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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से टैक्सपेयर्स को मिली बड़ी राहत
By EditorialPublished on
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने साफ कर दिया है कि तलाशी और जब्ती कार्यवाही में इनकम टैक्स (Income Tax) अधिकारियों को यदि कुछ भी आपत्तिजनक और तथ्यात्मक सामग्री हाथ नहीं लगती है तो ऐसे में अधिकारी आईटी एक्ट (IT Act) की धारा 153 ए के तहत मूल्यांकित हो चुके टैक्स मामलों को पुन: मूल्यांकन के लिये फिर से नहीं खोल सकती

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मुंबई । सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने साफ कर दिया है कि तलाशी और जब्ती कार्यवाही में इनकम टैक्स (Income Tax) अधिकारियों को यदि कुछ भी आपत्तिजनक और तथ्यात्मक सामग्री हाथ नहीं लगती है तो ऐसे में अधिकारी आईटी एक्ट (IT Act) की धारा 153 ए के तहत मूल्यांकित हो चुके टैक्स मामलों को पुन: मूल्यांकन के लिये फिर से नहीं खोल सकती। तलाशी में मिली कोई भी अन्य सामग्री पुनर्मूल्यांकन आदेश जारी करने का कारण नहीं हो सकती, अगर वह सामग्री आपत्तिजनक और ठोस तथ्यात्मक प्रमाण या सामग्री नहीं है।
टैक्स जानकारों के मुताबिक, इससे टैक्स विभाग द्वारा मनमाने तरीके से टैक्सपेयर्स के मामले के पुनर्मूल्यांकन किये जाने पर रोक लगेगी। जाहिर है इससे टैक्सपेयर्स (Taxpayer) को काफी राहत मिलेगी। कई सारे पूनर्मूल्यांकन से उपजे कानूनी विवाद हैं जिनमें कोई तथ्यात्मक वजह नहीं है। ऐसे कानूनी मामलों की तादाद अब नियंत्रित रहेगी।
गौरतलब है कि आईटी एक्ट की धारा 153 ए के तहत किसी भी मामले को पुनर्मूल्यांकन के लिये खोलने का अधिकार टैक्स विभाग को था जिसे वर्ष 2021 में वापस ले लिया गया। लेकिन पिछले मामलों पर यह नियम लागू है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद भी इनकम टैक्स द्वारा पहले मूल्यांकित हो चुके ऐसे पुराने मामलों को जांच और पुनर्मूल्यांकन के लिये खोलने की गुंजाइश बरकरार है बशर्ते विभाग को तलाशी और जब्ती कार्यवाही के दौरान कुछ भी तथ्यात्मक सामग्री हाथ लगती है और जिससे यह स्पष्ट होता हो कि संबंधित टैक्सपेयर ने अपनी कमाई मूल्यांकन के लिहाज से छिपाई है। आईटी एक्ट की धारा 147 और 148 के तहत ऐसे मामलों को फिर से मूल्यांकन के लिये लिया जा सकता है।

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