खटीक समाज ने किया 80 यूनिट रक्तदान
नई दिल्ली : पूरी दुनिया के लिए चुनौती बने कचरा प्रबंधन (Waste management) की दिशा में देश में भी कुछ ऐसे कदम उठने लगे हैं जो बाकी जगहों के लिए मिसाल बन सकते हैं और उससे भविष्य की राह भी दिख सकते हैं। अगर छत्तीसगढ़ ने कचरे को 37 श्रेणियों में अलग-अलग करने का काम किया है तो पणजी का 16-वे सेग्रिगेशन माडल सामने रखा है। सफलता की ये कहानियां देश के शहरी निकायों के लिए आत्मनिर्भरता का सबक भी हैं और पथ-प्रदर्शक भी।
पणजी में नगर निगम ने मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर में सूखे कचरे को 16 श्रेणियों में अलग-अलग करने की पहल शुरू की थी। यह विशेष व्यवस्था 35 रिहायशी कालोनियों में शुरू की गई । पणजी नगर निगम ने इन सभी कालोनियों के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्टोरेज सिस्टम माडल डिजाइन किया । खर्च तो कालोनियों ने अपने स्तर पर ही किया, लेकिन निगम ने सूखे कचरे को खरीदने का निर्णय लिया। इसके बदले कालोनियों को जो पैसा मिला, उसे वे अपने यहां बने सेग्रिगेशन सिस्टम के रखरखाव में खर्च कर रही हैं। जीरो वेस्ट के लक्ष्य के लिहाज से अहम मानी जा रही इस तरह की पहल ने रिहायशी कालोनी औरनगर निगम, दोनों को फायदा पहुंचाया है। खास बात यह है कि इस पहल में 50 से 60 महिलाओं को रोजगार भी मिला है।
  1. जीरो वेस्ट के लक्ष्य के लिए नगर निकायों और नागरिकों की मिली- निकायों और नागरिकों की मिली- जुली पहल का दिखने लगा असर
  2. छत्तीसगढ़ में कचरे को 37 श्रेणियों में किया जा रहा है अलग, तो पणजी ने पेश किया है 16-वे सेग्रिगेशन मॉडल
  3. पणजी में नगर निगम ने सूखे कचरे को खरीदने का लिया है निर्णय, इससे कालोनियों की आमदनी भी हो रही
अंबिकापुर पहले से पेश कर चुका है उदाहरण
पुणे और बेंगलुरू से पहले छत्तीसगढ़ का अंबिकापुर शहर पहले ही कचरा (Garbage) निस्तारण में अपनी धाक जमा चुका है। यहां घर-घर से कचरे को एमआरएफ यानी मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर तक लाया जाता है, जिसे 20 जैविक और 17 अजैविक श्रेणियों में विभाजित किया जाता है। जानवरों के खाने योग्य सामग्री गायों को में परिवर्तित किया जा रहा है और अजैविक खिला दी जाती है। जैविक कचरे को खाद कचरे को कागज, गत्ता, प्लास्टिक, धातु जैसी 17 श्रेणियों में बांटा जाता है।
बेंगलुरू में 3 आर की महत्वपूर्ण पहल
बेंगलुरू में वृहत महानगर पालिका ने रिड्यूस, रियूज और रिसाइकिल यानी 3 आर के रूप में अहम पहल की है । महानगर पालिका ने 185 अलग ड्राई वेस्ट कलेक्शन सेंटर स्थापित किए हैं। इन केंद्रों को कर्तव्य नाम दिया गया है। ये लोगों को अपने घर के बगल में ही कचरा निस्तारण की सुविधा प्रदान करने के लिए बनाए गए हैं। इसमें कारपोरेट सेक्टर को भी जोड़ा गया है ताकि जरूरी गैप फंडिंग की जा सके और कचरा मुक्त शहर की अवधारणा जमीनी स्तर पर मजबूत हो ।
Editorial

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