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न्यूयार्क : 7 । अमेरिका का मौसम विभाग भी हमारी ही तरह अनिश्चित
By EditorialPublished on
मेरी घबराहट धीरे धीरे कम हो रही थी। जो होना था सो हो गया, गनीमत थी कि इतने में ही निपट गये, कहीं अधिक लग जाती तो सारी यात्रा ही चौपट हो जाती। मैं किसी प्रकार के मुकदमे के पक्ष में नहीं था मगर राजा का गुस्सा भी स्वाभाविक था। प्रेम बिचारा पशोपेश में था। वह होटल की लापरवाही से तो नाराज था ही मगर होटल वाला भी उसके मिलने वाला था। उसने राजा को शांत किया कि

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