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अजीत पवार ने अडानी और शरद पवार के मुलाकात पर दी अपनी प्रतिक्रिया
By EditorialPublished on
उद्योगपति गौतम अडानी (Gautam Adani) ने एनसीपी (NCP) प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) से उनके मुंबई (Mumbai) स्थित आवास सिल्वर ओक आई जाकर मुलाकात की। इसके बाद से सियासी गलियारों में काफी हलचल मची हुई है। एनसीपी नेता अजीत पवार ने कहा, “मैं इसके बारे में नहीं जानता, कई राजनीतिक लोग उनसे मिलते हैं। उनके (अडानी) पर लगे आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा इसके लिए एक समिति गठित की गई है, यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति से मिलता है, अगर वे एक-दूसरे को जानते हैं तो भी गलत नहीं है।
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मुंबई : उद्योगपति गौतम अडानी (Gautam Adani) ने एनसीपी (NCP) प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) से उनके मुंबई (Mumbai) स्थित आवास सिल्वर ओक आई जाकर मुलाकात की। इसके बाद से सियासी गलियारों में काफी हलचल मची हुई है। एनसीपी नेता अजीत पवार (Ajit Pawar) ने कहा, “मैं इसके बारे में नहीं जानता, कई राजनीतिक लोग उनसे मिलते हैं। उनके (अडानी) पर लगे आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा इसके लिए एक समिति गठित की गई है, यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति से मिलता है, अगर वे एक-दूसरे को जानते हैं तो भी गलत नहीं है।"
हिँडनबर्ग रिपोर्ट (Hindenburg Report) पेश होने के बाद से ही विपक्ष लगातार अडानी समूह के खिलाफ आक्रामक रुख अपना रहा है, इसी बीच, एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने अलग रुख अपनाया। एक इंटरव्यू में शरद पवार ने संसद सत्र, अडानी आदि कई मुद्दों पर टिप्पणी दी । पवार ने कहा, "पहले टाटा- बिड़ला समूहों का इस्तेमाल विपक्ष द्वारा सरकार की आलोचना करने के लिए किया जाता था । आजकल सरकार को निशाना बनाने के लिए अडानी - अंबानी समूहों के नाम का इस्तेमाल किया जाता है।" शरद पवार ने कहा, " अंबानी समूह ने पेट्रोकेमिकल्स और अन्य क्षेत्रों में काफी काम किया है। वहीं, अडानी समूह ने बिजली और अन्य क्षेत्रों में बहुत कुछ किया है। देश को इनकी जरूरत है। अगर सबूत है कि इन समूहों ने कुछ अवैध या गलत किया है, तो लोकतंत्र में आलोचना करने का अधिकार है, लेकिन अगर कोई सबूत नहीं है, तो यह गलत है।" बीजेपी (BJP) को घेरने के लिए कांग्रेस ने अडानी के खिलाफ हिंडनबर्ग का मुद्दा उठाया है। सत्र के दौरान लोकसभा बंद होने तक यह मुद्दा गरमाता रहा, लेकिन शरद पवार ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए जेपीसी यानी संयुक्त संसदीय समिति की जांच की बजाय सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के जज से जांच कराने की मांग की।

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