BMC election
मुंबई : बीएमएसी (BMC) में निगम चुनावों (Election) के लिए परिसीमन और वार्ड बढ़ाने के उद्धव सरकार (Uddhav government) के फैसले को पलटने वाले शिंदे सरकार (Shinde government) के कानून के खिलाफ शिवसेना (Shivsena) को उच्च न्यायालय में भले ही मुंह की खानी पड़ी है लेकिन पार्टी हार मानने को तैयार नहीं है। पार्टी अब उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी ।
सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी
शिंदे सरकार ने सितंबर 2022 के कानून के तहत वार्डों की संख्या 236 से घटाकर 227 कर दी और वार्ड सीमाएं 2011 की जनगणना के आधार पर तय की। शिंदे सरकार के इस कदम के खिलाफ पूर्व पार्षदों राजू पेडनेकर और समीर देसाई ने उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर की। उच्च न्यायालय
(High Court)
ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही है। शिवसेना नेता अनिल परब ने कहा कि उच्चतम न्यायालय (Court) जाने से पहले वकीलों द्वारा आदेश का अध्ययन किया जा रहा है।
आगे बढ़ेगी चुनावी प्रक्रिया
इस बीच उच्च न्यायालय के फैसले से चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अब जनसंख्या, प्राकृतिक सीमाओं आदि जैसे विभिन्न कारकों के आधार पर 227 सीटों की सीमाएं बदली जा सकती हैं। फिर सुझावों के बाद वाडों को महिला, ओबीसी, एससी, एसटी आदि जैसी श्रेणियों के लिए आरक्षित (Reserve) करने के लिए लॉटरी होगी। इस प्रक्रिया में कम से कम दो महीने लगेंगे। हालांकि अब शिवसेना सुप्रीम कोर्ट
(Supreme Court)
जाने के विकल्पों पर विचार कर रही है।
साल भर से टल रहे बीएमसी के चुनाव
इस बीच भाजपा ने आरोप लगाया है कि उद्धव ठाकरे चुनाव से बचने के लिए इन याचिकाओं के जरिए चुनाव में देरी की कोशिश कर रहे हैं। वहीं उद्धव गुट ने इन आरोपों का खंडन किया है। मालूम हो कि बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) का पिछला चुनाव फरवरी 2017 में हुआ था। इसका कार्यकाल 7 मार्च 2022 को समाप्त हो गया है, हालांकि चुनाव फरवरी 2022 में होना था लेकिन स्थगित कर दिया गया।
Editorial

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