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न्यूयार्क 10 : पाकिस्तानी स्टोरों रेस्टोरेन्टों के नाम भी भारत पर
By EditorialPublished on 18 April 2023 5:30 AM IST
सभी वापस अपनी अपनी टेबलों पर बैठ गये। बीच का हिस्सा खाली कर एक कुर्सी लगाई गई और उस पर दुल्हन को बिठा दिया गया। अब वहां उपस्थित सभी कुंवारों को कहा गया कि वे एक तरफ एकत्र हो जायें। राजा शरारतपूर्ण मुस्कान के साथ मुझे भी उठाने लगा और सबको बताने लगा कि ये भी कुंवारे हैं, टेबल पर बैठी सभी स्त्रियां हंसने लगी मैं मन ही मन सोच रहा था कि राजा के साथ ये लड़कियां भी जिद न करने लगे। पर थोड़ी देर ठिठोली करने के बाद सब दुल्हन की तरफ देखने लगे।
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सभी वापस अपनी अपनी टेबलों पर बैठ गये। बीच का हिस्सा खाली कर एक कुर्सी लगाई गई और उस पर दुल्हन को बिठा दिया गया। अब वहां उपस्थित सभी कुंवारों को कहा गया कि वे एक तरफ एकत्र हो जायें। राजा शरारतपूर्ण मुस्कान के साथ मुझे भी उठाने लगा और सबको बताने लगा कि ये भी कुंवारे हैं, टेबल पर बैठी सभी स्त्रियां हंसने लगी मैं मन ही मन सोच रहा था कि राजा के साथ ये लड़कियां भी जिद न करने लगे। पर थोड़ी देर ठिठोली करने के बाद सब दुल्हन की तरफ देखने लगे।
दुल्हा आया, जमीन पर एक घुटने के बल बैठ गया और अपने मुँह से दुल्हन का गाउन ऊंचा करने लगा। सभी टकटकी लगाए उसकी तरफ देख रहे थे, मैं आश्चर्य चकित था कि यहां हो क्या रहा है। दुल्हे ने अपने मुँह से दुल्हन का गाउन पकड़ कर उसकी पूरी टांग नंगी कर दी। दुल्हे ने अब अपना मुँह उसकी जंघा की तरफ बढ़ाया और शीघ्र ही अपने मुँह से कपड़े सी एक वस्तु उसकी टांग के नीचे उतारने लगा। मैं सोच में पड़ गया यह क्या है एक बार तो मुझे लगा कि कहीं - दुल्हन की चड्डी तो नहीं मगर पास ही बैठे व्यक्ति ने बताया कि यह गार्टर है। यह नाईलोन व लेस से बना एक तरह का बेल्ट होता है जो दुल्हन अपने घुटने के उपर पहनती है।
दुल्हे ने पूरा गार्टर मुँह से निकाल हाथ में ले लिया और खड़े होकर हाथ ने ऊंचा कर सबको दिखाने लगा। पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अब दुल्हे ने उस गार्टर को घूमा कर उस तरफ फेंका जिधर सभी कुंवारों को खड़ा किया गया था। ऐसा माना जाता है कि जिस किसी के हाथों यह गार्टर लगेगा अगली शादी उसी की होगी। युवकों में उस गार्टर को पाने की होड़ मच गई। जिस कुंवारे के हाथ वह गार्टर लगा उसको सब बधाई देने लगे।
अब तमाम कुंवारी युवतियों को एक जगह एकत्र होने को कहा गया। बीच में से कुर्सी हटा दी गई और दुल्हन एक गुलदस्ता लेकर वहां खड़ी हो गई। दुल्हन ने चारों तरफ घूमते हुए वह गुलदस्ता कुंवारी लड़कियों के समूह पर फेंका। जिस युवती के हाथ यह गुलदस्ता लगे अगली शादी उसी की होने की मान्यता है।
जिस लड़की के हाथ गुलदस्ता लगा अब उस लड़की को बीचों बीच एक. कुर्सी लगाकर बिठाया गया तथा जिस लड़के के हाथों गार्टर लगा उसे भी वहां लाया गया। लड़के ने उस लड़की की टांग ऊंची की और अपने मुँह से उसका गाउन घुटने के उपर तक ऊंचा कर दिया। अब एक पांव पर घुटने के बल बैठते हुए ठीक उसी तरह लड़की के पांवों में यह गार्टर पहनाया जिस तरह दुल्हे ने दुल्हन के पांव से उतारा था। यह क्रिया पूर्ण होते ही सारा हॉल फिर तालियों से गूंज उठा। जरूरी नहीं कि इन दोनों लड़के-लड़की की शादी एक दूसरे से हो जाये मगर कभी कभी एस हो भी जाता है। कई बार शादी को उद्यत प्रेमी-प्रेमिका पूरी कोशिश करते हैं कि उन्हें इस क्रिया का मौका मिल जाये कई बार दोस्त व रिश्तेदार प्रयत्न पूर्वक एसा करवा भी देते हैं।
