Manoj Thackeray
जयपुर : महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के चिंतन, दर्शन और विचारों की प्रासंगिकता (Relevance) कभी खत्म नहीं होगी और हर दौर में गांधीवादी विचारधारा (Gandhian ideology) पथ-प्रेरक के रूम में व्यक्ति, समाज और दुनिया का मार्गदर्शन करते रहेंगे। यह कहना है जाने माने गांधीवादी विचार मनोज ठाकरे का। जिला परिषद (District Council) सभागार में शांति एवं अहिंसा विभाग के तत्वाधान में आयोजित जिलास्तरीय (District level) गांधी दर्शन प्रशिक्षण शिविर (Training camp) के दूसरे दिन अपने संबोधन में ठाकरे ने कहा कि आज भगत सिंह (Bhagat Singh) और महात्मा गांधी को लेकर छिड़ी बहस महज दुष्प्रचार है, ऐसे समय में गांधीवादी विचारों का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है। हमें अपने विवेक एवं बुद्धि से किसी भी विचारधारा को आत्मसात करना चाहिए। समारोह में वक्ताओं ने महात्मा गांधी के व्यक्तित्व, चरित्र एवं जीवन मूल्यों पर अपने विचार रखे और जन-जन में गांधी दर्शन जागृत करने का आह्वान किया।
गांधीवादी विचारक बीएम शर्मा ने प्रशिक्षणार्थियों को महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के दक्षिण अफ्रीका के प्रवास की जानकारी देते हुए कहा कि गांधीजी के विचार (Thoughts of Gandhi ji) इतिहास नहीं भविष्य है। गांधीवादी मूल्य जीवन की सबसे सार्थक और कठिन कसौटी है। राजस्थान साहित्य अकादमी के अध्यक्ष दुलाराम सहारण ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य है, इसलिए युवाओं को गांधी जी से त्याग, सत्याग्रह एवं सहनशीलता की शिक्षा लेकर स्वयं के चरित्र में क्षमा करने की प्रवृत्ति को विकसित करने का प्रयास करना चाहिए।
शांति एवं अहिंसा (Peace and nonviolence) विभाग के शासन सचिव नरेश ठकराल ने कहा कि गांधीवादी विचारों के प्रचार एवं जन जागरूकता के लिए शांति एवं अहिंसा विभाग की स्थापना करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है।
उन्होंने कहा कि ब्लॉक स्तर से राज्य स्तर तक गांधी दर्शन समितियों का गठन किया गया है। आगामी दिनों में 50 हजार युवाओं को महात्मा गांधी प्रेरक की जिम्मेदारी प्रदान की जाएगी। समापन सत्र में जिला परिषद की अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती सुमन देवी, शांति एवं अहिंसा निदेशालय के उपनिदेशक (Deputy Director) हाकम खान, जिला संयोजक सवाई सिंह सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। दो दिवसीय शिविर में रूपेन्द्र सिंह चांपावत ने मंच संचालन किया। इस दौरान शिविर के आयोजन में योगदान देने वाले स्वयंसेवकों (Volunteers) को सम्मानित भी किया गया ।
Editorial

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