ही मृदु व सौम्य स्वभावी थे। युगानुरुप उन्होंने अपने जीवन में परिवर्तन किया और आधुनिक पीढ़ी के साथ सामंजस्य स्थापित कर परिवार में सौहार्दपूर्ण वातावरण निर्मित किया।
Editorial

Editorial

Next Story