Panchkalyanak Andheri
मुंबई : चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर (Chandraprabhu Digambar Jain Temple) अंधेरी में शनिवार को पंचकल्याणक का शुभारंभ हुआ। प्रथम दिन गर्भ कल्याणक की क्रियायें संपन्न हुई। प्रातः मंदिर से 51 कलशों के साथ शोभायात्रा की शुरुआत हुई। शोभायात्रा कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बाद ध्वजारोहण किया गया। तत्पश्चात मंडप (चंद्रपुरी नगरी) का उद्घाटन किया गया। अष्टकुमारियों ने स्वागत नृत्य किया।

Panchkalyanak Andheri
आचार्य पुलक सागर महाराज व आचार्य प्रणाम सागर महाराज के सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य महावीर जैन एवं श्रेयांस उपाध्ये ने विधि विधान से कलश स्थापना करवाई। माता पिता, सौधर्म इंद्र एवं अन्य पात्रों के साथ क्रियाएं संपन्न कराई गयीं। इसके बाद आचार्य पुलक सागर ने अपने उदबोधन में कहा कि चंद्रपुरी नगरी में बैठे हुए इंद्र एवं श्रावकगण इस पंचकल्याणक में जिनेन्द्र भगवान की आराधना करके अपने आप को भाग्यशाली समझें कि हम जैन कुल में जन्मे हैं। हमारे पास तीर्थ भी हैं और तीर्थंकर भी। चंद्रपुरी नगरी में बैठे ऐसा एहसास होता है कि जैसे सम्मेद शिखरजी की चंद्रप्रभु टोंक की यात्रा कर रहे हैं। प्रतिष्ठाचार्य ने गर्भ कल्याणक की पूर्व क्रियाएं जिसमे तीर्थंकर बालक की माता की गोद भराई इत्यादि संपन्न कराई। सकल दिगम्बर जैन समाज के मंचों, युवाओं एवं संस्थाओं ने कार्यक्रम के लिए सहयोग प्रदान किया। सकल दिगम्बर जैन समाज मुंबई के पंच उपस्थित थे।कार्यक्रम की सफलता के लिए नाथूलाल कचरावत, हीरालाल हथाया, प्रभुलाल मेहता, देवीलाल मेहता, महावीर पगारिया, महेंद्र सेंबारा, हेमंत नावडिया, चंद्रप्रकाश नावडिया, पंकज चित्तौड़ा, भूपेंद्र वकावत, पुंजालाल सेलावत, पवन सेंबारा, राहुल सेठी सहित सकल दिगम्बर जैन समाज अंधेरी जोगेश्वरी लोखंडवाला मुंबई के सदस्य सक्रिय हैं।
Editorial

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