Prashant Kishore
पिछले दिनों बिहार में एमएलसी स्नातक चुनाव का परिणाम आया। हालांकि आमतौर पर तो इस चुनाव के परिणाम से बड़े राजनीतिक (Political) निहितार्थ नहीं निकाले जाते हैं, लेकिन इस बार इसमें कुछ ऐसा हुआ कि जिसके बाद पूरे राज्य में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। जो चुनाव परिणाम आया, उसमें सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जनसुराज समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी अफाक अहमद जीत गए। जनसुराज चुनावी रणनीतिकार से बिहार की राजनीति में उतरे प्रशांत किशोर का संगठन है। अफाक अहमद की जीत से सियासी हलकों में सभी हैरान हैं। यह परिणाम न सिर्फ महागठबंधन के लिए झटका था, बल्कि भाजपा (BJP) की भी चिंता बढ़ा गया। प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) कुछ महीनों से बिहार में पदयात्रा कर रहे हैं। एमएलसी स्नातक चुनाव के रूप में यह पहली बार था, जब उन्हें ताकत दिखाने का मौका मिला और इसमें वह कामयाब भी रहे। हालांकि महागठबंधन हो या भाजपा, दोनों खेमे उनकी जीत को खारिज कर रहे हैं और इसके पीछे स्थानीय कारण और उम्मीदवार की अपनी ताकत को वजह बता रहे हैं। लेकिन हकीकत यह है कि इस चुनाव के परिणाम ने राज्य में नए सियासी समीकरण को जन्म तो दे ही दिया है। तभी तो प्रशांत किशोर की इस जीत के बाद अब दोनों खेमे आंतरिक समीक्षा कर रहे हैं।
Editorial

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