Lok Sabha elections
पिछले चुनाव में भाजपा (BJP) को मिली थी एक सीट
तेलंगाना के पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। भाजपा को 7.1 फीसदी वोट शेयर के साथ महज एक सीट से संतोष करना पड़ा था। 2019 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha elections) में भाजपा के प्रदर्शन में सुधार हुआ और पार्टी ने सूबे की कुल 17 में से 4 सीटों पर जीत दर्ज की। लोकसभा चुनाव में भाजपा को 23.53 फीसदी वोट मिले और वोट शेयर के लिहाज से कांग्रेस (Congress) को पीछे छोड़कर दूसरे पायदान पर पहुंच गई।
निकाय चुनाव में भाजपा को मिले थे 35 फीसदी से अधिक वोट
साल 2020 में ग्रेटर हैदराबाद (Hyderabad)
नगर निगम के चुनाव हुए। इस चुनाव में भाजपा 2019 का करिश्मा दोहराते हुए 35.56 प्रतिशत वोट प्राप्त करने में सफल रही। भाजपा को लगता है कि टीडीपी (TDP) के तेलंगाना में कम वोट भले ही हों लेकिन बीआरएस (BRS) से सीधी लड़ाई में उसे गठबंधन का फायदा मिल सकता है। भाजपा के रणनीतिकारों की नजर इसी आधार और संगठन का फायदा उठाने पर है।
साथ केवल एक सीट पर जीत मिली थी। सूत्रों की मानें तो आंध्र प्रदेश में भाजपा की सहयोगी जन सेना पार्टी टीडीपी के साथ गठबंधन की चर्चा से खुश नहीं है। दूसरी तरफ, भाजपा के रणनीतिकारों को लगता है कि टीडीपी से गठबंधन से तेलंगाना के चुनाव में पार्टी को फायदा मिल सकता है।
2018 में 2 सीटों पर सिमट गई थी टीडीपी
टीडीपी का अविभाजित आंध्र प्रदेश में टीडीपी का उन हिस्सों में भी अच्छा जनाधार था जो अब तेलंगाना में हैं। हालांकि, टीडीपी को 2018 के विधानसभा चुनाव (Assembly elections) में केवल 2 सीटों पर ही जीत मिल सकी थी। टीडीपी को तेलंगाना राज्य गठन का विरोध करना भारी पड़ गया था और पार्टी का वोट शेयर पांच फीसदी से भी नीचे, महज 3.5 फीसदी रहा था। भाजपा की नजर तेलंगाना (Telangana) में टीडीपी (TDP) के पुराने जनाधार पर है और पार्टी को लगता है कि विधानसभा चुनाव में बीआरएस को मात देकर सरकार बनानी है तो इसमें टीडीपी का संगठन और वोटर निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
आंध्र प्रदेश में टीडीपी को मिले थे करीब 40 फीसदी वोट
आंध्र प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव में टीडीपी को 23 सीटों पर जीत मिली थी। हालांकि, पार्टी का वोट शेयर 39.17 प्रतिशत रहा था । इसी तरह पिछले लोकसभा चुनाव में भी टीडीपी ने 39.59 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 3 सीटें जीती थीं। भाजपा (BJP) को एक प्रतिशत से भी कम वोट मिला था और जन सेना पार्टी को 6.30 प्रतिशत वोट मिले थे।
आंध्र प्रदेश में सत्ता विरोधी माहौल का फायदा
आंध्र प्रदेश की सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी (YSRCP) ने पिछले चार साल से केंद्र की मोदी सरकार के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखा है। कई विवादास्पद विधेयकों पर आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी केंद्र सरकार के साथ खड़ी नजर आई है। दिल्ली के शराब घोटाले में वाईएसआरसीपी के एक सांसद का नाम आने के बाद से मुख्यमंत्री जगन मोहन (CM YS Jagan Mohan Reddy) दबाव में नजर आ रहे हैं। इन सबके बीच बदले हालात में भाजपा राज्य में सत्ता विरोधी माहौल का फायदा उठाना चाहती है। और ऐसे में उसे लगता है कि टीडीपी से गठबंधन फायदे का सौदा साबित हो सकता है।
Editorial

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