Udaipur - Crime

उदयपुर : जिले के मांडवा थाना क्षेत्र में प्रेम प्रसंग में पति के रोड़ा बनने के कारण पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर निर्ममतापूर्वक गला घोंट कर हत्या कर सबूत नष्ट कर दिए, लेकिन मामले की चश्मदीद गवाह बेटी (Eyewitness Daughter) के बयानों एवं पर्याप्त साक्ष्य के आधार पर अदालत ने अपने 72 पृष्ठीय फैसले में आरोपी (Accused) पत्नी व प्रेमी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
प्रकरण के अनुसार 6 अगस्त 2017 को बिकरणी कोटड़ा निवासी प्रभुलाल ने मांडवा थाने में रिपोर्ट (Report) दर्ज कराई कि उसके बेटे नरेन्द्र शर्मा (Narendra Sharma) के पड़ौसियों ने 5 अगस्त 2017 को बताया कि नरेन्द्र के घर में शोर मच रहा है। इस पर वह व परिवार के लोग और पड़ौसी वहां पहुंचे तो देखा कि बेटा नरेन्द्र शर्मा रसोई में फर्श से पानी से लथपथ हालत में चड्डी-बनियान में पड़ा था और उसके कान से खून बह रहा था। फर्श पर भी खून बिखरा पड़ा था। उसकी पत्नी व पुत्री फरार हो चुके थे। रिपोर्ट में उसने आरोप लगाया कि उसके बेटे की हत्या बहू नीलम शर्मा, उसके प्रेमी कैलाश रावल पुत्र हिमाराम गमेती निवासी कोतवाली सिरोही ने की है और हत्या करने के बाद बच्चों को लेकर फरार हो चुकी है। उन्होंने बेटे की हत्या करने के बाद सबूत भी नष्ट कर दिए थे। इस पर पुलिस
(Police)
ने भादसं की धारा 302, 201 व 34 पुलिस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया । इस मामले में अनुसंधान अधिकारी ने जांच के दौरान आरोपियों की भागने में सहयोग करने के मामले में तेजा उर्फ तेजाराम पुत्र लखमा निवासी बाखेल मांडवा को भी आरोपी बनाया। इनके खिलाफ जांच पूर्ण कर अदालत में आरोप पत्र पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक कपिल टोडावत ने 30 गवाह व 58 दस्तावेज प्रदर्शित किए। वहीं बचाव पक्ष की ओर से कैलाश की ओर से एक गवाह व पांच दस्तावेज (Document) प्रदर्शित किए । लोक अभियोजक ने तर्क दिया कि अपराधिक षड़यंत्र रच कर अभियुक्त नीलम शर्मा के पति नरेन्द्र की हत्या करने जैसा अपराध कर साक्ष्य को विलोपित किया गया है। इस कारण आरोपिया को कठोर दंड से दंडित किया जाए। आरोपिया निलम की निशानदेही से वारदात में उपयोग में ली रस्सी एवं कैलाश की निशानदेही से घटना में उपयोग में ली स्कूटी बरामद की गई और दोनों ने मिलकर हत्या करने के पर्याप्त साक्ष्य है इसलिए आरोपियों को कठोर सजा दी जाए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जिला एवं सेशन न्यायाधीश चंचल मिश्रा ने 72 पृष्ठ के अपने फैसले में अभियुक्त नीलम और उसके प्रेमी कैलाश को दोषी करार देते हुए नीलम को भादसं की धारा 302 में आजीवन कारावास व 10 हजार रूपये जुर्माना, नीलम व कैलाश को भादसं की धारा 302/120-बी में आजीवन कारावास व 10-10 हजार रूपये जुर्माना और धारा 201 में सात-सात वर्ष का कारावास व पांच-पांच हजार रूपये जुर्माने की सजा सुनाई।
पति के जिंदा रहते प्रेमी से कर लिया नाता विवाह
अनुसंधान अधिकारी द्वारा मामले में जांच की तो पता चला कि शादी के बाद नीलम कैलाश (Neelam Kailash) के सम्पर्क में आई और उससे प्रेम हो गया और दो बच्चों की मां होते हुए पति के रहते 4 जनवरी 2016 को कैलाश रावल से नाता विवाह कर लिया। सिरोही में किराये के मकान पर रहते थे और बच्चों को भी सिरोही में रखती थी व पढ़ाती थी। कुछ समय वहां पर रहती और जब पति नरेन्द्र फोन करता तो वहां आ जाती और तीन-चार दिन रूक कर चली जाती। जब भी झगड़ा होता तो पति के पास आ जाती थोड़ी दिन रूकने के बाद पुनः प्रेमी के पास चली जाती। इस पर नरेन्द्र ने तलाक के लिए पारिवारिक न्यायालय में प्रार्थना पत्र भी पेश किया लेकिन दोनों के बीच समझौता हो जाने पर मामला वापस उठा लिया। चश्मदीद गवाह मृतक की बेटी भूमिका ने अदालत में दिए बयानों में बताया कि उसका भाई भौमिक है और दो साल पूर्व मां नीलम ने पापा नरेन्द्र को खिचड़ी बनाने का कहा, उसके बाद हम सभी ने खिचड़ी खाई उस दौरान मां का कथित प्रेमी कैलाश रावल भी घर पर मौजूद था और उसने भी खिचड़ी खाई। खिचड़ी खाने के बाद पिता सो गए। जैसे ही पिता को नींद आई तो मां ने कैलाश को इशारा किया और उसने तकिये से पापा का मुंह दबा दिया। काफी देर तक छटपटाने के बाद पापा बेहोश हो गए। इसके बाद पापा के कपड़े उतार कर गले में रस्सी डालकर एक तरफ कैलाश ने व दूसरी तरफ मम्मी ने खींचा और पापा का दम उखड़ने तक नहीं छोड़ा। उसके बाद मम्मी ने पापा के हाथ और कैलाश ने पैर पकड़ कर जोर से जमीन पर पटका, जिससे पापा के कान से खून निकल आए। कैलाश गैस की भट्टी के ऊपर चढ़ा व रस्सी को जंगले में बांध और फांसी पर लटकाने का प्रयास किया लेकिन उस प्रयास में सफल नहीं हुआ। उसके बाद आरोपी कैलाश वहां से चला गया, मम्मी व छोटा भाई वहीं एक-डेढ़ घंटे तक बैठे रहे। उसके बाद मम्मी ने पापा पर पानी डाला और उसके बाद मम्मी ने लोगों को इकट्ठा किया। घर में हो-हल्ला मचने पर दादा व परिवारजन आ गए और भीड़ एकत्र होता देख मम्मी पापा को छोड़कर हम दोनों को स्कूटी पर लेकर वहां से चली गई। भूमिका ने अपने साक्ष्य में यह भी बताया कि मम्मी ने घर से ही कैलाश रावल को घर से फोन किया था। कैलाश ने तेजा को मदद के लिए भेजा और मम्मी और हम दोनों भाई-बहन स्कूटी से सिरोही जा रहे थे तो पेट्रोल खत्म होने पर कैलाश पेट्रोल लेकर आया। उसके बाद जैसे-तैसे सिरोही पहुंच गए। जहां कैलाश ने तेजा को पैसे दिए। अदालत में बेटी ने पिता के कातिलों को देखा तो देखते ही कहा कि इन्होंने ही मेरे पिता को मारा था।
Editorial

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