New Year
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवसंवत्सर (New Year) का आरंभ होता है, यह अत्यंत पवित्र तिथि है। इसी तिथि से पितामह ब्रह्मा ने सृष्टि निर्माण प्रारंभ किया था । वस्तुतः नवसंवत्सर भारतीय काल गणना (Indian time calculation) का आधार पर्व है जिससे पता चलता है कि भारत का गणित एवं नक्षत्र विज्ञान कितना समृद्ध है।
चैत्रे मासि जगद् ब्रह्मा ससर्ज प्रथमेऽहनि ।
शुक्ल पक्षे समग्रे तु तदा सूर्योदये सति ।
इस तिथि को रेवती नक्षत्र में, विष्कुंभ योग में दिन के समय भगवान के आदि अवतार मत्स्यरूप का प्रादुर्भाव भी माना जाता है-
कृते च प्रभवे चैत्रे प्रतिपच्छुक्लपक्षगा,
रेवत्यां योगविष्कुम्भे दिवा द्वादशनाडिकाः ।
मत्स्यरूपकुमार्या च अवतीर्णो हरिः स्वयम ? |
युगों में प्रथम सत् युग का प्रारंभ भी इस तिथि को हुआ था । यह तिथि ऐतिहासिक महत्व (Historical significance) की भी है, इसी दिन सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य (Emperor Chandragupta Vikramaditya) ने शकां पर विजय प्राप्त की थी और उसे चिरस्थायी बनाने के लिए विक्रम संवत का प्रारंभ किया था। जो देवी संसार के समस्त प्राणियों में शक्ति के रूप में स्थित हैं, उस शक्ति स्वरूपा पराम्बा माता दुर्गा को बारम्बार नमस्कार है। इसी दिन से नव संवत्सर भी आरंभ हो रहा है। नवरात्र (Navratri) में हम शक्ति की देवी दुर्गा की उपासना करते हैं। इस दौरान कुछ भक्तगण नौ दिनों का उपवास रखते हैं, तो कुछ सिर्फ पहले और अंतिम दिन उपवास रखते हैं। दरअसल, त्यौहारों खासकर नवरात्र में उपवास का विशेष महत्व है। उपवास में उप का अर्थ है निकट और वास का मतलब निवास करना । कुल मिलाकर यह माना जाता है कि उपवास के माध्यम से ईश्वर से निकटता और बढ़ जाती है। क्या कहते हैं लोग हालांकि आज की बदलती जीवनशैली में अधिकांश लोगों का यह भी मानना है कि उपवास के बहाने वे खुद को आत्मिक रूप से शुद्ध करने का प्रयास भी करते हैं-
सृष्टि मानती हैं कि उपवास रखने से उन्हें पवित्रता का अहसास होता है और वे स्वयं को परमात्मा के अधिक निकट पाती हैं।
कामना कहती हैं कि भूखे रहकर ही दूसरों की भूख को समझा जा सकता है।
दिनेश के अनुसार, शरीर और आत्मा को एकाकार करने का माध्यम है उपवास ।
मन पर नियंत्रण
आज का जीवन इतना जटिल हो गया है कि मनुष्य जीवन की आपाधापी से आध्यात्मिक कार्यों (Spiritual practices) के लिए समय नहीं निकाल पाता। वह ऑफिस और घर की जिम्मेदारियों को निभाने के फेर में एकाग्रचित्त नहीं हो पाता । उपवास का प्रयोजन इसीलिए किया गया है, ताकि जीभ और मन पर नियंत्रण कर अपने मन-मस्तिष्क को केंद्रित किया जा सके। आध्यात्मिक और व्यावहारिक
(Spiritual and practical)
अर्थ : हिंदू धर्म में उपवास का सीधा अर्थ है, आध्यात्मिक आनंद की अपनी भौतिक आवश्यकताओं का परित्याग करना। इस और आत्मा के बीच एक रागात्मक संबंध स्थापित हो शब्दों में कहें, तो उपवास केवल ईश्वर के प्रति स बल्कि स्वयं को अनुशासित करने का उपकरण भी भोजन लेने से हमारी इंद्रियां तृप्त होती हैं। कम मात्र फलाहार लेकर हम इंद्रियों पर नियंत्रण करना सीर लुकमान का कथन है, जब आपका पेट भरा होता है, त सोने लगती है। पेट भरा होने पर विवेक मौन हो जा उपवास बहुत जरूरी है। आर्ट ऑफ लिविंग के अनुसार से हमारे तन-मन दोनों का शुद्धीकरण होता है। हमारा अग्नि की तरफ नहीं जा पाता है। ऊर्जा संग्रहण से ह बढ़ती है और हम ध्यान केंद्रित कर पाते हैं।
मन पर प्रभाव
शरीर में 80 प्रतिशत जल और 20 प्रतिशत ठोस त के अनुसार, पृथ्वी के समान ही चंद्रमा का गुरूत्वा अंदर मौजूद द्रव्य को प्रभावित करता है, जिससे हम भ पर अस्थिर हो जाते हैं। ऐसे में उपवास विषनाशक औ काम करता है। यह शरीर में मौजूद अम्ल को कम क व्यक्ति स्वस्थचित्त अनुभव करता है। मनोवैज्ञानिक मानती हैं कि हम उपवास अच्छी भावना के साथ रख और दूसरों के बारे में सकारात्मक सोचते हैं। प्रेरणा थकान नहीं, शांति महसूस करते हैं और नींद भी अच्छ
Editorial

Editorial

Next Story