Suresh Goyal
हमें अत्यन्त सरलता से कनाडा में प्रवेश मिल गया। ज्यादा पूछताछ नहीं हुई, पासपोर्ट देखा और जाने दिया। सामने ही विश्व प्रसिद्ध स्काईलोन टावर था, एक तरफ नियाग्रा प्रपात एकदम अलग अन्दाज में दिखाई दे रहा था। गाड़ी पार्किंग में रखी और पहले स्काईलोन टावर पर चढने की सोची। अमेरिका तथा कनाडा में पार्किंग के बहुत पैसे लगते हैं। कोई चारा भी नहीं इसलिये देने ही पड़ते हैं। अपने यहां जैसे जहाँ जी चाहे गाड़ी खड़ी नहीं कर सकते। अगर कर भी दें तो पुलिस इतनी सक्रिय है और नियम इतने सख्त हैं कि भारी परेशानी में पड़ जायें।
कनाडा में भी डालर ही चलते हैं मगर अमरीकी डालर के मुकाबले सस्ते है। एक अमरीकी डालर के यहां 1.30 केनेडियन डालर मिल जाते है। कनाडा के नोट भी बहुत सुन्दर व प्लास्टिक के बने हैं। हमारे यहां भी प्लास्टिक के नोटों के चलन की बात बरसों से सुनते आ रहे हैं मगर अभी तक प्लास्टिक के नोट देखने को नहीं मिले। अमरीकी डोलर कई दशकों से एक ही तरह के चल रहे थे, किसी तरह का कोई बदलाव नहीं इस कारण इनके जाली नोटों का धन्धा भी जोरों से चल पड़ा. अब जाकर जरूर बड़े बड़े नोटों में मामूली सा बदलाव किया गया।
स्काईलोन टावर का टिकिट भी बहुत मंहगा था। 35 डालर, मगर सीनीयर सिटिजन के लिये सिर्फ 25 डालर ही था। हमने सीनीयर सिटिजन का टिकिट लिया तो आसानी से दे दिया, न कोई पूछताछ न उम्र का सर्टिफिकेट। हमारे यहां तो कोई बूढ़ा भी रेल यात्रा में सीनीयर सिटिजन का टिकिट ले ले और जन्म का प्रमाण नहीं बता सके तो उसे जलील कर उससे पूरा टिकिट व जुर्माना वसूला जाता है। यदि सुविधा दी गई है तो उसका लाभ उन लोगों को जरूर मिलना चाहिये जिनके लिये यह शुरू की गई है।
स्काईलोन टावर 520 फीट ऊंचा है। यह नीचे से एकदम स्तम्भ सा है जो उपर जाकर एक तश्तरीनुमा पर्यवेक्षण मंच का रूप ले लेता है। यह मंच तीन मंजिला हैं। यहां से नियाग्रा प्रपात का अत्यन्त सुन्दर विहंगम दृश्य दिखाई पड़ता है। प्रपात तीन भागों में विभाजित हैं जो अमेरिकन फाल्स, ब्राइडल फाल्स व होर्स शू फाल्स के नाम से जाने जाते हैं। पर्यवेक्षण मंच गोलाकार है जिससे चारों दिशाओं में घूमकर प्राकृतिक सौन्दर्य का रसास्वादन किया जा सकता है।
इस टावर पर एक रिवोल्विंग रेस्टोरेन्ट भी है जिसमें पर्यटक खाना खाते हुए. प्रपात के दर्शन कर सकते हैं। रेस्टोरेन्ट के घूमते रहने के कारण इसका आनन्द और भी बढ़ जाता है। थोड़ी देर टावर पर रूक कर हम वापस नीचे आ गये और ठीक प्रपात के सामने जाकर बैठ गये। यहां से तीनों प्रपात के दृश्य उपर से भी ज्यादा सुन्दर नजर आ रहे थे। यहां काफी देर तक बैठे रहे और प्रकृति नटी की इस क्रीड़ा का रसास्वादन करते रहे, प्रपात ठीक हमारे सामने गिर रहे थे, उपर टावर पर जाकर इतने पैसे बिगाड़ने की जरूरत भी नहीं थी ।
प्रपात के किनारे किनारे सड़क जा रही थी जहां पर्यटकों का हुजूम था, इस सड़क के पास ही बड़ी सड़क थी जिस पर वाहनों का आना जाना जारी था। लोग अपने अपने वाहनों में घूमते हुए भी इसका नजारा देख सकते थे। हमारे यहां एसे स्थान हों तो सरकार सबसे पहले वाहनों पर रोक लगाती है जिससे पर्यटकों को भारी कठिनाई होती है। उदयपुर का ही उदाहरण लें तो पर्यटक पहले अपने वाहन में बैठे बैठे फतहसागर झील का चारों तरफ से आराम से दर्शन कर लेता था, मगर इसकी अनदेखी करते हुए यहां पैदल भ्रमण करने वाले यात्रियों की सुविधा का ज्यादा ध्यान रखते हुए इस पर रोक लगा दी गई और पाल पर वाहनों हेतु बाचा खड़ी कर दी गई। यह सोचने कि किसे भी फुरसत नहीं कि घूमने आने वाला तो रोज फतहसागर आता है मगर पर्यटक तो बिचारा जीवन में एक बार, तकलीफ उठा, खर्चा कर आता है, उसे भी वंचित कर दिया जाता है। नियाग्रा के किनारे वाहनों के स्वच्छन्द विचरण की फतहसागर पर रोक के साथ तुलना कर मेरा जी बहुत जला ।
काफी देर बैठ लेने के बाद भी उठने का जी तो नहीं कर रहा था मगर आगे भी जाना था इसलिये पार्किंग से गाड़ी उठाई और हम टोरन्टो की तरफ निकल पड़े। टोरन्टो कनाडा का सबसे बड़ा शहर है। पहले इस शहर का नाम टाउन ओफ योर्क था। ब्रिटिश अधिकारियों ने यह इलाका आदिवासियों से खरीदा था, बाद में अमरीकी सेना ने यह शहर ब्रिटिश से छीन इसका नाम टोरन्टो रख दिया। हम नियाग्रा से निकले तो टोरन्टो तक सड़क के दोनों तरफ लगातार बस्तियां तथा उद्योगों का सिलसिला जारी रहा। टोरन्टो 130 कि.मी. है। कनाडा में वापस कि.मी.
