BJP
नई दिल्ली : कर्नाटक (Karnataka) में भाजपा (BJP) के अब तक के सबसे प्रभावशाली नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा (CM BS Yediyurappa) चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार और पूर्व उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सावदी टिकट न | मिलने के बाद कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। एक और पूर्व उपमुख्यमंत्री के. ईश्वरप्पा ने खुद ही ची लिखकर चुनाव नहीं लड़ने की | घोषणा कर दी। दूसरी तरफ भाजपा के टिकट पर लगभग चार दर्जन नए और युवा चेहरे मैदान में हैं। वर्तमान चुनाव जाहिर तौर पर अहम है, लेकिन इसी चुनाव के जरिये भाजपा | नेतृत्व ने भविष्य की भाजपा तैयार करने का भी रोडमैप तैयार कर लिया है।
कर्नाटक न सिर्फ दक्षिण में भाजपा का | अकेला मजबूत गढ़ है, बल्कि पूरे दक्षिण की लड़ाई यहीं से लड़ी जाने वाली है । जिस तरह प्रदेश में जदएस सीमित होता जा रहा है उसमें भाजपा और कांग्रेस ही मुख्य प्रतिद्वंद्वी हैं। विधानसभा चुनाव एक वर्ष के अंदर ही लोकसभा चुनाव भी हैं। परेशानी यह है कि येदियुरप्पा के बाद पार्टी में फिलहाल ऐसा कोई नेता नहीं है जो स्थिति को नियंत्रित कर सके और जनता व कार्यकर्ताओं में जोश भर सके। वर्तमान मुख्यमंत्री बीआर बोम्मई जाहिर तौर पर इस बार चेहरा हैं, लेकिन भविष्य के लिए पार्टी ऐसी युवा कतार चाहती है जो अगले पार्टी ऐसी युवा कतार चाहती है जो अगले 20-25 वर्ष तक नेतृत्व दे सके । येदियुरप्पा के पुत्र विजयेंद्र और हासन के विधायक प्रीथम गौड़ा ऐसे उम्मीदवार हैं जिन पर केंद्रीय नेतृत्व को ज्यादा भरोसा है। उनसे अपेक्षा की जा रही को ज्यादा भरोसा है। उनसे अपेक्षा की जा रही है कि वे खुद की सीट के अलावा भी कम से कम आधा दर्जन सीटों पर असर दिखाएं। विजयेंद्र लिंगायत हैं और गौड़ा वोकलिग्गा माना जा रहा है कि भाजपा अगर फिर सरकार बनाने में कामयाब रही तो ये दो नाम बड़े चेहरे बनकर उभरेंगे। खासकर विजयेंद्र पर सबकी नजर होगी क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में संगठन के लिए काम करते हुए उन्होंने मैसूर क्षेत्र की भी कुछ ऐसी सीटें जिताकर दीं, जो पार्टी अब तक नहीं जीत पाई थी। उन्होंने यह आत्मविश्वास भी दिखाया था कि पार्टी चाहे तो वह कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरमैया के विरूद्ध भी लड़ सकते हैं। गौड़ा में भी पार्टी ऐसा ही विश्वास देखती है, जिन्होंने हासन की किसी भी सीट से लड़ने की हामी भर दी थी। यह दस का गढ़ है । अनुसूचित जनजाति से आने वाले बी. श्रीरामुलू और अनुसूचित जाति के ए. नारायणस्वामी जैसे चेहरों की भी आजमाइश हो रही है। हालांकि नारायणस्वामी चुनाव नहीं लड़े रहे हैं, लेकिन चुनाव में उनकी भूमिका अहम है।
दरअसल, मुख्यतः लिंगायत की पार्टी मानी जाने वाली भाजपा ने इसी चुनाव से जातिगत विस्तार शुरू कर दिया है। बड़ी संख्या में वोकालिग्गा को भी टिकट दिया गया है । पिछली बार लगभग दो दर्जन सीटों पर वोकालिग्गा उम्मीदवार उतारे गए थे, जबकि इस बार तीन दर्जन से ज्यादा भाजपा उम्मीदवार वोकालिग्गा हैं। चुनाव की कमान भी वोकालिग्गा नेता एवं केंद्रीय मंत्री शोभा करांदलजे को दी गई है। जो येदियुरप्पा की विश्वस्त हैं। श्रीरामुलु और नारायणस्वामी जाति और जनजाति में अपना प्रभाव दिखाएंगे।
Editorial

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