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न्यूयार्क 8 : जन्म दिन पर लाटरी टिकटों का अनोखा उपहार
By EditorialPublished on
थोड़ी देर में जोएल भी आ गई उसे देखते ही मैं पहचान गया। अब बूढी लगने लगी थी, वह भी मुझे पहचान गई और गाल से गाल मिला अभिवादन किया। वह अपनी भारत यात्रा को याद करने लगी। बार बार लीला बाईजी को याद करते हुए अफसोस जताया। इस बीच डगलस भी अपनी मंगेतर के साथ आ गया। उसे दवाई का पेकेट दिया तो उसने बहुत बहुत धन्यवाद दिया। इस बीच उसकी मां ने ईशारा किया कि वह मुझे पैसे दे। उसने पर्स खोल कर सौ-सौ डालर के नोट निकाले और मुझसे पूछा कि कितने देने हैं। मैंने साफ इन्कार कर दिया कि जिनके जरिये दवाएं आई हैं उन्होंने भी पैसे नहीं लि

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थोड़ी देर में जोएल भी आ गई उसे देखते ही मैं पहचान गया। अब बूढी लगने लगी थी, वह भी मुझे पहचान गई और गाल से गाल मिला अभिवादन किया। वह अपनी भारत यात्रा को याद करने लगी। बार बार लीला बाईजी को याद करते हुए अफसोस जताया। इस बीच डगलस भी अपनी मंगेतर के साथ आ गया। उसे दवाई का पेकेट दिया तो उसने बहुत बहुत धन्यवाद दिया। इस बीच उसकी मां ने ईशारा किया कि वह मुझे पैसे दे। उसने पर्स खोल कर सौ-सौ डालर के नोट निकाले और मुझसे पूछा कि कितने देने हैं। मैंने साफ इन्कार कर दिया कि जिनके जरिये दवाएं आई हैं उन्होंने भी पैसे नहीं लिये हैं तो हम कैसे ले सकते हैं। डगलस नहीं माना और नोट गिनने लगा।
सौ-सौ डालर के नोट देख एक बार तो जी ललचा गया कि ले लूं मगर फिर मैंने अपने आप को ही धिक्कारा कि मैं एसा सोच भी कैसे सकता हूं। मैं मना करता रहा तो राजा ने भी कह दिया कि ये दादा की तरफ से गिफ्ट है। मुझे मन ही मन हंसी आ गई कि मेरी तरफ से गिफ्ट वह भी एसी गोलियां ?
यह जानकर आश्चर्य हुआ कि डगलस के बड़े बड़े बेटे हैं जो शादी शुदा हैं। और उनके भी बेटे-बेटियां हैं। इसके बावजूद एसी दवाएं? डगलस की पत्नी का कुछ साल पहले निधन हो गया था और अभी वह अपनी मंगेतर के साथ लिव इन रिलेशन में था। दवाएं लेकर डगलस व मंगेतर ने विदा ली। डगलस को शायद जल्दी थी। मैं उसकी मंगेतर की तरफ देख रहा था। आज शायद उसकी खैर नहीं थी।
घर छोटा ही था, हम लोग भी माताजी के पास डाइनिंग टेबल पर ही बैठ गए थे। जोएल एकदम सटे हुए किचन में हमारे लिये कुछ बना रही थी। माताजी बैठे बैठे कुछ कार्डों को एक सिक्के से रगड़ कर साफ कर रही थी जिसका ढेर सारा कचरा टेबल पर एकत्र हो गया था। दरअसल ये लाटरी के कार्ड थे। हर कार्ड के उपर निश्चित अंक छपे हुए थे। जिन्हें जानने के लिये उस कार्ड को स्क्रेच करना पड़ता था। अगर अन्दर से एक ही तरह के अंक तीन बार निकल जाएं तो भारी ईनाम मिलता था।
माताजी लाटरी (Lottery) की इतनी शौकीन थी कि एक दिन पूर्व मनाये गये उनके जन्म दिन पर सभी ने उन्हें यही कार्ड उपहार में दिये थे। हमारे सामने वो 20-25 कार्ड लेकर बैठी थी जिन्हें रगड़ना बाकी था। 10-15 रगड़ चुकी थी जिनसे वह 5-7 डालर तो कमा चुकी थी। एसे कार्ड 1, 2, 5, 10 डोलर के हर जगह मिलते है। हर कार्ड पर ईनाम की राशि लिखी होती है जो लाखों डालरों में होती है। मगर एक एक दो दो डालरों से सैंकड़ों हजारों डालर के भी ईनाम होते थे जो अंक पर निर्भर होते थे।
30 साल पहले माताजी के इसी तरह के कार्ड पर 3 मीलीयन डालर का ईनाम खुला था। दावेदार तीन थे इसलिये उनके हिस्से में एक मीलीयन अर्थात दस लाख डालर आये। उन्होंने यह पैसा एक साथ नहीं लिया। लेतीं तो उसका 30 प्र.श. टेक्स में कट जाता और 7 लाख डालर ही मिलते। इसकी बजाय उन्होंने यह राशि समान किश्तों में 26 साल तक लेना पसन्द किया। अभी कुछ साल पूर्व ही उनकी किश्तें खतम हुई हैं।
