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राजस्थान जीतेंगे हम, बीजेपी का कमल ही चेहरा
By EditorialPublished on
राजस्थान (Rajasthan) में विधानसभा चुनाव का मौसम आ रहा है, बीजेपी (BJP) अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) से सत्ता छीनने की तैयारी शुरू कर चुकी है। कार्यकर्ता सक्रिय हैं और नेता बिसात बिछा रहे हैं। ऐसे में मुलाकात अगर भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता ओम प्रकाश माथुर (Om Prakash Mathur) से हो, तो चूनाव और राजनीति पर बात न हो, यह कैसे संभव है। हालांकि माथुर आजकल छत्तीसगढ़ बीजेपी के प्रभारी है, लेकिन दिल की धड़कनों में तो राजस्थान ही धड़कता है। माथुर की गिनती भाजपा (BJP) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राजनाथ सिंह (Rajna

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मुंबई/हरिसिंह राजपुरोहित : राजस्थान (Rajasthan) में विधानसभा चुनाव का मौसम आ रहा है, बीजेपी (BJP) अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) से सत्ता छीनने की तैयारी शुरू कर चुकी है। कार्यकर्ता सक्रिय हैं और नेता बिसात बिछा रहे हैं। ऐसे में मुलाकात अगर भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता ओम प्रकाश माथुर (Om Prakash Mathur) से हो, तो चूनाव और राजनीति पर बात न हो, यह कैसे संभव है। हालांकि माथुर आजकल छत्तीसगढ़ बीजेपी के प्रभारी है, लेकिन दिल की धड़कनों में तो राजस्थान ही धड़कता है। माथुर की गिनती भाजपा (BJP) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) की टीम के प्रमुख सदस्य के रूप में की जाती है। कई राज्यों में पार्टी प्रभारी रहे माथुर नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के गुजरात में तीन बार प्रभारी रहे और उनके सारथी के रूप में अहम भूमिका निभाई। महाराष्ट्र (Maharashtra) में बीजेपी की पहली सरकार और यूपी में अब तक की सबसे बड़ी ऐतिहासिक जीत भी प्रभारी माथुर की अगुवाई में ही हुई। अपनी हर कोशिश व सफलता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सर्वोपरि मानने वाले माथुर से पेश है एक लंबी मुलाकात के कुछ खास अंश।
- राजस्थान में अगला विधानसभा चुनाव वसुंधरा के नेतृत्व में होगा, या उनके बिना
जनता तो केवल यही सोच रही है कि कमल का फूल सरकार बनाने जा रहा है। बीजेपी का कार्यकर्ता कमल के फूल को चेहरा मानकर नरेंद्र मोदीजी की योजनाओं को लेकर चुनाव लड़ता है। बीजेपी में कभी चेहरे के आधार पर चुनाव नहीं लड़ा जाता। बीजेपी एक सिस्टम वाली पार्टी है, ये किसी पार्टी किसी परिवार ,जाति या क्षेत्र विशेष की नहीं। पार्टी का एक सिस्टम है, उसी सिस्टम के नाते हमारा पार्लियामेंट्री बोर्ड तय करता है। मैं 8-9 प्रदेशों का प्रभारी रहा हूं, यूपी (UP) में प्रभारी रहा, इतना बड़ा प्रदेश है, फिर भी मुख्यमंत्री पद के लिए कोई घोषित चेहरा नहीं था, पर हम इतिहास के सबसे बड़े बहुमत से जीते। लेकिन पहले जब मैं मध्य प्रदेश का प्रभारी था, तो वहां उस जमाने में उमा भारती के चेहरे पर चुनाव लड़ा था।
- बीजेपी राजस्थान में सारे उपचुनाव हारी है
