✕
सबको कुछ न कुछ देता जिम्मेदार बजट
By EditorialPublished on
केंद्र सरकार (Central government) अभी सिर्फ 6.5 प्रतिशत की विकास दर लेकर चल रही है। सरकार 6.8 या 7 प्रतिशत का लक्ष्य लेकर भी चल सकती थी। इससे जीडीपी (GDP) व टैक्स (TAX) भी बढ़ता, राजकोषीय घाटे को कम करने में सहूलियत होती, पर सरकार ने ऐसा नहीं किया।

x

एन के सिंह : वित्त मंत्री निर्मला सीतारम (Finance Minister Nirmala Sitharam ने आम चुनावों से पहले का केंद्र सरकार का अंतिम पूर्ण बजट (Budget) संसद में पेश कर दिया और उस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) भी टिप्पणी की है। इस बजट के छह-सात विशेष पहलू हैं और दो शब्दों में कहें, तो यह रिस्पॉन्सिव (तत्पर) और रिस्पॉन्सिबल (जिम्मेदार) बजट है। रिस्पॉन्सिव या तत्पर इसलिए कि मुझे ऐसे किसी बजट की याद नहीं, जिसने समाज के सभी वर्गों को कुछ न कुछ लाभ दिया हो । अनुमान नहीं था कि बजट 2023-24 ऐसे व्यापक रूप से सभी पक्षों के लिए इतना सकारात्मक होगा। उदाहरण के लिए, कृषि क्षेत्र, जिस पर बल दिया गया है कि कृषि विकास में तकनीक का कैसे प्रयोग बढ़ाया जाए, कृषि उत्पादन में कैसे वृद्धि लाई जाए। महिला, युवा, ग्रामीण शिल्पकार, लघु-मध्यम उद्योग, मध्यम वर्ग इत्यादि पहलुओं पर गौर किया गया है, तभी इसे रिस्पॉन्सिव बजट कह रहा हूं।
आज विकास की इच्छा एक वास्तविकता है। केंद्र सरकार (Central government) अभी सिर्फ 6.5 प्रतिशत की विकास दर लेकर चल रही है। सरकार 6.8 या 7 प्रतिशत का लक्ष्य लेकर भी चल सकती थी। इससे जीडीपी (GDP) व टैक्स (TAX) भी बढ़ता, राजकोषीय घाटे को कम करने में सहूलियत होती, पर सरकार ने ऐसा नहीं किया। जितने भी गैर-बजटीय उधार हैं, सबको पारदर्शिता से पेश किया। सरकार टैक्स अनुमान भी बढ़ा सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया, ताकि लोगों को ऐसा न लगे कि सरकार अवास्तविक लक्ष्य रखकर चल रही है।
सरकार ने दूरगामी आर्थिक स्थिरता को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए हैं। विकास और महंगाई (Growth and Inflation), दोनों के प्रति उसने उत्तरदायी होने का परिचय दिया है। युवा और रोजगार वृद्धि इत्यादि पर ध्यान दिया गया है। सरकार का जोर स्वयं सहायता समूहों पर भी है। इससे आने वाले दिनों में विशेष रूप से महिला रोजगार में ज्यादा वृद्धि होगी। ग्रामीण शिल्पकार एक उपेक्षित वर्ग रहा है, जिसे विश्वकर्मा कहा गया है। पर्यटन की दिशा में भी नई पहल हुई है। मैं वर्षों से कहता रहा हूं कि भारत में पर्यटन में जो असीम क्षमता है, उसके एक प्रतिशत का भी हमने अभी तक उपयोग नहीं किया है। कई ऐसे छोटे देश हैं, जिनकी पूरी अर्थव्यवस्था ही पर्यटन पर चलती है। सरकार ने पचास पर्यटन केंद्र विकसित करने की घोषणा की है। हरित विकास या हरित हाइड्रोजन, हरित ऊर्जा प्रसारण, ऊर्जा भंडारण, कृषि में हरित व्यवहार, हरित ऋण पर जो व्यय की घोषणा हुई है, उससे भारत के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा ।
