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न्यूयार्क : 6 । रोज लोगों के बरनोल लगाने वाले के लिये बरनोल कम पड़ा
By EditorialPublished on
ट्विटर (Twitter) पर लोगों को कितनी जली कटी हूँ, उनके कितना लगाता हूं, मगर कभी कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन खुद मुझे बरनोल की जरूरत पड़ जायेगी और लगाने तक को नहीं मिलेगा।
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ट्विटर (Twitter) पर लोगों को कितनी जली कटी हूँ, उनके कितना लगाता हूं, मगर कभी कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन खुद मुझे बरनोल की जरूरत पड़ जायेगी और लगाने तक को नहीं मिलेगा।
शीघ्र ही खाने का आर्डर दे दिया गया मैं तो दाल रोटी खाता हूं, वही मंगवा ली, सबने अपने अपने हिसाब से आर्डर दे दिया, मगर दाल सबने मंगवाई ही । बातें करते सभी पुरूष कब बाहर निकल गये पता ही नहीं चला, मैं अकेला महिलाओं (Women) के साथ रह गया। उन्हीं से बातें होती रहीं। इस बीच खाना भी परोसा जाने लगा तो बाहर खड़े साथियों को आवाज दी, मगर वे बातों में मशगूल थे।
मैं टेबल पर पीठ किये बैठा था, सामने की तरफ महिलाएं थी। वेटर मेरे पीछे से ही सामान ला रहे थे। अचानक मुझे बदन पर कुछ गर्म सा महसूस हुआ, मुझे कुछ पता चले उसके पूर्व ही सामने की महिलाएं चिल्ला पड़ी ये क्या कर दिया। -
मेरे पीछे से परोसकारी कर रहे वेटर के हाथ का गर्म गर्म दाल का समूचा डोंगा मेरे शरीर पर गिर गया था। उसे टल्ला लगा या वजन संभाल नहीं पाया या उसको आदत नहीं थी, पता नहीं मगर मेरा पूरा एक हाथ और पूरा पांव गर्म गर्म दाल से सरोबार हो उठा था। महिलाएं उठ कर मेरे कपड़ों से दाल साफ करने लगी मगर जलन तेज थी, मैंने सबसे पहले अपना कमीज उतारने की कोशिश की। कमीज के बटन खोलूं तब तक तो बहुत देर हो जाती इसलिये मैंने फटाफट पूरे कमीज को गले से उतार लिया। कमीज अगर ज्यादा देर हाथ में रहता तो नुक्सान ज्यादा हो सकता था।
नीचे बनियान नहीं था, भरे पूरे रेस्टोरेन्ट (Restaurant) में मेरे सलमान स्वरूप से होटल वाला चौका, उसने मुझे बाथरूम की तरफ चलने को कहा। कमीज तो मैंने उतार दिया था, मगर पेन्ट पर गिरी दाल की जलन भी जारी थी, मैं वहीं पेन्ट भी उतारने लगा, इस बात की चिन्ता किये बगैर की नीचे मैं चड्डी भी नहीं पहनता। मुझे एसा करते देख होटल वाला मुझे घसीटकर दूसरी तरफ ले गया। बाथरूम में भी मुझे वो पेन्ट नहीं उतारने दे, मैंने उसे धक्का दिया और कहा कि जाओ बरनोल लेकर आओ।
मैंने पेन्ट उतार दिया और पूरा नंगा हो गया, सोचा नल के नीचे बैठ जाऊं। जल्दी से कपड़े उतार देने के कारण असर कम हुआ। बैरा बरनोल वगैरा कुछ लेकर
आने का नाम तक नहीं ले रहा था। में हकीकत और कल्पना दोनों की शिकार हो सोच रहा था कि आये दिन ट्विटर में लोगों के लिये बरनोल कम पड़ जाने की बात करने वाले के लिये ही आज बरनोल नहीं। उसी तरह स्वदेश में हम • पीढीयों से लोगों के जलने का ईलाज करने मुफ्त मल्हम वितरीत करते हैं। इस मल्हम की लोकप्रियता एसी है कि लोग दूर दूर से इसे मंगाते है। आज उसी मलम को मैं अपने लिये याद कर रहा था मगर उपलब्ध नहीं था।
