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महुआ मोइत्रा की सांसदी गई
By EditorialPublished on
जोरदार हंगामे के बीच आखिरकार शुक्रवार को लोकसभा (loksabha) में महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) की संसद सदस्यता खत्म करने का प्रस्ताव पास हो गया और प्रस्ताव पास होने के साथ ही महुआ की संसद सदस्यता भी रद्द हो गई। इससे पहले लोकसभा में इस मुद्दे पर जोरदार बहस हुई। विपक्ष ने इस प्रस्ताव को लेकर 3 गंभीर सवाल उठाए, जिनका भाजपा ने एक एक करके जवाब दिया।

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नई दिल्ली (एजेंसी)। जोरदार हंगामे के बीच आखिरकार शुक्रवार को लोकसभा (loksabha) में महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) की संसद सदस्यता खत्म करने का प्रस्ताव पास हो गया और प्रस्ताव पास होने के साथ ही महुआ की संसद सदस्यता भी रद्द हो गई। इससे पहले लोकसभा में इस मुद्दे पर जोरदार बहस हुई। विपक्ष ने इस प्रस्ताव को लेकर 3 गंभीर सवाल उठाए, जिनका भाजपा ने एक एक करके जवाब दिया।
दरअसल, विपक्ष की तरफ से कांग्रेस सांसद (congress mla) अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chaudhary) ने सवाल किया कि आखिर प्रस्ताव पास करने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है। आज ही 12 बजे एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट आई है और 2 बजे इस पर चर्चा शुरू कर दी गई। इस पर महाराष्ट्र से भाजपा (bjp) सांसद हिना गावीत ने कहा कि उन्होंने इन दो घंटों में पूरी रिपोर्ट पढ़ ली है। इस रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा है कि किस तरह महुआ ने अपना संसदीय लॉगइन आईडी और पासवर्ड किसी और को दे दिया। इसलिए प्रस्ताव पर चर्चा एकदम ठीक समय पर की जा रही है।
विपक्ष की तरफ से टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने यह सवाल किया कि आखिर जिस शख्स (महुआ मोइत्रा) पर आरोप लगे हैं। उन्हें अपनी सफाई पेश करने का मौका क्यों नहीं दिया जा रहा है। इस पर भाजपा सांसद और केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि कैश फॉर क्वेरी के ही एक मामले में साल 2005 में 10 सांसदों को निष्काषित किया गया था। उस समय भी किसी सांसद को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया और जल्दबाजी में उसी दिन सभी पर कार्रवाई कर दी गई थी।
तीसरा सवाल विपक्ष की तरफ से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी (Manish Tiwari) ने किया। उन्होंने पूछा कि अगर इस मुद्दे पर आज चर्चा की जानी थी और प्रस्ताव आना था तो राजनैतिक दलों ने अपनी पार्टी के सांसदों को तीन लाइन का व्हीप क्यों जारी किया। मनीष तिवारी ने यह भी कहा कि इससे ऐसा लग रहा है कि जैसे किसी अदालत के जज को कोई फैसला लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
इस पर जवाब देते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि यह संसद है कोई अदाल नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सदन को अदालत कहकर संबोधित ना किया जाए।
3-4 दिन की मोहलत दी जाए : अधीर रंजन
संसद में चर्चा के दौरान अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि महुआ पर जो रिपोर्ट आई है। उसमें 106 पेज हैं। एनेक्सर मिलाकर 495 पेज हैं। कोई इंसान इतनी जल्दी यानी दो घंटे में इतनी बड़ी रिपोर्ट को कैसे पढ़ सकता है। उन्होंने कांग्रेस की तरफ से मांग की कि इस पर चर्चा के लिए 3-4 दिन की मोहलत दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी के खिलाफ कोई शिकायत है तो उन्हें बोलने का मौका भी मिलना चाहिए।
महुआ का पक्ष भी जानना चाहिए : मनीष तिवारी
पंजाब से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि 12 बजे पटल पर रिपोर्ट रखी जाती है और 2 बजे उसकी बहस रख दी जाती है। आसमान नहीं गिर जाता अगर 3-4 दिन दे दिए जाते और हम रिपोर्ट को पढ़कर अपनी बात सदन में रख पाते। उन्होंने आगे कहा कि मीडिया रिपोर्ट में यह बात निकलकर सामने आई कि जिन पर आरोप लगाए गए हैं। उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका तक नहीं दिया गया।
जब ओम बिरला ने पूछा, क्या आप कोर्ट में बहस कर रहे हैं?
"सदन में चर्चा के दौरान स्पीकर ओम बिरला ने मनीष तिवारी से पूछा कि आप संसद में बहस कर रहे हैं या कोर्ट में ? इस पर मनीष तिवारी ने कहा कि यह संसद कोर्ट ही है। जवाब में ओम बिरला ने कहा कि यह अदालत नहीं बल्कि संसद है। मनीष तिवारी ने फिर कहा कि आज हम संसद के रूप में नहीं बैठे हैं। हम ज्यूरी के तौर पर यहां मौजूद हैं। जब राजनीतिक दल ने व्हीप जारी किया तो इसका मतलब सदस्यों को यह आदेशित किया जा रहा है कि उन्हें क्या फैसला लेना है।

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