उपचुनावों का ट्रेंड रहा है कि लोग लगभग रूलिंग पार्टी के साथ जाते हैं, ओर जो चुनाव क्षेत्र थे, वे कोई हमारे चुनाव क्षेत्र नहीं गिने जाते हैं। बीजेपी आज भी राजस्थान में कोई 200 सीटों पर नहीं है। बीजेपी 1990 तक तो केवल 70 – 75 सीटों पर ही जीती। 1990 में मैं जब राजस्थान में था, तो पहली बार हमारी सरकार जनता दल के साथ बनाई, जनता दल ने पार्टी तोड़कर विधायकों को लाया था, जनता दल डी बनाया था। उसके बाजद हम रेगुलर सरकारें बनाने लगे हैं। इसलिए यह कह देना कि हम उपचुनाव हार गए, यह उचित नहीं है। राजस्थान बीजेपी ने निश्चित रूप से उपचुनावों में हारने के कारणों का विश्लेषण किया होगा, और वहां कैसे जीता जाए, इसकी व्यवस्था में लगे हुए हैं।
- क्या इसबार भी राजस्थान में बीजेपी लोकसभा की सभी सीटें जीतेगी
राजस्थान में इस बार भी हम सारी सीटें जीतेंगे, सभी 25 पर बीजेपी की जीत होगी। एक यह भी भ्रम चल रहा है कि लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) में मोदी लहर में जीते दो तीन टर्म के कई सांसदों के टिकट कटेंगे ? यह तो पार्टी का सामान्य तरीका है, पार्टी में नए लोग ऐसे ही आते हैं, पुराने अपने अनुभवों के आधार पर कहीं और काम करने जाते हैं। आखिर नए लोग इसी तरह तो पार्टी में आते हैं। बीजेपी का पिछले कई सालों को इतिहास देखों, तो हर चुनाव में 30 से 40 प्रतिशत उम्मीदवार हर बार बदलते हैं। अब वो गुजरात में सबको बदलने का प्रयोग हुआ, तो कोई जरूरी नहीं कि हर प्रदेश में भी वैसा ही होगा। किसी भी प्रदेश में राजनीतिक, सामाजिक व भौगोलिक स्थितियां, तीनों अलग अलग होती हैं, इन्हीं के आधार पर उम्मीदवारी तय होती है। मुख्य रूप से जिताऊ उम्मीदवार जरूरी होता है, तो फिर बदलना या न बदलना पार्टी का फैसला होता है।
- क्या राजस्थान में जातियों की राजनीति विकसित हो रही है
वर्तमान समय में चुनाव जीतने के लिए 40 साल पहले जैसा नहीं है कि व्यक्ति जीत जाता था। कोई भी चुनाव जीतने में अब पार्टी का बड़ा रोल है। राजनीति में चुनाव जीतने के लिए सामाजिक व भौगोलिक दोनो स्थितियों का खयाल रखना होता है, इन हालातों में जो कुछ चल रहा होता है, उसे ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ना होता है। ऐसा नहीं होता कि कोई व्यक्ति बड़ा बन गया, इसलिए यह मानकर चले कि वो ही चुनाव जीत सकता है। अब आपको पूरा समीकरण देखना पड़ता है, तब जाकर चुनाव जीत सकते हैं। उसके लिए हर स्तर पर यह जानने की कोशिश होती है कि पार्टी का वर्चस्व कैसा है। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के हमारे अध्यक्ष बूथ अध्यक्षों से बात करे, प्रधानमंत्री बूथ अध्यक्षों से चर्चा करे। कुल मिलाकर कांग्रेस ने अब तक 65 साल तक झूठ बोलकर, झूठे वादे करके, झूठे आश्वासन देकर, चुनाव जीते हैं, वो अब नहीं हो सकता, एक परिवार का राज नहीं चल सकता। इसीलिए हमारी पार्टी ने तो सबसे पहले ही कहा कि सबका साथ, सबका विश्वास व सबका सहयोग।
- गहलोत के विकास के आगे बीजेपी कैसे जीतेगी
ये निर्णय तो जनता करेगी कि अशोक गहलोत विकास कर रहे है या नहीं कर रहे। बोलना अलग होता है और वास्तव में करना अलग होता है। ग्राउंड रियलिटी क्या है, यह तो जनता ही तय़ करेगी। आज पूरे देश में मोदीजी की उपस्थिति हर घर में है। लोगों से उनका सीधा जुड़ाव हो गया है, इस सच्चाई को तो कोई नकार नहीं सकता। लेकिन अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) काम कर रहे हैं कि नहीं कर रहे, यह तो मतदाता चुनाव में बताएगा। यह निर्णय करनेवाले आप और हम कौन होते हैं।
