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न्यूयार्क 9 : स्पेनिश वेडिंग में भाग लेने का अनूठा अनुभव
By EditorialPublished on 16 April 2023 5:30 AM IST
अगले दिन एक स्पेनिश वेडिंग में जाने को मिल गया। लड़की स्पेनिश (Spanish) थी, लड़का इटेलियन (Italian) और दोनों बरसों से अमेरिका (America) में रह रहे है इसलिये शादी तीनों संस्कृतियों का संगम थी। शादी तो एक दिन पूर्व चर्च में हो चुकी थी, उस दिन रिसेप्शन था। वर-वधू दोनों की यह दूसरी शादी थी फिर भी उत्साह किसी पहली शादी से कम नहीं था।
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अगले दिन एक स्पेनिश वेडिंग में जाने को मिल गया। लड़की स्पेनिश (Spanish) थी, लड़का इटेलियन (Italian) और दोनों बरसों से अमेरिका (America) में रह रहे है इसलिये शादी तीनों संस्कृतियों का संगम थी। शादी तो एक दिन पूर्व चर्च में हो चुकी थी, उस दिन रिसेप्शन था। वर-वधू दोनों की यह दूसरी शादी थी फिर भी उत्साह किसी पहली शादी से कम नहीं था।
निमंत्रण राजा और उसकी पत्नी के नाम था मगर वह मुझे ले गया। मैं थोड़ा अचकचाया तो बोला लड़की उसकी मित्र है और मुझे देख कर वह खुश ही होगी। हमारे यहां तो उपहारों और लिफाफों का चलन धीरे धीरे खत्म होता जा रहा है मगर यहां अब भी बरकरार है। हमारे काहों में तो उपहार या गुलदस्ते नहीं लाने का आग्रह होता है जबकि यहां कार्ड में उस स्टोर का नाम लिखा होता है जिससे उपहार खरीद कर लाने हैं।
अक्सर शादियों (Wedding) में एक ही तरह की कई कई चीजें उपहार में आ जाती हैं। जैसे तीन तीन चार चार मिक्सियां, कूकर, प्रेस, तवे वगैरा। इनका करो भी तो क्या यहां इससे बचने के लिये वर-वधू शादी के पहले ही एक बड़े स्टोर में चले जाते हैं और वहां अपनी पसन्द का सामान एक रजिस्टर में लिख आते हैं। जब कार्ड छपता है तो उसमें इस स्टोर का नाम लिखा होता है। लोग वहां जाकर उस लिस्ट के के अनुसार उपहार के पैसे दे देते हैं। रजिस्टर में उस वस्तु के नाम पर टिक लग जाता है जिससे अन्य कोई उसे नहीं ले कई वस्तुएं महंगी होती हैं तो लोग अपने अपने बजट के अनुसार उसका पैसा दे देते हैं, जब तीन चार लोगों द्वारा उसका पैसा पूरा हो जाता है तो उस पर भी टिक लग जाता है। निमंत्रणों पर भी पते वर- वधु अपने हाथ से लिखते हैं जिससे व्यक्तिगत आभास होता है।
जो लोग यह सब नहीं कर पाते वह लिफाफे में नकद राशि रख कर दे देते हैं। मैं पेन्ट शर्ट पहन कर जाने लगा तो क्रिस ने कहा कुर्ता पाजामा पहन कर ही जाओ, अच्छा लगेगा, शादी में भारतीय (Indian) हम दो ही थे, शेष सब वहीं के लोग थे। शादी एक बहुत बड़े परिसर में आयोजित थी। यह एक यूनिवर्सिटी का प्रांगण था. पहले यह भवन और जमीन किसी व्यक्ति की निजि सम्पदा थी, उसने यह सब यूनिवर्सिटी को दान दे दी थी। समूचा परिसर अत्यन्त व्यस्त इलाके में था उसीसे इसकी कीमत का अन्दाजा हो जाता था।
धन धान्य का जनजीवन में सर्वत्र महत्व है। हमारे यहां शादियों की विभिन्न रस्मों में जिस तरह इसका उपयोग होता है यहां भी यह देखने को मिलता है। शादी के बाद जब दुल्हा दुल्हन एक साथ निकलते हैं तो तमाम लोग उन पर चावल के दाने फेंकते हैं।
हमें पहुँचने में थोड़ी देर हो गई थी। रिसेप्शन की शुरूआत कोकटेल पार्टी से होती है। दुल्हा-दुल्हन के सभी आमंत्रित एक साथ एक हाल में इस पार्टी का आनन्द ले रहे थे। हम पहुँचे तब तक यह पार्टी समाप्त हो चुकी थी और अगले क्रम की तैयारी चल रही थी। ज्यूं ही हम पहुँचे दरवाजे पर हमारा नाम पूछा गया फिर एक बोर्ड की तरफ ईशारा किया गया। इस बोर्ड पर सभी मेहमानों के नाम लिखे थे तथा जिस टेबल पर उन्हें बैठना है उसका क्रम लिखा था। हमारा टेबल 9 था। हॉल में 20-25 रहे होंगे, प्रत्येक पर 12 लोग बैठे थे। बीच में खाली जगह छूटी हुई थी, एक तरफ गीत-संगीत का मंच बना था। हमारी टेबल पर हम दो के अलावा एक पुरुष और था बाकी शेष सभी स्त्रियां ही थीं। सबने हमारा स्वागत किया।
