✕
हॉलमार्क के नियम के चलते ग्राहकों के सामने भी दुविधा की स्थिति
By EditorialPublished on
केंद्र सरकार (Central government) ने एक अप्रैल (April) से स्वर्णाभूषणों की हॉलमार्किंग करना अनिवार्य कर दिया है। नियम तो लागू कर दिया गया है लेकिन उसके लिये जरूरी साधनों और बुनियादी सुविधाओं का अभी तक समुचित इंतजाम नहीं किया गया है। मुंबई (Mumbai) शहर और उपनगरों में तकरीबन तीन लाख से ज्यादा जूलरी कारोबारी हैं और इस नियम के चलते अब उन्हें अपने स्वर्णाभूषणों पर हॉलमार्किंग करना जरूरी है। उधर हॉलमार्किंग (Hallmarking) के लिये उपलब्ध केंद्रों की संख्या केवल 100 है। ऐसे में सोना खरीदने वाले ग्राहकों को भी काफी
_202304211131015114.jpg)
x
_202304211131015114.jpg)
मुंबई : केंद्र सरकार (Central government) ने एक अप्रैल (April) से स्वर्णाभूषणों की हॉलमार्किंग करना अनिवार्य कर दिया है। नियम तो लागू कर दिया गया है लेकिन उसके लिये जरूरी साधनों और बुनियादी सुविधाओं का अभी तक समुचित इंतजाम नहीं किया गया है। मुंबई (Mumbai) शहर और उपनगरों में तकरीबन तीन लाख से ज्यादा जूलरी कारोबारी हैं और इस नियम के चलते अब उन्हें अपने स्वर्णाभूषणों पर हॉलमार्किंग करना जरूरी है। उधर हॉलमार्किंग (Hallmarking) के लिये उपलब्ध केंद्रों की संख्या केवल 100 है। ऐसे में सोना खरीदने वाले ग्राहकों को भी काफी दिक्कत झेलनी पड़ सकती है।
उल्लेखनीय है कि अक्षय तृतीया एकदम करीब है। यह सोना खरीदारी के लिहाज से सर्वाधिक शुभ मुहूर्तों में एक है। अक्षय तृतीया को ग्राहक (Customer) सोने की जमकर खरीदारी करते हैं। लेकिन अब हॉलमार्क के नियम के चलते ग्राहकों के सामने भी दुविधा की स्थिति है। कारोबार के लिहाज से जूलरों के लिये तो यह नियम सरदर्द साबित हो रहा है। मुंबई जूलरी एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और इंडियन बुलियन एंड जूलरी एसोसिएशन (Association) के प्रवक्ता कुमारपाल जैन के मुताबिक, मुंबई में तीन लाख से ज्यादा जूलरी कारोबारियों के बीच अभी तक हॉलमार्किंग को लेकर समुचित जागरूकता नहीं है। हालांकि जूलरों को इस बाबत जानकारी देकर उन्हें जागरूक किया जा रहा है। मुंबई में हॉलमार्किंग करनेवाले केंद्रों की तादाद भी पर्याप्त नहीं है। जूलरों द्वारा हॉलमार्किंग के लिये स्वर्णाभूषण भेजे जाते हैं तो वे समय पर नहीं मिलते। जाहिर है, मुंबई शहर कारोबार के लिहाज से देश का सर्वाधिक महत्वपूर्ण शहर है और ऐसे शहर में हॉलमार्किंग केंद्रों की तादाद बढ़ाना जरूरी है।
100 हॉलमार्किंग केंद्रों में से 75 मुंबई शहर जिले में तो 25 उपनगरीय जिलों में हैं। अनुमान के मुताबिक, हर जूलर प्रतिमाह करीब पांच हजार स्वर्णाभूषण हॉलमार्क के लिये देता है। एक जूलरी पर हॉलमार्किंग के लिये करीब एक घंटे का समय लगता है। इस हिसाब से 100 केंद्रों पर काम समय पर होना नामुमकिन है। लिहाजा जूलरों की मांग है कि इन हॉलमार्क केंद्रों की तादाद में जितना ज्यादा हो सके, इजाफा किया जाये।

Editorial
Next Story
Related News
X
