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पंजाब में मंडराता आतंक का साया
By EditorialPublished on
आतंकवाद (Terrorism) के एक भयानक दौर से गुजर चुका है। कुछ दशक पहले पाकिस्तान (Pakistan) ने खालिस्तान (Khalistan) समर्थकों के पक्ष में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। आतंकवादियों को आधुनिकतम हथियार उपलब्ध कराए और प्रशिक्षण दिया गया ताकि वे भारत की पश्चिमी सीमा को खंडित कर सकें । करीब 10 वर्षों तक पंजाब (Punjab) में मौत का नंगा नाच होता रहा।

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प्रकाश सिंह :
आतंकवाद (Terrorism) के एक भयानक दौर से गुजर चुका है। कुछ दशक पहले पाकिस्तान (Pakistan) ने खालिस्तान (Khalistan) समर्थकों के पक्ष में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। आतंकवादियों को आधुनिकतम हथियार उपलब्ध कराए और प्रशिक्षण दिया गया ताकि वे भारत की पश्चिमी सीमा को खंडित कर सकें । करीब 10 वर्षों तक पंजाब (Punjab) में मौत का नंगा नाच होता रहा। अंततोगत्वा आतंकवादियों और पाकिस्तान की हार हुई, परंतु देश को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। इस दौरान 19762 लोग मारे गए तो 1719 सुरक्षाकर्मी बलिदान हुए । तब आतंकवाद की पराजय तो हुई, परंतु उसकी कुछ चिंगारी बची रह गई थी पिछले करीब 30 वर्षों से पाकिस्तान इस चिंगारी को रह- रहकर हवा दे रहा है । प्रतीत होता है कि उसके प्रयासों को कुछ सफलता भी मिल रही है। 23 फरवरी को 'वारिस पंजाब दे' के प्रमुख अमृतपाल सिंह के समर्थकों ने अजनाला थाने पर हमला बोल दिया। उसकी मांग थी कि लवप्रीत उर्फ तूफान सिंह को रिहा किया जाए। लवप्रीत को अपहरण के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था अमृतपाल के समर्थक लाठी-डंडे, तलवार और राइफलों से लैस थे। वे बैरिकेड तोड़कर पुलिस कर्मियों पर आक्रमण करते हुए थाने में घुस गए। इसमें पुलिस अधीक्षक जुगराज सिंह सहित अन्य पुलिस कर्मी घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर इतना दबाव बनाया कि पुलिस को लवप्रीत को छोड़ने का आश्वासन देना पड़ा और अगले दिन वह रिहा भी हो गया।
पंजाब सरकार (Government of Punjab) का कहना है कि खालिस्तान समर्थक श्री गुरू ग्रंथ साहिब को ढाल बनाकर थाने तक ले गए थे, ऐसी परिस्थिति में पुलिस ने बल प्रयोग करना उचित नहीं समझा। इस घटना की गंभीरता को अनदेखा करना बहुत बड़ी गलती होगी । आतंकवाद के दौर में भी पुलिस (Police) कर्मियों, केंद्रीय सशस्त्र बलों और यहां तक की फौज के जवानों पर भी आतंकवादी आक्रमण करते थे । अजनाला की घटना का वीडियो फुटेज जिसने भी देखा, उसे ऐसा लगा कि जैसे पंजाब पुलिस ने उपद्रवियों के सामने घुटने टेक दिए । सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को थाने तक पहुंचने क्यों दिया गया ? अपराधियों की बात मानकर एक अपराधी को छोड़ना भी विचित्र था । थाने पर पुलिस कर्मियों के साथ हिंसा को लेकर अभी तक कोई एआईआर भी नहीं दर्ज की गई है।
बीते कुछ अर्से से पंजाब के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि खालिस्तान समर्थक पंजाब में फिर से आग लगाना चाहते हैं। खुफिया विभाग के अनुसार बब्बर खालसा इंटरनेशनल, इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन, खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स और खालिस्तान कमांडो फोर्स के बचे-खुचे तत्व आज भी पाकिस्तान में अपना आधार बनाकर पंजाब में कुछ न
