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आईटी विभाग ने ई-सत्यापन के लिये 68 हजार मामलों की शिनाख्त की
By EditorialPublished on
IT department has identified 68 thousand cases for e-verification

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मुंबई। इनकम टैक्स (IT) विभाग ने ऐसे करीब 68 हजार मामलों को ई-सत्यापन (e-Verification) के लिये चुना है जिनमें टैक्सपेयर्स ने या तो अपनी कमाई सही ढंग से नहीं दर्शाई है या फिर अपने सालाना रिटर्न्स (Returns) में कमाई कम करके दर्शाई है। इस ई-सत्यापन का मकसद हालांकि टैक्सपेयर्स को उनके निर्धारित तीन वर्षों की विंडो अवधि के भीतर उनके सालाना फाइलिंग्स को संशोधित करने का मौका देना है।
सीबीडीटी (CBDT) के चेयरमैन नितीन गुप्ता के मुताबिक, इस पूरी कवायद का अहम मकसद टैक्सपेयर्स (Taxpayer) को उनके रिटर्न्स अपडेट करने में मदद करना है ताकि उनको मुकदमेबाजी में न उलझना पड़े। ई-सत्यापन के बाद रिटर्न्स अपडेट होने की स्थिति में ऐसे टैक्सपेयर के मामले में जांच या पुनर्मूल्यांकन की संभावना नहीं के बराबर होगी। अब तक करीब 15 लाख अपेडेटे रिटर्न्स फाइल किये गये हैं और करीब 1250 करोड़ रुपये बतौर टैक्स कलेक्ट किया गया है।
मामलों के ई-सत्यापन के तहत टैक्सपेयर्स द्वारा फाइल किये गये रिटर्न्स और उनके लेनदेन के सालाना विवरण (एआईएस) में डाटा का मिलान किया जाता है। ई-सत्यापन के जरिये अब तक करीब 56 फीसदी यानि 35 हजार मामलों का संतोषजनक समाधान किया गया है। सितंबर से ही प्रायोगिक आधार पर इसे संचालित किया जा रहा है। इसके लिये कुछ बुनियादी मापदंड तय किये गये हैं। ई-सत्यापन के तहत केवल उच्च मूल्य के मामले ही शामिल किये जा रहे हैं।
हालांकि इसके क्रियान्वयन में कुछ दिक्कतें आ रही है। जैसे कि टैक्सपेयर्स विभाग द्वारा इस संबंध में किये गये कम्युनिकेशन पर प्रतिसाद देने में सुस्ती दिखा रहे हैं। विभाग की सूचना का दस दिनों के भीतर जवाब या प्रतिसाद देना जरूरी है लेकिन टैक्सपेयर्स की ओर से इस बारे में उदासीनता देखने को मिल रही है। सीबीडीटी ने ई-सत्यापन के तहत किसी भी मामले को निपटाने के लिये 90 दिनों की समय-सीमा तय की है, लेकिन जटिल मामलों में ज्यादा वक्त लगने की भी संभावना बरकरार है। अभी वर्ष 2019-20 के वित्तीय वर्ष हेतु कमाई के लिये अपडेटेड रिटर्न्स फाइल करने के लिये 31 मार्च 2023 तक का समय है।

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