Unique house for birds
जोधपुर : भोपालगढ़ क्षेत्र (Bhopalgarh Zone) के ग्राम खेड़ापा स्थित रामस्नेही संप्रदाय आचार्य पीठ रामधाम खेड़ापा (Ramdham Khedapa) में बेजुबान परिंदों के लिए करीब 8 लाख रुपए से अधिक की लागत से आलीशान पक्षीघर (Unique house for birds) का निर्माण करवाया गया है। जिसमें सैकड़ों पक्षी एक साथ न केवल अपना बसेरा कर सकते हैं, बल्कि उनके लिए नियमित रूप से बकायदा दाने-पानी की भी व्यवस्था की जाती है और प्रतिदिन करीब दो क्विंटल अनाज भी डाला जाता है। रामधाम (Ramdham) के उत्तराधिकारी संत गोविन्दराम शास्त्री ने बताया कि क्षेत्र के खेड़ापा स्थित रामस्नेही संप्रदाय आचार्य पीठ रामधाम खेड़ापा में जहां एक ओर वर्तमान पीठाधीश्वर महंत आचार्य पुरुषोत्तमदास महाराज की प्रेरणा से प्राणी मात्र के लिए वर्ष पर्यंत पारमार्थिक सेवा कार्य चलते रहते हैं और यहां आने वाले हर साधक-श्रद्धालुओं के लिए भोजन आदि की व्यवस्था रहती है। इसके साथ ही मुख्य रूप में अन्नक्षेत्र, गोसेवा, कबूतर सेवा, आयुर्वेद चिकित्सा आदि सेवाएं निशुल्क रूप में वर्षो से चली आ रही है। वहीं इसके साथ-साथ हाल ही में रामधाम की ओर से मूक पंछियों के दाने- पानी की व्यवस्था करने के लिए भी रामधाम के मुख्य परिसर के पास खाली जमीन पर चल रहे कबूतर खाने के नजदीक एक आलीशान छह मंजिला पक्षीघर भी बनवाया गया है। पक्षियों के लिए नियमित रूप से प्रतिदिन करीब दो क्विंटल अनाज डाला जाता है और रोजाना हजारों की संख्या में अलग-अलग प्रजातियों के पक्षी इस बसेरे में चुग्गा चुगने के लिए आते हैं । पक्षी घर की उचाई करीब 51 फीट रखी गई है और इसके निर्माण के लिए पहले एक आरसीसी का प्लेटफार्म बनाकर इस पर 6 मंजिल बनाई गई है। जबकि हरेक अष्टकोणीय पर 96 घरौंदें बनाए गए हैं और इस प्रकार छहों मंजिलों में कुल 576 घरौंदे बने हुए हैं। जिनमें एक साथ सैकड़ों पक्षी आराम से निवास कर सकेंगे । क्षेत्र के रामधाम खेड़ापा में पीठाचार्य पुरुषोत्तमदास महाराज द्वारा बनाए गए 6 मंजिला पक्षीघर में प्रत्येक मंजिल का प्लेटफार्म अष्टकोण में बनाया गया है। और एक घरौंदे का आकार 12 गुणा 12 इंच रखा गया है । इस अष्टकोणीय पंछी आशियाने की प्रत्येक मंजिल में 12-12 के जोड़े से 96 छोटे-छोटे घर बने हुए हैं और सभी 6 मंजिलों में कुल 576 घर बने हुए हैं। ऐसे में इस पक्षीघर में सर्दी, गर्मी व बरसात के मौसम में भी लगभग 2 हजार पक्षी सुरक्षित रह सकेंगे। युवा संत ध्यानदास रामस्नेही ने बताया कि पक्षीघर के निर्माण के लिए स्थान का चयन करते समय इस बात का भी ध्यान रखा गया है, कि आसपास पेड़-पौधे अधिक हो और वहां अधिक पक्षी भी रहते हों। वहीं पक्षी घर के पास में ही पहले से एक चबूतरे का निर्माण करवा रखा है, जिस पर पक्षियों के लिए दाना डाला जाता है

Editorial

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