गुलदस्ता (Flower bouquet) फेंकने की रस्म तो सर्वविदित है मगर गार्टर की रस्म मेरे लिये नई थी। मैंने कुछ लोगों से इसके बारे में पूछा तो बताया कि इसके पीछे स्त्री की जनन शक्ति में वृद्धि की कामना निहित है। इस रस्म के पीछे कहीं न कहीं यौन भावना भी छिपी हुई है। गार्टर एक तरह से स्त्री के अधोवस्त्र का ही प्रतीक था। यहीं पता चला कि कई शादियों में दुल्हा दुल्हन से इतनी निर्दयता से पेश आता है कि दुल्हन शर्मसार हो जाती है।
अब सब लोग वापस अपने अपने टेबलों पर बैठ गए। भोजन का अन्तिम भाग शुरू हुआ। इसमें कई तरह की केक, पेस्ट्रियां, आइसक्रीम इत्यादि परोसे गए। धीरे धीरे संगीत फिर शुरू हुआ और लोग फिर नाचने एकत्र होने लगे। राजा मेरे पास ही बैठी एक मोटी सी युवती के कानों में कुछ कह रहा था।
यहां अधिकांश युवतियां मोटी ही थी पुष्ट जंघाएं, उन्नत वक्ष, उभरे नितम्ब और ताम्बे सा बदन कई गोरांगनाएं भी थी मगर किसी को भी अपने भारी पन का एहसास मात्र नहीं था। हमारे यहां तो युवतियां तनिक सी मोटी हो जाती हैं तो भी दुबले होने के जतन शुरू कर देती है। अब सब लोग एक साथ नाचने लगे। राजा मेरा भी हाथ पकड़ कर बीच में ले गया और उस लड़की को आगे कर दिया जिससे वह कानाफूसी कर रहा था। अब मेरी समझ में आ गया कि दोनों मिल कर मुझे नचाने की कोशिश में हैं। युवती ने मेरा हाथ पकड़ कर बीच में ले जाने की कोशिश की मगर मैंने हाथ झटक कर उससे क्षमा मांग ली। मैं एक तरफ खड़ा हो गया और वह युवती कब मेरे पीछे आकर मेरे कन्धों को चूमती हुई अपने लिपस्टिक के निशान मेरे कुर्ते पर छोड़ गई पता ही नहीं चला। राजा की चाल इस उपक्रम को कैद कर मेरे सभी मिलने वालों को वाट्स एप कर मजा लेने की थी। मेरी तकदीर अच्छी थी कि एन मौके का दृश्य ही उसके केमरे में नहीं आया। मुझे इस चाल का पता तब चला जब मैं बाथरूम गया और कुर्ते पर लिपस्टिक के निशान देखे। राजा को आकर इस बारे में पूछा तो उसने हंसते हंसते सारी शरारत बता दी।
इसके साथ ही पार्टी खत्म हो गई। राजा लिफाफा लाया था, वो देकर हम भी विदा होने लगे मगर दुल्हन ने हमें रोक दिया। सभी मेहमानों को स्मारिक के तौर पर एक बड़ा सा पेकेट गिफ्ट में दिया जा रहा था, उसने अपने हाथों से यह उपहार राजा को दिया और हम निकल पड़े। एक और यादगार शाम का समापन हुआ। कुछ सामान लेना था इसलिये रास्ते में एक इण्डियन स्टोर पर रुक गये नाम तो इण्डियन स्टोर था मगर इसे चलाने वाला पाकिस्तानी था। भारतीय प्रायद्वीप के तमाम देशों भारत, श्रीलंका, पाकिस्तान, बंगलादेश, नेपाल वगैरह के आप्रवासियों की अमेरिका में जरूरतें लगभग समान ही रहती हैं. इनमें सर्वाधिक सामग्री भारत से ही आती है और सर्वाधिक ग्राहकी भी भारतीय (Indian) आप्रवासियों से ही होती है इसलिये स्टोर चाहे बंगलादेशी चलाये या पाकिस्तानी, या फिर भारतीय ही, सभी उसके नाम के आगे इण्डिया जोड़ देते है ताकि अधिकाधिक ग्राहकों को आकर्षित किया जा सके। यही बात रेस्टोरेन्टों की भी है। ज्यादातर रेस्टोरेन्ट पाकिस्तानियों के ही हैं, उनके खाना बनाने वाले बहुत अच्छे होते है इसलिये खाना स्वादिष्ट बनता है। पाकिस्तान में शिक्षा का वातावरण नहीं है जिससे भारतीयों की तरह वे आई.टी. या अन्य उच्च क्षेत्रों में नहीं पाये जाते मगर हाथ के कामों में माहिर होने के कारण स्टोरों, रेस्टोरेन्टों, टेक्सियों आदि के पेशों में ये लोग छाये हुए हैं।
अगले दिन कनाडा की यात्रा पर जाना था इसलिये घर आते ही पेकिंग का काम शुरू कर दिया। फ्लाईट सुबह सात बजे की थी और एयरपोर्ट भी घर से काफी दूर है इसलिये सुबह जल्दी भी उठना था।

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