PM Modi
जयपुर : जब किसी राज्य में चुनाव (Election) नजदीक आते हैं तो राजनैतिक पार्टियां (Political parties) ज्यादा एक्टिव हो जाती पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं के दौरे बढ़ जाते हैं। यही देखा जा रहा है राजस्थान में। राजस्थान में इस साल विधानसभा चुनाव (Assembly elections) हैं और भारतीय जनता पार्टी चुनाव से डेढ़ साल पहले ही एक्टिव हो गई। जयपुर में भाजपा (BJP) का राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ, जिसमें सभी वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव की आगामी रणनीति जयपुर में बैठकर तय की। पार्टी के - राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) और गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) राजस्थान
(Rajasthan)
के कई दौरे कर चुके हैं। प्रदेश में सत्ता हासिल करने के लिए भाजपा हर मोर्चे पर कांग्रेस को घेरने की तैयारी कर चुकी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरों से पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में जोश भरा जा रहा है, ताकि वे गांव गांव जाकर लोगों को पार्टी से जोड़ सके।
प्रधानमंत्री मोदी के दौरों ने भरा नया जोश
आगामी चुनाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रदेश दौरे बढ़ते जा रहे हैं। पिछले 8 महीनों यानी 240 दिन में प्र.म. मोदी 5 बार राजस्थान आ चुके हैं। राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में जनसभाएं करके ज्यादा से ज्यादा विधानसभा सीटों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है, ताकि आगामी चुनाव में प्रदेश में भाजपा को बहुमत मिले और सत्ता पर काबिज हो सके। इस साल राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव हैं ये तीनों देश के बड़े राज्य हैं और भाजपा का फोकस इन तीनों राज्यों पर है राजस्थान में सभी वर्गों को साधने के लिए प्र.म. मोदी अलग-अलग संभागों में जन सभाएं कर रहे हैं। अब तक के 5 दौरों से प्र.म. मोदी 100 से ज्यादा विधानसभा सीटों को साध चुके हैं।
राजसमंद और सिरोही दौरे से साध गए 27 सीटें
10 मई को प्र.म. मोदी राजसमंद और सिरोही दौरे पर रहे। इस दौरान नाथद्वारा और आबूरोड में बड़ी सभाओं का आयोजन किया। इन दोनों जनसभाओं में प्र.म. मोदी ने कांग्रेस सरकार पर जमकर सियासी हमले किए। राजस्थान कांग्रेस के अंदरुनी झगड़े, प्रदेश में बढ़ते अपराधों, बेरोजगारों के मुद्दों, किसानों की कर्ज माफी और जयपुर बम धमाकों के आरोपियों के बरी होने के सहित कई मामलों में प्रदेश कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाए। प्र.म. मोदी ने कांग्रेस को आतंकियों की पैरवी करने वाली पार्टी बता दिया था। राजसमंद और सिरोही की सभाओं से प्र.म. मोदी ने उदयपुर, राजसमंद, जालोर, पाली और सिरोही की 27 विधानसभा सीटों को सीधे तौर पर प्रभावित किया । आगामी दिनों में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का शेखावाटी में दौरा प्रस्तावित है। बाद में प्र.म. मोदी भी मारवाड़ और शेखावाटी क्षेत्र का दौरा करके अन्य विधानसभा सीटों को साधने की कोशिश करेंगे।
भीलवाड़ा का दौरा करके गुर्जर बाहुल्य सीटों को साधा
18 जनवरी 2023 को प्र.म. मोदी भीलवाड़ा दौरे पर आए थे। वहां गुर्जर समाज के आराध्य देव देवनारायण भगवान की जयंती समारोह में शामिल होकर ओबीसी वर्ग को साधने की कोशिश की। भीलवाड़ा और अजमेर जिले की 15 विधानसभा सीटों के साथ गुर्जरों के वर्चस्व वाली 35 सीटों को प्रभावित कर गए। प्र.म. मोदी की सभा में भारी भीड़ जुटी। इससे यह साफ हो जाता है कि जब वे किसी प्रदेश का दौरा करते हैं तो वहां के क्षेत्रों में अच्छा प्रभाव छोड़ते हैं।
मानगढ़ धाम से आदिवासियों को
प्र. म. मोदी 1 नवंबर 2022 को बांसवाड़ा के मानगढ़ धाम में आए थे यहां से उन्होंने आदिवासियों को साधने की कोशिश की। इससे पहले द्रोपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाकर भाजपा आदिवासी कार्ड खेल चुकी है और अपने आप को आदिवासियों की सच्ची हितैषी बता चुकी है। जब द्रोपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी, तब भाजपा के तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष ने आदिवासियों के साथ पद यात्रा निकाली और उन्हीं के मकान बैठकर द्रोपदी मुर्मू का शपथ ग्रहण समारोह देखा । मानगढ़ धाम से प्र.म. मोदी ने डूंगरपुर और बांसवाड़ा के आसपास के जिलों की 15 से ज्यादा विधानसभा सीटों को साधने का प्रयास किया।
दौसा में एससी-एसटी समाजों को साध गए प्र.म. मोदी
12 दिसंबर को प्र.म. मोदी दौसा दौरे पर आए। यहां उन्होंने दिल्ली मुम्बई एक्सप्रेस वे के लालसोट दिल्ली सड़क मार्ग का आवागमन प्रारम्भ किया। इस दौरान उन्होंने बड़ी जनसभा को संबोधित किया जिसमें दौसा, अलवर, टोंक, सवाई माधोपुर, करौली, जयपुर, भरतपुर और धौलपुर के हजारों लोग शामिल हुए। केवल दौसा के एक दिवसीय दौरे से प्र.म. मोदी ने एक साथ 50 विधानसभा सीटों को साधने की कोशिश की। खासतौर अनुसूचित जाति और जनजाति बाहुल्य सीटों को साधने की पूरी कोशिश की। प्र.म. मोदी ने अपने भाषण में केन्द्र सरकार की उपलब्धियों को बताने के साथ प्रदेश कांग्रेस सरकार की खूब आलोचना की।
Editorial

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