थोड़ी ही देर में बैरा वापस आया मगर उसके हाथ में बरनोल वगैरा कुछ नहीं वरन दो कपड़े थे। मैं चिल्लाया कि तेरे से दवा मंगाई और तू ये लेकर आया नंगा देख उसने मुँह फेरते हुए कहा कि सरदार जी लेने गये हैं, आप यह कपड़े पहन लीजिये। मैं कपड़े पहनने लगा और चीखता रहा कि इतना बड़ा होटल खोल लिया और फस्टे एक का सामान तक नहीं अमेरिका में हो या अब भी पंजाब के गांव में ही। इसी बीच एक अन्य व्यक्ति कोई ट्यूब सी चीज लेकर आ गया और मेर हाथों पर लगाने लगा, गर्दन पर भी जलन हो रही थी, पैरों पर भी लगवाया। मैं बर बार उसे बरनोल बरनोल कहता रहा मगर शायद अमेरिका में बरनोल इतनी लोकप्रिय नहीं, कोई अन्य मल्हम था जो वह मुझ पर लगा रहा था और कह रहा थ यह बहुत अच्छा है।
जो कपड़े मुझे दिये गये थे वो किसी वेटर की ड्रेस थी। मेरे खुद के कपड़े पहनने लायक नहीं थे इसलिये कोई चारा भी नहीं था। मैंने अपने आपको आईने में देखा तो इस गंभीर परिस्थिति में भी हंसी छूट गई। मैं खुद ही अपने आप का मजा लेने लगा, रोज लोगों की एसी-तैसी करता हूं, आज खुद को पता चल गया।
बाहर हॉल था, जिसमें टेबलें लगी हुई थी, काफी लोग थे, सब उत्सुक ह रहे थे कि मैं कितना जला, क्या हुआ, लोगों के लिये तो यह एक रोचक घटना गई थी। ज्यूं ही मैं बाथरूम से बाहर निकला सबकी निगाहें मेरी तरफ थी। मैं अपने टेबल पर जाकर बैठ गया तो महिलाओं ने पूछा कैसा लग रहा है। मल्हम से मुझे ठंडक पहुंची थी, यह मैंने बता दिया।
प्रेम की पत्नी डाक्टर थी, उसने कहा अगर आपको ज्यादा जलन हो रही हो तो पास ही क्लिनिक है वहां चलते हैं। वेटर ने मल्हम की ट्यूब भी मुझे दे दी थी, वह मैंने बताई तो बोली कि यह बहुत अच्छा मल्हम है, घर पर जाकर आप एक बार और लगा लेना।
इतनी बड़ी घटना हो गई मगर बाहर बातें कर रहे दोस्तों को कुछ भी पता नहीं चला। डिनर का सारा मूड किरकिरा हो चुका था, मगर कोई घर से खाकर आया भी नहीं था, सबको भूख लग रही थी मगर मेरी भूख काफूर हो चुकी थी। एक तरह के सदमे में था। देश परिवार, परिवेश से इतनी दूर अनजान जगह पर, अचानक यूं इतना सब गुजर जाना दिल को दहला तो रहा ही था। मगर यही सोचकर संतोष कर रहा था कि इतने में ही निपट गए।
यह भी गनीमत थी कि में कुर्ता पाजामा पहन कर नहीं आया था, वह तो एकदम महीन खादी के हैं, वो पहने होते तो ज्यादा जलना तय था। यह भी अच्छी बात रही कि पेन्ट व शर्ट दोनों मोटे कपड़े के थे।
मेरी ड्रेस देख कर महिलाएं तो कुछ नहीं बोलीं, बोलती भी कैसे, सारे हादसे की चश्मदीद तो वे ही थी मगर राजा ज्यूं ही वापस लौटा मुझे वेटर की ड्रेस में देख कर ठठा कर हंस पड़ा। उसे घटना का पता ही नहीं था वह मजे ले ले कर कहने लगा दादा, आज क्या किसी फेन्सी ड्रेस में जा रहे हो यह क्या नाटक है।
राजा की पत्नी ने उसे डांटा और सबने मिलकर पूरी घटना का विवरण दिया तो राजा के गुस्से का पारावार नहीं था उसने मेरे हाथ पैरों का निरीक्षण किया और पूछा कि कैसा लग रहा है। इस तरफ से तसल्ली करने के बाद वह होटल मालिक पर चीख पड़ा कि ऐसे कैसे होटल चलाते हो तुम पर तो मुकदमा चलना चाहिये, आखिर इस सबकी जिम्मेदारी तो लेनी होगी।
मुकदमे का नाम सुन होटल वाले को सांप सूंघ गया। अमेरिका में तो छोटी छोटी बातों पर बड़े बड़े मुकदमे हो जाते हैं जबकि यहां तो होटल की लापरवाही से इतनी बड़ी घटना घट गई थी। वह मिन्नतें करने लगा मगर राजा के तेवरों में कोई कमी नहीं थी ।

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