पैंथर द्वारा वृद्ध का शिकार का मामला

उदयपुर : शहर के समीप बड़गांव में बाबा की पालड़ी गांव में एक पैंथर द्वारा एक वृद्ध का शिकार करने (Hunting) के मामले में रविवार को मोर्चरी में मृतक के परिजनों, समाज जनों और ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया। परिजन, ग्रामीण और समाज के लोग 50 लाख रूपए के मुआवजे एक को सरकारी नोकरी पर अड़ गए और शव उठाने से इंकार कर दिया। बाद में पुलिस (Police) और प्रशासनिक अधिकारियों (Administrative officers) से हुई बातचीत के आधार पर 12 लाख रूपए मुआवजा और यदि मृतक द्वारा सहकारी समिति से लोन लेने के लिए दौरान बीमा करवाया होगा तो 10 लाख रूपए बीमें का कुल 22 लाख रूपए और मृतक के एक आश्रित को संविदा नौकरी दिलवाने का आश्वासन दिया । घटना के बाद वन विभाग ने पैंथरों को पकड़ने के लिए क्षेत्र में पांच पिंजरे लगाए है और करीब दो घंटे तक दो ड्रोन उड़ाकर पैंथरों की तलाश की पर सफलता नहीं मिली।
जानकारी के अनुसार फतहसिंह (70) पुत्र नवल सिंह निवासी बाबा की पालड़ी बड़गांव शनिवार शाम को करीब 7-7.30 बजे खेत में रखा गेहूँ देखने के लिए गया था। खेत में घात लगाकर बैठे पैंथर ने इस वृद्ध पर हमला कर दिया। पैंथर (Panther) इस वृद्ध को गले से पकड़कर दूर तक घसीटता हुआ लेकर गया, जिससे यह वृद्ध शोर नहीं मचा सका और बाद में पैंथर खेत में ही इस वृद्ध के बाएं पांव को घुटनों तक खा गया, जिससे इस वृद्ध की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। बाद में पैंथर ने इस वृद्ध का पेट भी फाड़ दिया। परिजन तलाशने निकले तो यह खेत में मरा पड़ा था। मृतक के शव को मोर्चरी में रखवाया गया। रविवार सुबह मोर्चरी में मृतक के समाज के लोग, परिजन और गांव के अन्य ग्रामीण एकत्रित हो गए। इस दौरान ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा, पंचायत समिति सदस्य भुवनेश व्यास, सरपंच संजय शर्मा, कांग्रेस नेता टीटू सुथार, पूर्व सरपंच कैलाश शर्मा, खरवड़ चदाणा समाज के चौखला अध्यक्ष किशन सिंह, इंटक अध्यक्ष हरिसिंह, अधिवक्ता सोहन सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष रामसिंह विप्र सेना के प्रदेशाध्यक्ष दिनेश शर्मा व समाज के लोगों ने 50 लाख रूपए मुआवजा, मृतक के एक परिजन को सरकारी नौकरी देने पर अड़ गए। पुलिस-प्रशासन ने इस बारे में जिला कलेक्टर ताराचंद मीणा से बात की तो नौकरी व इतने बड़ा मुआवजा का मामला सरकार स्तर पर होने पर सहमति नहीं बनी तो परिजन व समाज के लोग धरने पर बैठ गए।
करीब दो घंटे तक लोग धरने पर बैठे रहे और आक्रोश जताते रहे। बाद में उपखण्ड अधिकारी बड़गांव रमेश बहेड़िया, तहसीलदार सुरेश विश्नोई, वन विभाग से नरपत सिंह, अंबामाता थानाधिकारी रविन्द्र सिंह, हाथीपोल थानाधिकारी योगेश चौहान ने ग्रामीणों (Villager) व प्रतिनिधियों से बात की। जिसमें यह तय किया गया कि 5 लाख रूपए चिंरजीवी योजना में, 5 लाख रूपए वन विभाग व 2 लाख रूपए राजीव गांधी किसान मित्र योजना में देना तय किया गया। इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि मृतक ने सहकारी समिति से लोन ले रखा था और उस दौरान बीमा करवाया होगा तो 10 लाख रूपए बीमा राशी के रूप में मिलेगी। साथ ही मृतक के एक आश्रित को संविदा के आधार पर नौकरी दी जाएगी। इसके बाद परिजन माने और शव ले जाने पर राजी हुए। बाद में पुलिस
(Police)
ने पोस्टमार्टम (Post mortem) करवाया और शव परिजनों को दिया। जिसका पुलिस सुरक्षा के बीच अंतिम संस्कार करवाया गया।
5 पिंजरे लगाए और दो ड्रोन उड़ाए
इधर घटना की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग की ओर से पांच पिंजरे लगाए गए है, जिसमें तीन पिंजरे तो घटना स्थल के आस-पास लगाए है और दो पिंजरे जहां पर पैंथर पानी पीने आते है वहां पर लगाए है। विभाग का मानना है कि पैंथर किसी इंसान का शिकार करता है तो दूसरी बार वहां पर जरूर आता है। वहीं रविवार को करीब दो घंटे तक विभाग दो ड्रोन उड़ाकर पैंथर की स्थिति जानने का प्रयास किया, पर पैंथर का पता नही चला।
शाम को हुई मूवमेंट
शाम को पैंथर की मूवमेंट हुई। बताया जा रहा है। कि गांव के ग्रामीणों ने पैंथर को पानी वाले स्थान की ओर जाते हुए देखा था तो ग्रामीणों ने पंचायत समिति सदस्य भुवनेश व्यास को बताया, जिस पार व्यास ने वन विभाग के अधिकारियों को बताया, जिस पर टीमों को मौके पर भेजा गया।
प्रशासन की अनदेखी पर ग्रामीणों में आक्रोश और दहशत का माहौल
इस घटना के बाद से ही ग्रामीणों में दहशत भी व्याप्त है और आक्रोश भी है। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व के कई बार शिकायत देने के बाद भी विभाग ने कार्यवाही नही की। यदि समय रहते दोनों पैंथर को पकड़ लिया जाता तो यह घटना नहीं होती यह प्रशासन की घोर लापरवाही है। वहीं शाम होते ही ग्रामीण घरों में चले गए और गांव पूरा सुनसान हो गया। वहीं इस घटना के कारण गांव में चूल्हे नहीं जले। बताया जा रहा है मृतक काफी व्यवहारिक था और हर सुख-दुख काम आता था।
Editorial

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