Amit Shah
नई दिल्ली : राजस्थान कांग्रेस (Rajasthan Congress) में अभी खींचतान खत्म करने का कोई ठोस फार्मूला नहीं आ पाया है। हालांकि यह जरूर स्पष्ट कर दिया गया है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) और सचिन पायलट में किसी एक को चुनना हुआ तो समर्थन गहलोत को है। जबकि सचिन सब कुछ समझते हुए भी कोई फैसला नहीं ले पा रहे हैं। ऐसे में शनिवार को भरतपुर से अमित शाह (Amit Shah) ने सचिन पायलट (Sachin Pilot) और उनके समर्थकों को परोक्ष संदेश दे दिया।
शाह के अनुसार जमीन पर जनता के बीच ज्यादा काम होने के बावजूद कांग्रेस में उन्हें अशोक गहलोत से ज्यादा तवज्जो नहीं मिलने वाली है। यानी या तो पायलट समयावधि जाने बिना इंतजार करें या फिर राजनीति
(Politics)
में खुद को साबित करें। शाह ने इससे ज्यादा कुछ नहीं कहा। लेकिन इससे इन्कार नहीं किया जा सकता है कि पायलट अपनी अलग राह चुनें या फिर किसी के साथ जाएं, इसका फायदा भाजपा को भी मिल सकता है।
शनिवार को शाह ने सचिन पायलट का नाम लेते हुए कहा कि कांग्रेस के भीतर सत्ता के लिए अशोक गहलोत के साथ उनका संघर्ष बेमानी है क्योंकि नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा दो-तिहाई सीटों के साथ सत्ता में आ रही है। शाह ने पायलट को यह भी बता दिया कि कांग्रेस में रहकर केंद्रीय राजनीति हा(BJP)थ आजमाने के दिन भी अब लद गए हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस में पायलट के घनिष्ठ सहयोगी रहे कई युवा नेता अब भाजपा में हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया
(Jyotiraditya Scindia)
केंद्रीय मंत्री हैं। आरपीएन सिंह भी भाजपा के साथ आ चुके हैं। जितिन प्रसाद (Jitin Prasad) उत्तर प्रदेश में कैबिनेट मंत्री हैं। असम में कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा में आए हिमंत बिस्वा सरमा तो मुख्यमंत्री हैं। शाह ने सीधे तौर पर तो पायलट को कोई आमंत्रण नहीं दिया है। वैसे भी राजस्थान भाजपा की स्थिति दूसरे राज्यों के मुकाबले कुछ अलग है जहां कई वरिष्ठ व स्थापित नेता मौजूद हैं। लेकिन जानकारों का मानना है कि पायलट अगर अभी फैसला लेने से चूक गए तो उन्हें बहुत लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। कम से कम अपने समर्थक वर्ग को जोड़े रखने के लिए उन्हें कोई राह चुननी होगी। अगर अलग रास्ता अपनाते हैं तो संघर्ष जारी रखना होगा, अगर भाजपा के साथ आते हैं तत्काल पारितोषिक मिलने की उम्मीद ज्यादा है। शायद यही कारण है कि शाह ने पायलट के विश्वास को कुरेद दिया है। प्रशंसा भी की कि वे अशोक गहलोत की तुलना में ज्यादा लोकप्रिय हैं और जमीन पर उनकी पकड़ भी गहलोत की तुलना में ज्यादा है। लेकिन भ्रष्टाचार की काली कमाई के कारण कांग्रेस के खजाने में अशोक गहलोत का योगदान ज्यादा है, जिसकी बराबरी वो नहीं कर सकते हैं।
ऐसे में कांग्रेस में अपनी क्षमता के अनुरूप पद पाना उनके लिए संभव नहीं है । सचिन पायलट 2 दिन पहले घोषित रूप में वसुंधरा राजे सरकार के दौरान हुए भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अनशन पर बैठे थे, लेकिन सच्चाई यह है कि उनका निशाना मुख्य रूप से अशोक गहलोत की सरकार का भ्रष्टाचार ही है। इसके बाद कांग्रेस ने मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व पार्टी के वरिष्ठ नेता कमलनाथ को आगे कर सचिन पायलट को मनाने की कोशिश शुरू कर दी है। लेकिन अशोक गहलोत के अडिग रवैये को कारण कमलनाथ कितना सफल हो पाएंगें, यह देखना होगा।
Editorial

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