और लीटर शुरू हो गये जो अमेरिका में मील और गेलन थे। पूरे रास्ते में हमारे के मिड वे की तरह जगह जगह एक पेट्रोल पम्प और एक माल नजर आई। माल खाने पीने के प्रसिद्ध ब्रान्डों के रेस्टोरेन्ट के अलावा आम जरूरत की चीज स्टोर तथा शौचालय आदि थे। पेट्रोल पम्प पर पेट्रोल की भी दो तरह की रेटे खुद अपने हाथ से पेट्रोल भरो तो उसकी कीमत 92 सेन्ट प्रति लीटर थी। सहाय से भरवाओ तो 96 सेन्ट प्रति लीटर थी। हम ओन्टेरियो प्रदेश में चल रहे थे और पूरे ओन्टेरियो प्रदेश की हाईवेज प एक ही ब्राण्ड के पेट्रोल पम्प व एक ही ब्राण्ड की माल नजर आ रही थी। लगता था इन्हें ही इसका ठेका प्रदान किया गया था। इस माल का नाम ओन रूट था।
रास्ते में जगह जगह टेक्स्टिंग स्टेशन बने हुए थे। लोग अक्सर गाड़ी चलाते चलाते एस.एम.एस. या वाटस एप करते रहते हैं, इसे रोकने के लिये सड़क के एक तरफ ये स्टेशन बने थे, यहां गाड़ी रोक कर वाहन चालक जितनी देर चाहे टेक्स्टिंग कर सकता था। कनाडा की तरह यह सुविधा अमेरिका की हाईवेज पर भी देखी जा सकती है।
हमारे यहां भी हाईवेज के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाकर अधिकाधिक हाईवेज बनाने का प्रयास किया जा रहा है फिर भी एक चीज की कमी बहुत खलती है जो कि अमेरिका व कनाडा की हाईवेज की विशेषता है। यहां की हाईवेज नो मेन्स आईलेण्ड है, ये शेष विश्व से कटे फटे एक द्वीप के समान है, इन हाईवेज पर अगर आप चलते रहे तो कहीं भी नहीं पहुँचोगे, बस हाईवेज पर ही घूमते रहोगे। अगर आपको कहीं जाना है तो हाईवेज पर जगह जगह बने एक्जिट लेने पड़ेंगे। हाईवेज के किनारे न कोई बस्ती है, न दुकानें हैं, न कोई रेस्टोरेन्ट या ढाबे हैं।
हमारे यहां तो हाईवे व्यस्त बस्तीयों से निकलती है, बस्ती वालों के दबाव पर हाईवे पर जगह जगह खतरनाक बैरियर बनाने पड़ जाते हैं। क्यूं नहीं हमारी हाईवेज भी नो मेन्स आइलेण्ड बनाई जाती, कहीं भी जाना है तो उसके लिये सहायक रोड बनाओ और एक्जिट निकालो।
कनाडा में कई स्थान एसे भी देखने को मिले जहां हाईवेज के किनारे भवन, घर या दुकानें थी, एसी सभी जगहों पर हाईवे के किनारे बड़ी बड़ी दीवारें खड़ी कर इन निर्माणों को अलग कर दिया गया। हमारे यहां भी बजाय बैरियर बनाने के सड़क के दोनों तरफ दीवारें खड़ी कर दी जायें तो बस्ती के लोगों के दुर्घटना की संभावना भी नहीं रहे और हाईवे पर भी वाहन निर्बाध चलते रहें।
नीले परबत बरफानी झीलें
Editorial

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