Rahul Gandhi
संजय गुप्त
मानहानि एक मामले में के सूरत की अदालत से दो वर्ष की सजा पाए राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की संसद (Parliament) सदस्यता समाप्त होना उनके साथ साथ कांग्रेस (Congress) के लिए भी एक बड़ा झटका है। उन्हें यह सजा इसलिए सुनाई गई, क्योंकि उन्होंने 2019 में कर्नाटक (Karnataka) की एक सभा में यह बोला था कि सारे चोरों का नाम मोदी (Modi) क्यों होता है? इसके लिए उन्होंने माफी मांगने से इन्कार कर दिया और इसी कारण वह मानहानि के दोषी पाए गए। चूंकि कानून यह कहता है कि यदि कोई विधायक- सांसद दो वर्ष की सजा पाता है तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाएगी, इसलिए वह पूर्व सांसद हो गए। उन्हें अपनी सदस्यता बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी होगी। कांग्रेस इसके लिए तैयारी कर रही है, लेकिन इसी के साथ वह इस मामले को राजनीतिक
(Political)
रूप भी दे रही है। राहुल जिस तरह यह कह रहे हैं कि सत्य उनका भगवान है और वह भारत की आवाज के लिए लड़ते रहेंगे, उससे यह साफ है कि वह एक कानूनी मामले को राजनीतिक रूप देना चाहते हैं । यह समय बताएगा कि इसमें उन्हें कितनी सफलता मिलेगी, क्योंकि तथ्य तो यही है कि अदालती सजा के कारण उनकी सदस्यता गई है। यदि उन्होंने अपनी अपमानजनक टिप्पणी के लिए माफी मांग ली होती तो वह बच सकते थे, लेकिन उन्होंने इससे इन्कार किया।
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) किसी के खिलाफ कुछ भी बोलते रहते हैं। यह सही है कि चुनावों के दौरान नेता बढ़-चढ़ कर बोलते हैं, लेकिन इसकी भी एक सीमा होती है। राहुल प्रायः इस सीमा का उल्लंघन करते हैं । प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर लेना उनका प्रिय शौक है । वह उन पर निरंतर निजी हमले करते रहते हैं। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान वह प्रधानमंत्री को लक्ष्य करके चौकीदार चोर है का नारा लगाते थे। एक बार उन्होंने यह कह दिया था कि अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया कि चौकीदार चोर है। इसके लिए उन्हें सुप्रीम कोर्ट
(Supreme Court)
से माफी मांगनी पड़ी थी। मानहानि मामले में उन्होंने अहंकारवश मोदी समाज से माफी नहीं मांगी। वह आसानी से ऐसा कर सकते थे, लेकिन वह अपनी जिद पर अड़े रहे। वह इस सजा से बच सकते थे, यदि उन्होंने दस साल पहले उस अध्यादेश की प्रति न फाड़ी होती, जो सजा पाए नेताओं को बचाने के लिए लाया गया था। उनके इस कृत्य से मनमोहन सरकार को शर्मिंदा होना पड़ा था और उसे अध्यादेश वापस लेना पड़ा था, जिसमें कहा गया था कि यदि कोई जनप्रतिनिधि अपनी सजा के खिलाफ ऊंची अदालत में अपील कर देता है तो अपनी सदस्यता बचाए रख सकता है। ध्यान रहे सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया था कि दो वर्ष या उससे अधिक सजा पाने पर किसी विधायक-सांसद
(MLA-MP)
की सदस्यता स्वतः चली जाएगी। इसी के खिलाफ अध्यादेश लाया गया था ।
संसद सदस्यता जाते ही राहुल गांधी और कांग्रेस यह बताने में जुट गए हैं कि वह भाजपा (BJP) के खिलाफ बोलते थे, इसलिए उन्हें दंडित - प्रताड़ित किया गया। कई विपक्षी दल भी यही प्रचार करने में लगे हुए हैं। वह राहुल से सहानुभूति जताने के साथ भाजपा को भी निशाने पर ले रहे हैं । कहना कठिन है कि राहुल की सदस्यता जाने से विपक्षी दल कांग्रेस के नेतृत्व में एकजुट हो पाएंगे या नहीं, लेकिन कांग्रेसी कार्यकर्ता आंदोलित हो सकते हैं और इसका पार्टी को लाभ मिल सकता है। आम जनता राहुल के पीछे एकजुट होगी या नहीं, यह समय बताएगा । यदि जनता उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखती है कि जो भाजपा को चुनौती दे सकता है तो कुछ विपक्षी दल भी उनके पीछे खड़े हो सकते हैं।
राहुल गांधी इस समय अपनी लोकसभा (Loksabha) सदस्यता जाने के कारण चर्चा के केंद्र (Center) में हैं। इसके पहले वह लंदन में दिए गए बयानों के कारण चर्चा में थे । उन्होंने लंदन (London) में कहा था कि भारत में लोकतंत्र (Democracy) खत्म हो गया है और फिर भी अमेरिका और यूरोप मौन हैं। भाजपा का कहना है कि उन्होंने भारत का अपमान किया है और इसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए। भाजपा ने इस मांग पर इतना जोर दिया कि संसद नहीं चलने दी। इस मांग के जवाब में विपक्ष अदाणी मामले की जांच जेपीसी यानी संयुक्त संसदीय समिति से कराने पर जोर देता रहा। पता नहीं अब संसद चल पाएगी या नहीं, लेकिन इतना तो है ही कि पक्ष-विपक्ष के बीच कटुता और बढ़ती दिख रही है । यह कटुता इसलिए और बढ़ने के आसार हैं, क्योंकि अगले वर्ष आम चुनाव हैं और इस वर्ष कई राज्यों के विधानसभा चुनाव होने हैं।
फिलहाल कांग्रेस यही मानकर चल रही है कि पहले राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा, फिर लंदन में दिए गए बयान के कारण भाजपा का उनकी माफी पर जोर देने और अब उनकी सदस्यता चल जाने से उन्हें राजनीतिक रूप से लाभ मिलेगा, लेकिन इसमें संदेह है कि सभी विपक्षी दल भी इसी नतीजे पर पहुंचेंगे। अभी कुछ ही दिनों पहले तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) की नेता ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने कहा था कि राहुल प्रधानमंत्री मोदी के लिए सबसे बड़ी टीआरपी हैं। उनका यह भी कहना था कि भाजपा अपने राजनीतिक फायदे के लिए राहुल को जरूरत से ज्यादा महत्व दे रही है। ममता बिना कांग्रेस को लिए तीसरा मोर्चा बनाने की भी पहल कर रही हैं। तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर भी ममता की तरह से कांग्रेस से दूरी बनाकर चल रहे हैं, लेकिन इसकी अनदेखी भी नहीं की जा सकती कि जो दल कुछ समय से कांग्रेस से दूरी बनाए थे, वे अब राहुल की सदस्यता जाने के बाद 'उनके पक्ष में बोल रहे हैं। इनमें तृणमूल कांग्रेस, भारत राष्ट्र समिति और आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) भी है। शायद भाजपा भी इसे समझ रही है और इसीलिए वह इस पर बल दे रही है कि राहुल की सदस्यता ओबीसी (OBC) समुदाय का अपमान करने के कारण गई है और उन्हें सजा उसने नहीं, अदालत ने दी है। कांग्रेस और भाजपा की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ जो माहौल बनाया जा रहा है, उससे जनता कितना प्रभावित होती है, इससे ही यह तय होगा कि आने वाले दिनों में राजनीति किस दिशा की ओर जाती है। जो भी हो, फिलहाल राहुल राजनीति के केंद्र में दिख रहे हैं।
Editorial

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