Sadar Bazar police station
जोधपुर : सोजती गेट चौकी में जिस स्वर्ण व्यवसायी से 3.5 लाख रुपए रिश्वत लेने के आरोप में सदर बाजार थानाधिकारी सुरेश पोटलिया व एएसआइ नंदकिशोर को भ्रष्टाचार (Corruption) निरोधक ब्यूरो ने गिरफ्तार किया है वह व्यवसायी क्रिकेट सट्टे में साठ लाख रुपए हार गया था और बकाया 19 लाख रुपए के लिए अपहरण (Kidnap) करने के बाद उसे जान से मारने को धमकाया गया था। पुलिस कमिश्नर (Police commissioner) के समक्ष पेश होकर उसने 13 मार्च को परिवाद सौंपा था। थाने पहुंचने पर एएसआइ (ASI) दिलीपसिंह को जांच सौंपी गई थी। 16 मार्च को व्यवसायी के बयान भी लिए गए थे। इसके बाद थानाधिकारी ने एएसआइ से परिवाद लेकर अपनी टेबल की दराज में रखकर लॉक कर दिया था और अपने करीबी एएसआइ
(ASI)
नंदकिशोर को परिवादी के पास भेजकर पांच लाख रुपए रिश्वत मांगी गई थी। ब्यूरो के एएसपी (ASP) दुर्गसिंह राजपुरोहित ने बताया कि एएसआइ नंदकिशोर ने परिवाद में कार्रवाई करने के बदले थानाधिकारी सुरेश पोटलिया के लिए घोड़ों का चौक निवासी स्वर्ण व्यवसायी से 5 लाख रुपए मांगे थे। मिन्नतें करने के बाद सहमति होने पर मंगलवार रात 10.30 बजे एएसआइ नंदकिशोर ने चौकी में स्वर्ण व्यवसायी से 3.50 लाख रुपए रिश्वत ली थी । एसीबी ने नागौर में गोवा गांव निवासी एएसआइ नंदकिशोर को रंगे हाथों गिरफ्तार (Arrested) किया। व्हॉट्सऐप पर नाधिकारी को कॉल कराने पर एएसआइ ने व्यवसायी से काम होने की जानकारी दी थी। जिस पर थानाधिकारी ने सहमति दी थी। घर से चौकी लाने के बाद देर रात सुरेश पोटलिया को भी गिरफ्तार किया गया। दोनों को बुधवार देर शाम मजिस्ट्रेट के समक्ष आवास पर पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश दिए गए। उधर, पुलिस कमिश्नर रविदत्त गौड़ ने थानाधिकारी व निरीक्षक सुरेश पोटलिया व एएसआइ नंदकिशोर को निलम्बित कर दिया। साथ ही विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
एएसआइ (ASI) के बयान लिए, दराज में मिला परिवाद
एसीबी ने परिवाद की जांच कर रहे एएसआइ दिलीपसिंह को बुलाया व बयान लिए। उसने बताया कि एसएचओ के मांगने पर उसने परिवाद सौंप दिया था। एएसआइ के रिश्वत लेते पकड़े जाने पर दराज लॉक थी। चाबी एसएचओ के पास थी। एसएचओ को थाने लाए जाने के बाद दराज खुलवाई गई तो परिवाद मिल गया।
आवास की तलाशी नहीं ले पाई एसीबी
नियम के तहत सरकारी कर्मचारी के रिश्वत लेने पर पकड़े जाते ही एसीबी को आवास व संबंधित जगहों की तलाशी लेनी होती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हो पाया। एएसआइ और फिर थानाधिकारी की गिरफ्तारी में समय लगने व सभी को पता लगने की वजह ये ब्यूरो ने इनके घर व ठिकानों की तलाशी नहीं ली।
Editorial

Editorial

Next Story