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क्यूबेक 3 : इलेक्ट्रिक कारों का चार्जिंग स्टेशन देखकर हतप्रभ
By EditorialPublished on
हमारी कोशिश थी कि शाम तक किसी तरह कनाडा के नियाग्रा शहर पहुँच वहीं रात्रि विश्राम किया जाये। राह में एक जगह पेट्रोल (Petrol) भराने रूके तो एक अजीब से पम्प को देख कर हैरान रह गये। यह था तो पेट्रोल पम्प जैसा ही मगर यहां वाहनों में पेट्रोल नहीं भर कर बिजली भरी जाती थी। यह इलेक्ट्रिक कारों का चार्जिंग स्टेशन था।
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हमारी कोशिश थी कि शाम तक किसी तरह कनाडा के नियाग्रा शहर पहुँच वहीं रात्रि विश्राम किया जाये। राह में एक जगह पेट्रोल (Petrol) भराने रूके तो एक अजीब से पम्प को देख कर हैरान रह गये। यह था तो पेट्रोल पम्प जैसा ही मगर यहां वाहनों में पेट्रोल नहीं भर कर बिजली भरी जाती थी। यह इलेक्ट्रिक कारों का चार्जिंग स्टेशन था।
अभी तक तो मैंने एक ही इलेक्ट्रिक कार रेवा देखी थी जिसकी गति और क्षमता बहुत सीमित है। यहां हमें विश्व की आधुनिकतम इलेक्ट्रिक दर्शन हो गये। इसके आने के पहले तक इलेक्ट्रिक (Electric) कारों की गति सिर्फ 80-90 मील प्रति घंटा थी जो स्थानीय उपयोग तक ही सीमित थी, बाहर कहा जाना हो तो इनसे काम नहीं चलता था। टेसला के नये मोडल 3 से यह गति 215 मील प्रति घंटा तक पहुँच जायगी। इलेक्ट्रिक कारें भी अब पेट्रोल कारों के समकक्ष आ गई है।
अमेरिका (America) में इसकी कीमत लगभग 35 हजार डालर है। इसकी मांग इतनी अधिक है कि आज बुक कराओ तो दो साल पहले डिलेवरी नहीं मिले। इस समय लगभग चार लाख लोग इसकी प्रतीक्षा सूची में चल रहे है। यह गाड़ी 200 चलने पर 65 किलो वाट घंटे बिजली खाती है जो 10 डालर के करीब में मिल जाती है। कार को यदि घर में ही चार्ज किया जाये तो बिजली इससे भी सस्ती पडगी ।
टेसला के आने के पहले अब तक बी. एम. डब्ल्यू की आई 3 व निस्सान लीफ इलेक्ट्रिक कारें बाजार में उपलब्ध थी। इनमें भी निस्सान लीफ के सस्ती होने के कारण यह अत्यन्त लोकप्रिय थी। इसके बाद टेसला की रोडस्टार स्पोटर्स कार मैदान में उतरी, फिर टेसला की लक्जरी सीडान, मोडल एक्स और अब मोडल 3 की प्रतीक्षा है। निसान लीफ को टेसला की मोडल एक्स कड़ी टक्कर दे रही है।
इलेक्ट्रिक कारों के पम्पों को इ.वी. चार्जिंग स्टेशन कहा जाता है। इन स्टेशनों पर हाई वोल्टेज करन्ट उपलब्ध होने के कारण घरों की बनिस्पत शीघ्र घार्जिंग हो जाता है। कार कम्पनियों के साथ साथ कई बिजली कम्पनियां भी वर सुविधा उपलब्ध कराने लगी हैं। कई रिटेल स्टोरों पर भी प्राइवेट कम्पनियां चार्जिंग का काम करने लगी हैं। कई पार्किंग स्थलों पर भी यह काम शुरू हो गया है। गाड़ी पार्क करके चले जाओ और गाड़ी चार्ज होती रहेगी।
दुनिया में आज जापान में सर्वाधिक इ.वी. चार्जिंग स्टेशन हैं। हालत यह है कि इनकी संख्या पेट्रोल पम्पों से भी ज्यादा हो गई है। जापान में इनकी संख्या 40 हजार है जबकि अमेरिका में सिर्फ 9 हजार) तेजी से बदलती दुनिया के इस प्रतीक चिन्ह को थोड़ी देर निहार कर हम वापस हाईवे पर लौटे। शीघ्र ही क्यूबेक की सीमा समाप्त हो गई और फिर से अंग्रेजी के साईन बोर्ड शुरू हो गये। उस दिन शनिवार था, नियाग्रा में पर्यटकों का वैसे ही जमावड़ा रहता है, वीक एण्ड पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है, ऐसे में किसी होटल में हमें जगह मिलेगी इसकी आशा कम थी। हमने नियाग्रा के बहुत पहले ही किसी छोटे से उपनगर में रात बिताने की सोची।
