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पायलट अपना रहे जगन रेड्डी का 'फार्मूला'!
By EditorialPublished on
राजस्थान के सियासी संग्राम में सचिन पायलट (Sachin Pilot) की राजनीति (Politics) पर अपने पिता राजेश पायलट (Rajesh Pilot) की छाप होना तो स्वाभाविक ही है। इसके साथ ही वे एक और सफल राजनीतिज्ञ हैं। सचिन पायलट अपने पिता नक्शे कदम पर अभी चल रहे हैं और उनकी भविष्य की पॉलिटिक्स भी काफी हद तक उन जैसी होने संभावनाएं बनती जा रही हैं। ये हैं आंध्र के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी (Jagan Mohan Reddy) जैसे हैं।
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जयपुर : राजस्थान के सियासी संग्राम में सचिन पायलट (Sachin Pilot) की राजनीति (Politics) पर अपने पिता राजेश पायलट (Rajesh Pilot) की छाप होना तो स्वाभाविक ही है। इसके साथ ही वे एक और सफल राजनीतिज्ञ हैं। सचिन पायलट अपने पिता नक्शे कदम पर अभी चल रहे हैं और उनकी भविष्य की पॉलिटिक्स भी काफी हद तक उन जैसी होने संभावनाएं बनती जा रही हैं। ये हैं आंध्र के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी (Jagan Mohan Reddy) जैसे हैं। आप जरूर चौंक रहे होंगे, लेकिन दोनों में काफी समानताएं हैं। पायलट की तरह जगन भी कांग्रेस में रहकर, पार्टी से बगावत करके और आलाकमान के आदेशों की नाफरमानी करके आज आंध्र प्रदेश की राजनीति के सबसे चमकते सितारे बने हैं।
पूर्व डिप्टी सीएम पायलट भले ही कहें कि तीसरे मोर्चे को राजस्थान की जनता पसंद नहीं करती, लेकिन गहलोत के साथ ही कांग्रेस आलाकमान से भी उनकी बढ़ती दूरियां भविष्य के ऐसे ही संकेत दे रही हैं कि कांग्रेस में उनका ज्यादा भला होने की उम्मीद कम है।
70 के दशक में जन्म, विरासत में मिली राजनीति
पहले बात जगन मोहन रेड्डी और सचिन पायलट की कुछ समानताओं की करते हैं। इन दोनों का ही जन्म सत्तर के दशक में हुआ। जगन और सचिन दोनों के पिता ही आजीवन कांग्रेस में रहे। दोनों के ही पिता का निधन राजनीति के शिखर पर आकस्मिक दुर्घटना में हुआ। दोनों ने ही अपने पिता की राजनीतिक (Political) विरासत संभाली। दोनों ही दो हजार के दशक में कांग्रेस में आए। दोनों ही इसी दशक में यानि सचिन पायलट 2004 में और जगन 2009 में पहली बार संसद सदस्य बने । दोनों नेताओं का ही अपने राज्य के युवाओं में खासा क्रेज है।
जगन की ओदारपु यात्रा, पायलट की पदयात्रा
सचिन पायलट और जगन रेड्डी में दिलचस्प बात यह भी है कि दोनों ने ही कांग्रेस (Congress) आलाकमान से टकराव लेकर पदयात्रा निकाली है। जगन ने अपने पिता की मृत्यु के छह महीने बाद एक ओदारपु यात्रा (शोक पदयात्रा) निकालने का निर्णय लिया। कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें अपनी पदयात्रा को बंद करने के निर्देश दिए। लेकिन जगन ने इस आदेश को खारिज कर दिया और यह कहते हुए यात्रा को आगे बढ़ाया कि यह उनका निजी मामला है। इससे जगन रेड्डी और पार्टी आलाकमान सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बीच मतभेद गहरा गए। इधर पायलट ने पहले अपनी सरकार के खिलाफ अनशन किया और अब 11 मई से पदयात्रा शुरू कर दी है। प्रदेश प्रभारी रंधावा ने ऐतराज जताया, लेकिन पायलट नहीं माने। अब प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने उनका निजी मामला कहकर पल्ला झाड़ा है। आलाकमान भी उनकी शिकायतों पर कोई तवज्जो नहीं दे रहा है।
वाईएसआर की तर्ज पर बना सकते हैं एसआरपी कांग्रेस पार्टी
आंध्र प्रदेश में जगन रेड्डी और प्रदेश में सचिन पायलट दोनों का ही एक लक्ष्य मुख्यमंत्री बनना है। आलाकमान से मतभेद के बाद जगन रेड्डी ने एकला चलो की राह चुनी और अपनी नई वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की घोषणा की। इसमें उनके पिता का नाम भी जुड़ा था। चुनाव लड़ा जीते और मुख्यमंत्री बने । सचिन पायलट के साथ अपनी कंपनी आई-पैक के जरिए जुड़े राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भी पायलट को नई पार्टी बनाने की सलाह दी है। इसका नाम भी आंध्र प्रदेश की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की तर्ज पर 'एसआरपी कांग्रेस पार्टी' या फिर 'प्रगतिशील कांग्रेस पार्टी' रखा जा सकता है। एसआरपी यानि सचिन राजेश पायलट कांग्रेस पार्टी। सचिन डिप्टी सीएम बन चुके हैं और उनका अगला लक्ष्य सीएम की कुर्सी ही है।

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