- संसद नहीं चल रही है राहुल गांधी के कारण, क्या बिना माफी के रास्ता निकलेगा
मेरा यह कहना है कि राहुल गांधी (Rahul Gandhi) माफी क्यों नहीं मांगते, देश की सबसे पुरानी पार्टी का नेता देश के बाहर जाकर क्या बोलता है, हम कह रहे हैं कि डिबेट कीजिए हाउस में, किसने मना किया है। किसी भी विषय में डिबेट करो, और दोनों सदनों की एडवाइजरी कमेटी संसद के सत्र से पहले भी उसकी मीटिंग होती है और रोज मीटिंग होती है, जिसमें सारी पार्टियों के लीडर होते हैं। उसमें हमारा कार्यक्रम तय होता है उसी के मुताबिक डिबेट होती है। फिर विषय उठाने के लिए भी संसद के कानून बने हुए हैं, धाराएं हैं, उनके तहत तो वे बात नहीं कर हैं। क्यूंकि विषय उनको कुछ भी मिल नहीं रहा है। वो जो भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) उन्होंने तीन चार महीने तक की, फिर हाथ से हाथ जोड़ो यात्रा कर रहे हैं, उसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है, तो देश के बाहर जा कर देश की बदनामी कर रहे हैं। सबसे पुरानी पार्टी की लीडर बाहर जाकर के यह बोले कि देश में हमें खतरा है, तो यह यहां क्यों नहीं बोलते वो।
- आप महाराष्ट्र के प्रभारी रहे हैं, क्या यही गठबंधन अगले विधानसभा चुनाव में भी जाएगा
ये गठबंधन बहुत सोच समझ के हुआ है। ये सरकार अच्छी चल रही है, मैं दो दिन ये यहां हूं, लोग आ रहे हैं, मिल रहे हैं, सरकार की तारीफ कर रहे हैं। काम की गति देख रहा हूं, विकास के काम हो रहे हैं। मैट्रो के औवर ब्रिज के काम चल रहे हैं। देखिये, जनता विकास चाहती है। सन 2014 के बाद नरेंद्र मोदीजी (Narendra Modi) ने संपूर्ण देश की राजनीति को टेबल टर्न कर दिया है, केवल विकास की तरफ। जो राजनीति पहले जातिवाद क्षेत्रवाद, परिवारवाद के आधार पर या व्यक्ति केंद्रित चलती थी, उस राजनीति को मोदीजी ने विकास के आधार पर चलाया है। अब वोग विकास चाहते हैं और लोगों को महसूस हो रहा है कि य़ह एक ऐसी सरकार आई है, जो हमारा विकास कर रही हो, सीधे हमारे गांव का विकास हो रहा है।
- उद्धव ठाकरे के साथ क्या वादा हुआ था, या वादा खिलाफी हुई थी
मैं इस चुनाव में यहां नहीं था, मैं तो इससे भी पिछले 2015 के चुनाव में यहां का प्रभारी था, और तब की बात बताता हूं कि हमने उनको खूब समझाने की कोशिश की, तो हमने सरकार बनाई। उद्धवजी तो शपथ में भी मेरे पास बैठे थे।
- छत्तीसगढ़ में क्या वातावरण है
छत्तीसगढ़ में हम सरकार बनाएंगे, पूर्ण बहुमत से बनाएंगे। हमारे साथ कौन कहां से आ रहा है, ये भविष्यवाणियां आप लोग करते रहो, लेकिन इतना तय है कि वहां हम सरकार बनाने जा रहे हैं। वहां लोगों में जबरदस्त उत्साह है, एक लाख लोगों का हाल भी में कार्यक्रम हुआ।
- तो सिर्फ हिमाचल में कांग्रेस की सरकार बचेगी
हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस की सरकार कौन जाने बचेगी या नहीं बचेगी, ये तो आप लोग भविष्यवाणी कर रहे हैं। 2024 के बाद तो बहुत देर है अभी।
- आप फडणवीस से मिले हैं, कोई खास बात
वे हमारे मित्र हैं, मैं यहां आया, तो वे भी मिले, उन्होंने बुलाया तो उनके निवास पर भी गया।
- अगला सीएम महाराष्ट्र में बीजेपी का होगा, या...
इंतजार कीजिए... जब तक आप भविष्यवाणी करेंगे, तब तक हो जाएगा।

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