धीरे धीरे पूरा हॉल भरा गया। 10-12 महिलाएं एक ही तरह के परिधान में नजर आ रही थीं, ये सभी वधू की मित्र और सम्बन्धी थीं। शीघ्र ही हमारे सामने रखी प्लेटों पर सलाद और एक फुलके जैसी कोई चीज लाकर रख दी गई। खाद्य में अधिकांश मांसहारी ही होते हैं इसलिये कुछ भी खाने से मैं डर रहा था मगर सलाद खाने में कुछ भी एसा नहीं था। एकाध टूकड़ा उठाकर खाया तो मुँह जल गया। सलाद में कुछ छिडका गया था जिससे एसा लगा। मैंने फिर उसे छूआ भी नहीं। हमारी टेबल पर सब खा रहे थे मैं ही एसे ही बैठा था अजीब लग रहा था मगर इसमें भी आनन्दित होने का प्रयास किया। आखिर कुछ तो नया देखने को मिल ही रहा है।
उदयपुर (Udaipur) में कहां ऐसे अवसर मिलते हैं। पिछले दिनों जरूर मेरे परम मित्र क्रिस्टोफर की भानजी की शादी में भाग लिया था, पर वहां अपनापन था। अपना देश, अपने लोग, अपना घर। सभी के समक्ष शराब के जाम रखे थे। एक युवती ने अपने लिये पेप्सी मंगाई तो मैंने भी मंगा ली । पेप्सी की चुस्कियों के साथ ही एक दूसरे से बातें करने लगे।
शीघ्र ही दुल्हा दुल्हन ने हॉल में प्रवेश किया। सबने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। इसके बाद वो एक स्थान पर जाकर बैठ गये। अब सभी लोग एक एक करके उनके पास जाने लगे। वधू को चूम कर और वर से हाथ मिला कर उन्हें बधाई देने लगे। मैं सोचने लगा कि क्या मुझे भी वधू को चूमना पड़ेगा। वो तो मुझे जानती भी नहीं, क्या होगा। आखिर हमारी बारी भी आई। राजा ने वधू क चूमा और मेरा परिचय कराया। वह प्रसन्नता से मुझसे मिली और अपना गाल आगे कर दिया। यह एक निर्दोष सहज प्रक्रिया थी, मैं खामखाह ही टेन्शन लिये जा रहा था। उसके गाल आगे करते ही यंत्र चलित सा मेरा मुँह उधर बढ़ गया और सब कुछ पल भर में घट गया। हम आगे बढे तो दूसरे आ गये, क्रम चलता रहा।
एक विशिष्ट बात जो मुझे नजर आई वह यह थी कि सभी अन्जान होते हुए भी अत्यन्त मित्र भाव से पेश आ रहे थे। लड़कियों की संख्या ज्यादा थी, वे भी मुस्करा कर पहल कर पेश हो रही थी। हमारे यहां एसे उत्सवों में जाने पहचाने लोग तक खिंचे खिंचे रहते हैं, मुस्कुराना, अभिवादन करना तो बहुत दूर की बात है।
संगीत बराबर बज रहा था। स्पेनिश था या इटेलियन पता नहीं, मगर सुना सुना जरूर लग रहा था। हमारी फिल्मों में दोनों ही तरह के संगीत की भरमार रहती है इसलिये नयापन नहीं था संगीतकार शंकर जयकिशन के गीतों में तो इटेलियन धुनों की भरमार रहती थी।
संगीत शुरू होते ही सभी स्त्री पुरुष बीच के खाली प्रांगण में एकत्र हो गये और नाचने लगे। थोड़ी देर यह क्रम चला तो संगीत बन्द हो गया सब अपनी अपनी टेबलों पर जाकर बैठ गये। अब खाने का दूसरा चक्र शुरू हुआ। इस बार कई तरह की चीजें लाकर रख दी गई। मेरे काम की एक भी नहीं थी। सभी मांसाहारी व्यंजन थे सब खाने लगे, मैं चुपचाप बैठा रहा तो सामने बैठी एक लड़की ने पूछ लिया कुछ खा क्यूं नहीं रहे। मैंने उसे अपनी दुविधा बताई तो उसने एक वेट्रेस को बुला उसके कानों में कुछ कहा। थोड़ी देर बाद वह एक प्लेट में कुछ लेकर आई, यह कोई बेकरी आईटम था। मैंने दोनों का धन्यवाद किया और खाने लगा।
खाने का क्रम जारी था तो वर-वधु बीच में आकर नाचने लगे। वधू ने अपने पिता के साथ नृत्य किया तो वर ने अपनी सास के साथ। धीरे धीरे सभी आते गए और नृत्य में शामिल होते रहे। अब भाषणों का सिलसिला शुरू हुआ। वर वधू के निकटस्थ संबंधी आ आ कर संक्षिप्त भाषण देने लगे। कोई लिख कर लाया था तो कोई एक वाक्य तक बोलने में हिचकिचा रहा था।
अब एक बड़ा सा केक लाया गया। दुल्हा दुल्हन को एक विशिष्ट चाकू भेंट किया गया जिससे उन्होंने केक काटा। सभी ने करतल ध्वनि से इसका स्वागत किया। अब दुल्हा दुल्हन प्रत्येक टेबल पर जा कर वहां बैठे तमाम मेहमानों के साथ फोटो खिंचाने लगे। इस तरह विवाह में उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति के साथ उनके फोटो हो गये।

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