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नॉर्थ-ईस्ट में जड़ें जमाने पर भाजपा का जोर
By EditorialPublished on
पूर्वोत्तर में कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने के बाद भाजपा अब इस क्षेत्र में अपनी जड़ें मजबूत करने में जुट गई है। पार्टी नगालैंड में गठबंधन में चुनाव मैदान में है, जबकि मेघालय में अपने दम पर चुनाव लड़ रही है।

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नई दिल्ली: पूर्वोत्तर में कांग्रेस (Congress) को सत्ता से बाहर करने के बाद भाजपा अब इस क्षेत्र में अपनी जड़ें मजबूत करने में जुट गई है। पार्टी नगालैंड में गठबंधन में चुनाव मैदान में है, जबकि मेघालय में अपने दम पर चुनाव लड़ रही है। मेघालय में पिछली बार मात्र दो सीटें जीतने वाली भाजपा सत्तारूढ़ गठबंधन से अलग होकर सभी सीटों पर मैदान में है, ताकि इस बार दो अंकों में पहुंच कर राज्य में खुद को मजबूत करें। वहीं, नगालैंड में भी वह अपनी सीटों को बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
दोनों राज्यों में भाजपा का प्रचार चरम पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के 24 फरवरी का दोनों जगह चुनाव प्रचार करने का कार्यक्रम है। गृह मंत्री अमित शाह व पार्टी अध्यक्ष जेपी नट्टा समेत तमाम नेता पहले से ही प्रचार कर रहे हैं। पार्टी के एक प्रमुख नेता ने दोनों राज्यों को रणनीति को लेकर कहा है कि पूरे पूर्वोत्तर से कांग्रेस को सत्ता से पहले ही बाहर किया जा चुका है। सभी राज्यों में भाजपा (BJP) या उसके गठबंधन की सरकारें हैं। अब जो भी चुनाव हो रहे हैं, उनमें भाजपा यहां पर अपनी ताकत बढ़ाने पर जोर दे रही है।
यही वजह है कि भाजपा ने मेघालय में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। अभी भाजपा राज्य में गठबंधन सरकार में थी।दरअसल, उसके पास 60 सदस्यीय विधानसभा में मात्र 2 सीटें ही थी गठबंधन में उसकी संभावनाएं कम रहतीं। ऐसे में अपने दम पर वह दो अंकों में पहुंचने की कोशिश करेगी राज्य के सामाजिक समीकरणों में यह काफी मुश्किल काम है, क्योंकि लगभग आधा दर्जन दल अपने सामाजिक आधार पर चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा की कोशिश सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर अपने नेतृत्व में सरकार बनाने की है।
नगालैंड में भाजपा ने अपने सत्तारूढ़ गठबंधन को बरकरार रखा है और 60 में से 20 सीटों पर चुनाव लड़ रही है? पार्टी ने पिछली बार 12 सीटें जीती थी। इस बार डेढ़ दर्जन सीटों की उम्मीद लगाए है। दोनों राज्यों में इसाई समुदाय काफी प्रभावी है और वह चुनावों को भी काफी प्रभावित करता है। भाजपा ने इस समुदाय को साधने की भी कोशिश की है। हालांकि इस समुदाय का एक वर्ग परोक्ष रूप से भाजपा के खिलाफ मुहिम भी चला रहा है।

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