अब तक 10 लाख के नकली नोट चला चुका है आरोपी
उदयपुर : शहर की सुखेर थाना पुलिस (Police) ने 500-500 रूपए के नकली नोट सप्लाई करने वाले ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वह अब तक अपने साथियों के साथ मिलकर 10 लाख रूपए के नकली नोट बाजार में चला चुका है। नोट सप्लाई करने के आरोपी (Accused) को न्यायालय (Court) में पेश किया जहां से जेल भेज दिया। आरोपी ने मात्र 35 हजार रूपए में 64 हजार 500 रूपए के नोट बेचे थे।
मामले की जांच कर रहे सूरजपोल एसआई विरम सिंह ने बताया कि गत 8 अप्रेल को सुखेर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए महिला थाने के पास नाकाबंदी के दौरान मध्यप्रदेश नंबर की एक कार में 500-500 के 129 नकली नोट पकडते हुए चेतन पुत्र प्रहलाद भावसार निवासी खानुपरा मंदसौद एमपी को गिरफ्तार
(Arrested)
किया था। इसने यह नोर्ट 35 हजार में प्रतापगढ़ के गौरव कुमावत से खरीदना बताया था। इस पर एसआई विरम सिंह के नेतृत्व में एएसआई रणजीत सिंह, सुरेन्द्र सिंह, हैड कांस्टेबल शरीफ खान, ओमप्रकाश, हरिकृष्ण, लोकेश की टीम ने दबिश देकर गौरव पुत्र समरथ कुमावत निवासी इन्द्रा कॉलोनी प्रतापगढ़ को गिरफ्तार किया। पुलिस टीम ने इलेक्ट्रोनिक संसाधन लेपटोप, टेबलेट, कलर प्रिन्टर, डाटा केबल, पेन ड्राईव आरोपी के मकान से बरामद किया गया। आरोपी गौरव ने अब तक की पूछताछ पर अपने साथियों के साथ मिलकर करीब 10 लाख रूपये के 200, 500 एवं 2000 रूपये के नकली भारतीय नोट तैयार कर बाजार में चलाना स्वीकार कर चुका है। आरोपी की गिरफ्तारी एवं उपकरण जब्ती में पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ, डिप्टी प्रतापगढ एवं थानाधिकारी प्रतापगढ कोतवाली की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मामले में गैंग के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। आरोपी से जांच पूर्ण कर गुरुवार को कोर्ट में पेश किया जहां उसे जेल भेज दिया।
यूट्यूब से सीखा नकली नोट बनाना
पूछताछ में आरोपी ने गौरव ने बताया कि वह आईटीआई की शिक्षा प्राप्त कर करीब दो साल से अपने साथियों के साथ मिल कर यूट्यूब (You tube) से नकली नोट बनाने का तरीका सीख रहा था तथा करीब एक साल से नकली भारतीय नोट बना कर स्वयं एवं अपनी गैंग के सदस्यो के माध्यम से भारत के अलग-अलग राज्यो में नकली नोटो को चला रहा था। जो पैसा आरोपी को प्राप्त हो रहा था उससे वह अपना मौज - शौक पूरा कर रहा था ।
ऐसे बनता है नकली नोट
पुलिस के अनुसार आरोपी गौरव कुमावत द्वारा अपने साथियों के साथ मिलकर अपने प्रतापगढ स्थित मकान में लेपटोप एवं कलर प्रिन्टर की सहायता से 200 रूपये, 500 रूपये एवं 2000 रूपये के नकली नोट तैयार कर प्रिंट निकालता था। इसके बाद वह स्वयं एवं अपनी गैंग के सदस्यों के माध्यम से अपने विश्वसनीय व्यक्तियों से असली नोट प्राप्त कर दोगुनी राशि के नकली नोट देता था, जिसे बाद में बाजार में बेचा जाता था ।
Editorial

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