कांग्रेस की दिशा
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress) के 85 वें महाधिवेशन में देश की सबसे पुरानी पार्टी ने जो संदेश दिया है, वह उसकी राजनीतिक प्रतिबद्धता की दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है, पर कई जरूरी मुद्दों पर उसकी दुविधा भी सामने आई है। यह महाधिवेशन दो कारणों से महत्वपूर्ण था। एक तो इसमें यह देखना था कि अपनी सांगठनिक जड़ता दूर करने के लिए वह कदम उठाती भी है या नहीं। संगठन में सुधार और चुनाव की मुखर आवाजों ने न सिर्फ जी-23 जैसा गुट बनाया, बल्कि कुछ अनुभवी नेता पार्टी छोड़ गए। महाधिवेशन के पहले दिन संचालन समिति की बैठक में सोनिया (Sonia) और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने शामिल न होकर बेशक यह संदेश देने की कोशिश की कि अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पूरा अधिकार दिया गया है, पर पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारक समिति यानी कार्यसमिति के सदस्यों का चुनाव न कराने का फैसला पार्टी नेतृत्व के पुराने रूख का ही परिचायक है। इससे यह प्रश्न उठेगा ही कि पार्टी को नया अध्यक्ष मिलने के बावजूद नेतृत्व के पुराने तौर-तरीके ही तो जारी नहीं रहेंगे। पार्टी संविधान में संशोधन कर अनुसूचित जातियों, जनजातियों, ओबीसी, महिलाओं, युवाओं, अल्पसंख्यकों के लिए 50 फीसदी पद आरक्षित करने का प्रावधान महत्वपूर्ण है। पर 'एक व्यक्ति एक पद'
('One person one post')
और 'एक परिवार एक टिकट' पर चर्चा नहीं हुई, जबकि इन सुधारों की बात राहुल गांधी ने की थी। अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव और इस साल कई महत्वपूर्ण राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के कारण भी इस महाधिवेशन पर नजर थी। अध्यक्ष खरगे से लेकर सोनिया और राहुल गांधी ने अपने भाषणों में नफरत के माहौल, महंगाई, बेरोजगारी और राष्ट्रीय सुरक्षा को फोकस किया। सत्ता में आने पर थोक में दलबदल की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए संविधान संशोधन और हेट क्राइम रोकने के लिए कानून बनाने जैसी कांग्रेस की घोषणा भी महत्वपूर्ण है। पर चुनाव में भाजपा के खिलाफ समान दलों के साथ गठबंधन बनाने के मुद्दे पर अस्पष्टता अब भी बनी है। कांग्रेस ने यह तो कहा कि अगर तीसरा मोर्चा बना, तो उससे एनडीए को लाभ होगा, पर कई विपक्षी दल उसके साथ गठबंधन बनाने से जिस तरह परहेज कर रहे हैं, उससे निपटने के लिए कांग्रेस के पास कोई कार्ययोजना है। या नहीं, इस पर धुंध साफ नहीं हुई। इस मुद्दे पर देरी या निष्क्रियता जाहिर है, कांग्रेस और विपक्ष को ही नुकसान पहुंचाएगी।
Editorial

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