शाम होने से पहले हम हाईवे से बाहर निकले और एक छोटे से नगर में प्रवेश किया। यहां से नियाग्रा घन्टे भर दूर था फिर भी यहां की तमाम होटलें बुक थीं। यहाँ यह हाल है तो नियाग्रा में क्या होगा यह सोच कर ही परेशान हो गये एक होटल की क्लर्क से हमने विनती की कि वह आसपास के होटलों में फोन करके पता लगाये कि कहीं कोई कमरा खाली है क्या। होटल किसी कम्पनी का था, नियमानुसार वह एसा कर नहीं सकती थी मगर हमारी लाचारी देखते हुए उसने इधर उधर फोन किया तो एक होटल में जगह खाली मिल गई। उसने फोन हमें थमा दिया, हमने फोन पर ही कमरा बुक करा दिया और अपने क्रेडिट कार्ड के नम्बर बता दिये। हमारे आश्चर्य का तब ठिकाना नहीं रहा जब पता चला कि यह होटल नियाग्रा शहर में है। और वह भी फाल के अत्यन्त करीब हमने क्लर्क से होटल तक पहुँचने का रास्ता बताने को कहा तो उसने एक प्रिन्ट आउट निकाल कर दे दिया जिसमें रास्ते की विस्तृत जानकारी थी।
घन्टे भर में हम उस होटल में पहुँच गये और अपनी बुकिंग के बारे में बताया तो वहां तैनात एक जापानी लड़की ने अत्यन्त बेरुखी से हमें मना कर दिया कि आपके नाम कोई कमरा बुक नहीं है। हमने उसे बताया कि हमारी एक आदमी से बात हुई थी जिसे हमने क्रेडिट कार्ड के जरिये कमरे का भुगतान भी कर दिया था। यह बात सुन कर वहां बैठा एक व्यक्ति बोला कि हमारी बात उसी से हुई थी मगर हमारा क्रेडिट कार्ड नहीं चला इस कारण कमरा किसी अन्य को दे दिया। क्रेडिट कार्ड मेरा था जिसमें मैं भारत से पैसे भरवा कर लाया था। राजा ने अपना क्रेडिट कार्ड आगे किया तो भी उसने अपनी लाचारी व्यक्त कर दी।
उसके काउन्टर के पास ही गुरू नानक की एक तस्वीर लगी हुई थी। हमें यकीन हो गया कि यह भारतीय ही है, उससे पूछा तो उसने बताया कि वह पंजाबी है। अब राजा उससे पंजाबी में बात कर हमारी मदद करने की गुहार करने लगा। पंजाबी ने फोन उठाया और एक जगह फोन किया। बात करने के बाद हमें कहा कि उसकी होटल के पास ही एक बड़ा होटल है जहां एक कमरा खाली है, हम पहुँच गये तो हमें यह कमरा मिल सकता है।
होटल पास ही था, हम तुरन्त वहां पहुंचे, गाड़ी लगाई इस बीच एक को सामान अन्दर ले जाते देख हमारे होश उड़ गये। एसा लगा जैसे रही सही अ भी जाती रही। हम जल्दी जल्दी होटल में प्रविष्ठ हुए। काउन्टर पर दो क्लर्क के कर रहे थे, दोनों किसी से बात कर रहे थे। में तुरन्त एक के पास जाने लगा तो ने रोका, जब तक उसकी बात खत्म नहीं हो जाती हम काउन्टर के पास भी खड़े हो सकते, इससे तीन चार फीट दूर खड़े रहना पड़ता है।
हम व्यग्रता से अपनी बारी की इन्तजार करने लगे। काउन्टर पर वही आद खड़ा था जिसे हमने सामान लेकर अन्दर आते देखा था। हमारी धड़कनें बढ़ गई प धैर्य रखने के अलावा कोई चारा नहीं था। इस बीच दूसरे काउन्टर की क्लर्क खाल हो गई तो उसने हमें बुला लिया। राजा ने ही उससे बात की। मैं दूर खड़ा अनुमान लगाता रहा कि क्या बात हो रही है, मेरी निगाहें क्लर्क के मुँह पर थी कि कहीं व इन्कार में सिर तो नहीं हिलाती मगर जब राजा ने अपने पर्स से क्रेडिट कार्ड न कर दिया तो तसल्ली हुई कि कमरा मिल गया है।
होटल बहुत बढ़िया था, जिसे छोड़ कर आये उससे तो कई गुना अच्छा था, दाम भी सवा सौ के करीब थे जो अमरीकी डालरों में सौ से भी कम ही हुए। जल्दी से अपना सामान कमरे में रख कर निश्चित हो हम किसी भारतीय रेस्टोरेन्ट की तलाश में निकल गये। भूख जोरों से लगने लगी थी।

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