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राजभर व शिवपाल को घेर सरकार ने दिए सियासी उलटफेर के संदेश
By EditorialPublished on
यूपी (UP) विधानसभा (Assembly) के बजट सत्र के दौरान सदन में भाजपा (BJP) और सपा- रालोद के बीच हुए तल्ख संवाद ने मिशन- 2024 (Mission- 2024) के सियासी समर में पक्ष-विपक्ष के वार पलटवार की पूरी झलक दिखा दी। भाजपा ने जिस तरह विपक्ष के सवालों आरोपों का तेवर के साथ जवाब दिया वैसे ही कानून-व्यवस्था और विकास के सहारे सपा की पिछली सरकारों (Governments) की पोल खोली। सपा ने भी पूरी तैयारी के साथ भाजपा को घेरने में कोई कोर कसर न छोड़, साफ कर दिया कि सियासी समर में वह कड़ी चुनौती पेश करेगी और सत्ता - विपक्ष में तीखी तकरा
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लखनऊ : यूपी (UP) विधानसभा (Assembly) के बजट सत्र के दौरान सदन में भाजपा (BJP) और सपा- रालोद के बीच हुए तल्ख संवाद ने मिशन- 2024 (Mission- 2024) के सियासी समर में पक्ष-विपक्ष के वार पलटवार की पूरी झलक दिखा दी। भाजपा ने जिस तरह विपक्ष के सवालों आरोपों का तेवर के साथ जवाब दिया वैसे ही कानून-व्यवस्था और विकास के सहारे सपा की पिछली सरकारों (Governments) की पोल खोली। सपा ने भी पूरी तैयारी के साथ भाजपा को घेरने में कोई कोर कसर न छोड़, साफ कर दिया कि सियासी समर में वह कड़ी चुनौती पेश करेगी और सत्ता - विपक्ष में तीखी तकरार देखने को मिले तो हैरत नहीं ।
18वीं विधानसभा (Assembly) के पहले सत्र में विपक्ष सत्तापक्ष की तकरार ने साफ कर दिया कि आमजन के विकास के लिए दोनों का मिल कर काम करना अभी भी स्वप्न ही है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना (President Satish Mahana) के प्रयासों से उम्मीद बंधी थी कि यह सत्र इतिहास बनाने वाला होगा। उनकी कोशिश थी कि किसी भी मुद्दे पर गतिरोध न उत्पन्न हो और सदन का स्थगन न किया जाए। लेकिन शुरूआत में ही जिस तरह राज्यपाल (Governor) के अभिभाषण में विपक्ष ने विरोध किया उसने साफ संदेश दे दिया कि करीब एक साल बाद होने वाले चुनावों में भी सपा का कुछ ऐसा ही रूख रहेगा ।
सपा ने बेरोजगारी - महंगाई के मुद्दे पर घेरा
सदन का मौहाल प्रयागराज में हुए उमेश पाल हत्याकांड के बाद तब्दील हो गया। सपा ने सरकार के हर आरोपों पर दूसरे दिन तैयारी कर हमला किया। जातीय जनगणना पर सपा ने महाकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविताओं के जरिये सरकार (Government) को घेरने की कोशिश की। नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव द्वारा खुद को शूद्र कहने का मुद्दा हो, रामचरित मानस की चौपाइयां या फिर सदन में पुलिस कर्मियों को सजा देने की प्रक्रिया, विरोध पुरजोर तरीके से दर्ज करा कर उन्होंने संदेश दिया कि मिशन-2024 में भी पार्टी प्रचार के दौरान इन्हीं मुद्दों के जरिये भाजपा (BJP) को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
सत्तापक्ष ने दिया आक्रामकता से संदेश
कहते हैं युद्ध की तरह सियासी रण में भी आक्रामकता का अपना महत्व है। किसी सियासी मुद्दे पर पहले पूरी शक्ति से प्रहार करना ही जीत को आसान बनाता है। कुछ इसी तर्ज पर नेता सदन योगी आदित्यनाथ ने सदन में सपा को जमकर घेरा । उन्होंने सपा सरकार की कानून-व्यवस्था, सपा सरकारों के भ्रष्टाचार के अलावा विकास की अवरूद्ध योजनाओं की आलोचना कर पोल-पट्टी खोली। वैश्विक निवेशक सम्मेलन के जरिये आए निवेश व भाजपा सरकार में बीते छह वर्षों के दौरान तब्दील हुई यूपी की तस्वीर के जरिये भी उन्होंने विपक्ष को निरूत्तर करने की कोशिश की । नेता सदन के तेवरों ने स्पष्ट कर दिया कि सियासी रण में भी भाजपा ऐसे ही मुद्दों के जरिये सुशासन का संदेश लेकर जनता के बीच जाएगी।
ओम प्रकाश (Om Prakash) के जरिये सियासी उलटफेर की कवायद
जातीय जनगणना के मुद्दे पर योगी ने ओम प्रकाश राजभर को सपा के कार्यकाल में हुई भर्तियों में एक ही जाति विशेष को तवज्जो देने तथ्यों को पेश कर कुछ अलग संदेश देने की कोशिश की। कभी सरकार की तीखी आलोचना करने वाले ओम प्रकाश से खुलकर योगी का सदन में मुखाबित होना सभी को आश्चर्य में डाल गया। ओम प्रकाश की भाजपा (BJP) से नजदीकियां इन दिनों चर्चा में हैं। उन्होंने सदन में सपा का किसी भी मुद्दे पर साथ नहीं दिया। न वह राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान वेल में आए और न ही किसी अन्य मुद्दे पर सपा का साथ दिया। ऐसे में उनके जरिये प्रदेश की सियासत में जल्द ही कोई नया उलटफेर हो तो हैरत नहीं। उनके मंत्रिमंडल में शामिल होने या फिर उन्हें लोकसभा चुनाव के दौरान मनचाही सीटें देने की चर्चाएं आम हैं।
शिवपाल के सम्मान को बनाया नया सियासी तीर
योगी ने शिवपाल को सपा द्वारा दिए गए सम्मान को बड़े ही बारीकी से सियासी तीर के रूप में इस्तेमाल किया। इसके जरिये उन्होंने एक ओर यह संदेश देने की कोशिश की कि भाजपा की वजह से ही उन्हें सपा सम्मान दे रही है। वहीं उन्होंने 'चचा इधर यानी सत्तापक्ष की ओर होते तो अच्छा होता.. ' कहकर संदेश दिया कि पार्टी चाचा भतीजे में रहे मतभेद का लाभ लेने में पीछे नहीं हटेगी।

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