Demand for census
मुंबई : महाराष्ट्र (Maharashtra) में जाति आधारित जनगणना की मांग एक बार फिर केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार को परेशान करने लगी है। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले (Nana Patole) के बयान के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (Nationalist Congress Party) और शिवसेना (Shivsena) भी इस कोरस में शामिल हो गए। नाना पटोले ने कहा था कि राज्य सरकार इसे लेकर कोई भी फैसला लेने में अनिच्छुक लग रही है। इससे पहले नाना पटोले ने ये उठाया था। कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले के बयान के बाद विपक्षी नेताओं के तरह-तरह के बयान सामने आने लगे। सभी नेताओं की तरफ से जातिगत मतगणना को लेकर मांग होने लगी है। देश में 2024 में लोकसभा चुनाव
(Lok Sabha Elections)
होने है, इससे पहले ये मुद्दा गर्माता हुआ नजर आ रहा है। साथ ही केंद्र सरकार के लिए समस्या बनता दिख रहा है। साल 2011 की जनगणना के लिए सोशियो इकोनॉमिक कास्ट सेंसस ने पूरा डेटा बनाया था। इसकी जिम्मेदारी ग्रामीण विकास मंत्रालय और शहरी विकास मंत्रालय को सौंपी गई थी।
फिर साल 2016 में SECC द्वारा सभी आंकड़े जारी किए गए। हालांकि, इस दौरान जातिगत आंकड़ों को पेश नहीं किया गया। इसका डेटा सामाजिक कल्याण मंत्रालय को सौंप दिया गया था। इसके बाद इन आंकड़ों को कभी भी सार्वजनिक नहीं किया गया।

Editorial

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