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मुंबई ज्ञानशाला ने की रास्ते की सेवा
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इस दौरान आचार्य महाश्रमण ने राजस्थान से गुजरात में प्रवेश किया। आंचलिक संयोजिका अनिता परमार, सह संयोजिका राजश्री कच्छारा एवं विभागीय संयोजिका अंजू चौधरी सक्रिय रहीं। सभी प्रशिक्षिकाओं ने साधु साध्वियों की दर्शन सेवा एवं गोचरी की। मुख्य मुनि महावीर मुनि से मिल आचार्य महाश्रमण से मंगल पाठ सुनकर सभी ने साध्वी प्रमुखा

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मुंबई। मुंबई ज्ञानशाला (Mumbai Gyanshala) की 13 प्रशिक्षिकाओं ने 17 से 19 फरवरी के बीच आचार्य महाश्रमण की रास्ते की सेवा की। इस दौरान आचार्य महाश्रमण ने राजस्थान से गुजरात में प्रवेश किया। आंचलिक संयोजिका अनिता परमार, सह संयोजिका राजश्री कच्छारा एवं विभागीय संयोजिका अंजू चौधरी सक्रिय रहीं। सभी प्रशिक्षिकाओं ने साधु साध्वियों की दर्शन सेवा एवं गोचरी की। मुख्य मुनि महावीर मुनि से मिल आचार्य महाश्रमण से मंगल पाठ सुनकर सभी ने साध्वी प्रमुखा विश्रुतविभा एवं साध्वीवर्या संबुद्ध यशा की रास्ते की सेवा की। आंचलिक संयोजिका अनिता परमार ने आचार्य महाश्रमण के समक्ष विचार रखे। उनके मुंबई आगमन पर ज्ञानशाला में चल रही तैयारियों पर सभी ने गीतिका के माध्यम से प्रस्तुति दी। साध्वी प्रमुखा को भी गतिविधियों की जानकारी दी। 19 फरवरी को आचार्य महाश्रमण के गुजरात प्रवेश और अंबाजी स्वागत कार्यक्रम में भाग लिया। मुनि दिनेश कुमार ने कहा कि भले ही यह गुजरात प्रवेश है पर मुंबई को भी हम इससे अलग नहीं मानते हैं।

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