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काशी विश्वनाथ की तर्ज पर होगा मुंबादेवी परिसर का पुनर्विकास
By EditorialPublished on
काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple) की तर्ज पर मुंबादेवी (Mumbadevi) मंदिर परिसर का पुनर्विकास होगा। गुरुवार को पूर्व मंत्री राज के पुरोहित की मांग पर मुख्यमंत्री शिंदे ने मुंबादेवी परिसर का दौरा किया। उसके बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (CM Eknath Shinde) ने
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मुंबई : काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple) की तर्ज पर मुंबादेवी (Mumbadevi) मंदिर परिसर का पुनर्विकास होगा। गुरुवार को पूर्व मंत्री राज के पुरोहित की मांग पर मुख्यमंत्री शिंदे ने मुंबादेवी परिसर का दौरा किया। उसके बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (CM Eknath Shinde) ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार मुंबादेवी मंदिर विकास प्राधिकरण की स्थापना के संबंध में सकारात्मक निर्णय लेगी। मुख्यमंत्री शिंदे ने मुंबादेवी के दर्शन के बाद मंदिर परिसर का निरीक्षण किया और पुरोहित से क्षेत्र की पूरी जानकारी ली।
पुरोहित ने अपनी मांगों का लिखित में एक पत्र मुख्यमंत्री को दिया। मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा, 'मुंबादेवी एक प्राचीन मंदिर है और इसके प्रति सभी की आस्था, विश्वास और प्रेम है। कई भक्त मुंबादेवी मंदिर क्षेत्र में आते हैं। मुंबईकरों की मांग है कि इसे काशी विश्वनाथ मंदिर और उज्जैन के महाकाल मंदिर (Mahakal Temple of Ujjain) कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री शिंदे ने यह भी कहा कि सरकार इस क्षेत्र में दर्शन पंक्ति, पार्किंग और आवश्यक सुविधाओं के विकास के लिए सभी प्रयास करेगी। इस मौके पर महिला एवं बाल विकास मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर, सांसद राहुल शेलाले, कॉर्डिनेटर आशीष कुलकर्णी, विधायक सदा सरवनकर, पूर्व मंत्री डॉ. दीपक सावंत, और पूर्व पार्षद आकाश पुरोहित, अतिरिक्त नगर आयुक्त पी. वेलारासु और अन्य उपस्थित थे।
आखिर मेहनत रंग लाई
काफी लंबे समय से मुंबादेवी क्षेत्र के पूर्व विधायक राज के पुरोहित मुंबादेवी परिसर के पुनर्विकास (Redevelopment) के लिए संघर्षरत है । पुरोहित ने क्षेत्र का विधायक रहते हुए और बाद में भी मुंबादेवी मंदिर के विकास के मुद्दे को ठंडा नहीं पड़ने दिया। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मुंबई के प्रभारी मंत्री दीपक केसरकर, मुख्यमंत्री कार्यालय (Chief Minister's Office) से लगातार संवाद साधा और सभी का मंदिर परिसर का दौरा करवाया और लिखित में अपनी मांग रखी। पुरोहित ने बीएमसी और राज्य सरकार के अधिकारियों से भी लगातार संवाद साधा और अपनी मांग को मजबूती के साथ उठाया। तभी जाकर आखिर राम नवमी (Ramnavami) के दिन पुरोहित की मन्नत पर मुख्यमंत्री ने मुहर लगाई।

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