कुछ गड़बड़ी के प्रयास करते रहते हैं। विदेश में, विशेषकर अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा और आस्ट्रेलिया (Australia) में 'वर्ल्ड सिख आर्गेनाइजेशन' और 'सख्स फार जस्टिस' भारत (India) के विरूद्ध माहौल खराब करने में लगे हैं। समय समय पर कुछ अशुभ संकेत भी दिखते रहे हैं। 2014 में दमदमी टकसाल ने स्वर्ण मंदिर परिसर में जरनैल सिंह भिंडरांवाला और अन्य आतंकी नेताओं की स्मृति में एक स्मारक बना लिया था शुरू में तो इसका कुछ विरोध हुआ, परंतु धीरे- धीरे आवाज दब गई और इस स्मारक को एक तरह से मान्यता दे दी गई । 2016 - 17 में अलगाववादी तत्वों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के कई कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया और उनकी हत्या कर दी। 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से आग्रह किया था कि प्रदेश में आतंकवाद पनपने न पाए, इसके लिए एक योजना बनाई जाए। आपरेशन ब्लू स्टार की बरसी पर पंजाब और चंडीगढ़ में खुलेआम 'खालिस्तान जिंदाबाद' के नारे लगाए जाते हैं। राज्य सरकारें उसे अनदेखा करती आई हैं कि मुट्ठी भर लोगों के प्रदर्शन से कोई फर्क नहीं पड़ता । जबकि तथ्य यही है कि एक छोटी सी चिंगारी भी पूरे जंगल में आग लगा देती है । राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में हमें छोटी घटनाओं का भी संज्ञान लेना चाहिए और आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो रहा है। कई और पहलुओं से भी पंजाब भीतर से खोखला होता जा रहा है। प्रदेश में मादक पदार्थों की समस्या बहुत गंभीर हो गई है। एक आकलन के अनुसार पंजाब में करीब 70 गिरोह सक्रिय हैं और इनमें कुल 500 सदस्य हैं। ये ठेके पर विरोधियों की हत्या कर देते हैं। खालिस्तान समर्थकों और इनके बीच भी साठगांठ हो गई है। प्रदेश में ड्रोन द्वारा हथियार और नशीले पदार्थों के गिराए जाने के भी मामले सामने आ रहे हैं। सीमा सुरक्षा बल के अनुसार पाकिस्तान ड्रोन द्वारा पंजाब पर एक तरह की बमबारी कर रहा है।
करीब छह माह पहले मैं चंडीगढ़ गया था। वहां एक सिख अधिकारी ने मुझसे कहा, सर, हमें योगी आदित्यनाथ जैसा मुख्यमंत्री (Chief Minister) चाहिए या केपीएस गिल जैसा डीजीपी (DGP) । दरअसल, आमजन राज्य में कमजोर नेतृत्व से परेशान हैं। सितंबर 2021 के बाद से अब तक पंजाब में चार पुलिस महानिदेशक बदले जा चुके हैं। स्पष्ट है कि सरकार शीर्ष पुलिस पद के साथ सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन कर खिलवाड़ करने में लगी है। ऐसी दशा में पुलिस का कमजोर होना स्वाभाविक है। पंजाब पुलिस बिगड़ते हालात को सुधारने में पूरी तरह सक्षम है। इसी पुलिस ने 30 साल पहले आतंकवादियों की कमर तोड़ दी थी। बस आवश्यकता है तो स्पष्ट राजनीतिक निर्देशों की ।
राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) की दृष्टि से पंजाब की तुलना अन्य प्रदेशों से नहीं की जा सकती है। पंजाब का एक विशेष स्थान है। हम देख चुके हैं कि पंजाब में अस्थिरता का पाकिस्तान ने कितना लाभ उठाया और उसकी देश को कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ी थी। हमें सुनिश्चित करना होगा कि पंजाब में आतंकवाद फिर से न पनपने पाए और विदेश में भी खालिस्तान समर्थकों पर अंकुश लगाया जाए। यदि पंजाब सरकार आतंकवाद से निपटने में ढुलमुल नीति अपनाती है तो केंद्र को पूरा अधिकार होगा कि वहां राज्य सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए। हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है। (सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक रहे लेखक 1987 से 1991 तक पंजाब में कार्यरत रहे )

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