स्वास्थ्य क्षेत्र की बात करें, तो मानव संसाधन का अभाव रहा है। वित्त मंत्री ने 157 नर्सिंग कॉलेज खोलने की घोषणा की है, ये सभी कॉलेज अस्पतालों से जुड़े रहेंगे। एलायड सर्विसेज का जो कानून सरकार ने पारित किया है, उसका लाभ स्वास्थ्य क्षेत्र, उसमें भी जो ग्रामीण स्वास्थ्य क्षेत्र, प्राथमिक स्वास्थ्य क्षेत्र, पालिका स्वास्थ्य क्षेत्र को मिलेगा। यह बहुत जरूरी है। महामारी अपनी जगह है, पर इन स्वास्थ्य केंद्रों को युद्ध स्तर पर सुधारने की जरूरत है, मैंने भी पंद्रहवें वित्त आयोग के अध्यक्ष के नाते ऐसे प्रस्ताव दिए थे। एलायड सर्विसेज या नर्सों की जो प्रतिभा- क्षमता हमारे पास होगी, उसका उपयोग स्वास्थ्य तंत्र को सुधारने पर किया जाएगा। सरकार ने इस ओर कदम बढ़ा दिए हैं। आईसीएमआर लैब और फार्मा ट्रांजिशन भी इस बजट के दो महत्वपूर्ण पक्ष हैं। शिक्षक प्रशिक्षण सुधारने के लिए भी बजट में और बल दिया गया है।
एक और खास पहलू है पूंजीगत व्यय, इससे विकास को चार गुना मदद मिलती है। इसके लिए सकल घरेलू उत्पाद का 3.3 प्रतिशत खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका सीधा लाभ मूलभूत ढांचे की गुणवत्ता पर होगा और कार्य क्षमता, निर्यात व रोजगार में वृद्धि होगी ।
ईज ऑफ डुइंग बिजनेस अर्थात व्यवसाय में सुविधा पर भी ध्यान दिया गया है। कहा जाता है, भारत में मुक्त अर्थव्यवस्था (economy) तो है, लेकिन व्यवसाय करना आसान नहीं है। जो दस्तावेजी औपचारिकताएं हैं, उनको कम करने और प्रक्रियाओं के गैर- अपराधीकरण पर जोर दिया गया है।
बजट पर कई लोगों के बयान मैंने देखे हैं कि तेलंगाना के लिए कुछ नहीं है, कई अन्य राज्यों के लिए कुछ नहीं है। देखिए, यह राज्यों का बजट नहीं है, यह केंद्र का बजट है। अच्छी बात है, सरकार पंद्रहवें वित्त आयोग की सिफारिशों को लागू करती जा रही है । वैसे कोई जरूरी नहीं था कि राज्यों को फिर 1.3 लाख करोड़ रू. पचास साल तक के लिए बिना ब्याज ऋण स्वरूप दिए जाते राज्यों के पास बहुत सी ऐसी वित्त क्षमता है, जिसका उपयोग नहीं हुआ है, क्योंकि उन्हें जो पहले उधार का प्रस्ताव दिया गया था, उसका ही उन्होंने पूरी तरह इस्तेमाल नहीं किया है। अब राज्यों को जो अतिरिक्त धन प्राप्त हो सकता है, उसका भरपूर सदुपयोग उन्हें करना चाहिए।
यह एक अद्भुत बजट है, जिसमें कराधान को और सरल करने की कोशिश हुई है। अप्रत्यक्ष कर संग्रह में भारी वृद्धि हुई है। वैसे अभी भी टैक्स स्लैब पर काम करना चाहिए । स्लैब कम करने की जरूरत है। जीएसटी में भी बदलाव की जरूरत है। जहां तक प्रत्यक्ष कर की बात है, तो स्लैब कम कर दिया है, टैक्स दर में भी कमी हुई है। लोगों के पास खर्च के लिए ज्यादा राशि होगी, जिससे अर्थव्यवस्था को ही प्रोत्साहन मिलेगा ।
आगामी चुनावों को देखते हुए सरकार के पास यह मौका था कि वह कुछ मुफ्त योजनाओं की घोषणा कर सकती थी, लेकिन सरकार ने रेवड़ी बांटने से बचते हुए एक विकासोन्मुखी जिम्मेदार बजट पेश किया।
संक्षेप में कहूं, तो आम लोगों को इस बजट से तीन चीजें मिली हैं- नौकरी के साधन, पूंजीगत व्यय का इसमें बड़ा योगदान रहेगा। पूंजीगत व्यय से आम आदमी को और बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी लाभ मिलेगा। दूसरा, महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति फायदा होगा। तीसरा, टैक्स में लाभ मिलेगा, इससे आम लोगों की आय भी बढ़ेगी और उनका खर्च भी बढ़ेगा ।
वैसे सरकारों का यह विरासती अधिकार है। उन्हें किसी घोषणा के लिए बजट का इंतजार नहीं करना पड़ता है, पर इस बजट के बाद ऐसा लगता नहीं है कि सरकार को अतिरिक्त घोषणा की जरूरत पड़ेगी। संभव है, अगले वर्ष वह लेखानुदान की घोषणा न करते हुए कुछ घोषणाएं करे, पर फिलहाल ऐसा लगता नहीं है।

Editorial
Next Story
Related News
X