अमेरिका (America) में लाटरी का जबर्दस्त चलन है। पहले हमारे यहां भी जिस तरह हर प्रदेश की लाटरी थी यहां भी हर प्रदेश की तो है ही एक केन्द्रीय लाटरी भी है। न्यूयार्क लोटो सिर्फ न्यूयार्क (New york) की लाटरी है, ऐसे ही हर प्रदेश की हैं। लोग कहीं भी कोई सामान खरीदते हैं और पैसे चुकाते हैं वहां हर जगह एक छोटी सी मशीन भी लगी होती है। सामान के साथ साथ वे इस मशीन से एक डालर की लाटरी की स्लिप भी निकाल लेते हैं। सौ-पचास डोलर के भुगतान में एक डालर और जुड़ जाता है तो पता भी नहीं चलता। हर तीसरे दिन इसका परिणाम निकलता है, उसके लिये भी हर जगह मशीनें लगी होती है। कहीं भी उस मशीन में आप स्लिप डाल दो पता चल जाता है कि आप ईनाम जीते या नहीं। सो-दो सो डालर तक के ईनाम तो वह दुकान वाला उसी वक्त स्लिप ले कर दे देता है।
कई लाटरियों के परिणाम नहीं खुलते तो हफ्ते दर हफ्ते उनकी राशि बढती जाती है। एक बार तो यह राशि 800 मीलीयन तक पहुँच चुकी है। कई लोग इस सिस्टम का फायदा भी उठाना चाहते हैं। वे इतने टिकिट (Ticket) खरीद लेते हैं कि किसी न किसी में तो ईनाम खुल जायगा तो सारे पैसे वसूल हो जाएंगे। 800 मीलीयन जीतने एक ग्रुप ने 250 मीलीयन के टिकिट खरीद लिये फिर भी उनके नम्बर पर लाटरी नहीं खुली। इतना जरूर हुआ कि 200 मीलीयन के ईनाम खुल गये फिर भी 50 मीलीयन का तो नुक्सान उठाना ही पड़ा।
लाटरियों के कई तरह के प्रकार है। हाउजी जैसी भी लाटरी होती है, क्रोस वर्ड पजल व नम्बरों की भी सैंकड़ों तरह की हर आदमी सोचता है एक डोलर में क्या है, इसीलिये यह उद्योग जबर्दस्त फल फूल रहा है। माताजी की 90 की उम्र में वक्त गुजारने का इससे बढिया जरिया क्या हो सकता है। उन्हें मजा भी आता है। एक मिलीयन जीतने के बाद इतनी बड़ी राशि उन्हें वापस कभी नहीं मिली। इतने सालों में 5-7 हजार डोलर जरूर इनसे कमाए होंगे।
अमेरिका (America) में विद्युत प्रवाह की प्रणाली अब भी 110 ही है जबकि अधिकांशतः देशों में 220 है। भारत के फोन चार्ज करने के लिये यहां एडोप्टर साथ लाना जरूरी होता है मगर मेरा लाया हुआ एडोप्टर यहां काम नहीं कर रहा था। नेट प्रयोग हेतु मैं आई पेड़ लाया था तथा एक फोन में भी अलग से सिम लेकर आया था। कनाडा (Canada) के लिये अलग तथा अमेरिका के लिये अलग। फोन चार्ज नहीं हुए तो इनका लाना ही बेकार हो जायगा। मैं सोच रहा था कि बाजार में एसा कोई एडप्टर मिल जाए तो मेरा काम हो जाए।
जोएल किचन से खाने पीने का सामान लाकर हमारे साथ बैठ गई तो सबसे पहले उसके सामने एडप्टर वाली परेशानी ही रखी। जोएल भारत के साथ कई देशों में घूम चुकी है उसे भी इस तरह की समस्या का सामना करना ही पड़ता है इसलिये वह अपने पास ढेर सारे एडप्टर रखती है।
मेरी बात सुनकर वह उठी और कई तरह के एडप्टर व तार मेरे सामने लाकर रख दिये। उसने भारत यात्रा के दौरान आई इसी तरह की परेशानी का जिक्र किया और बताया कि तबसे वह हर तरह के एडप्टर साथ लेकर चलती है। इतने एडप्टरों में से एक मेरे काम का निकल गया। उसने खुशी खुशी वह मुझे दे दिया। उसके इस तरह के सहकारी स्वभाव से मैं बहुत प्रभावित हुआ।
बाहर वर्षा जारी थी, माताजी का कार्ड रगड़ना भी अबाध था। एक कार्ड पर उनको 15 डालर मिल गये तो खुश हो गई कि इतनी देर से मेहनत कर रही हैं, कुछ तो मिला। कार्ड देकर आस पास के किसी भी स्टोर से यह रकम प्राप्त की जा सकती है। शाम हो रही थी इसलिये हमने विदा लेना ही बेहतर समझा क्यूंकि न्यूयार्क का शाम का ट्राफिक जबर्दस्त होता है।

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