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अयोध्या (एजेंसी)। अयोध्या (Ayodhya) का अर्थ है, जहां युद्ध न हो अथवा जिसे युद्ध में जीता न जा सके । विरासत के अनुरूप अजिता- अपराजिता नगरी का मौलिक चरित्र बुधवार को विवादित ढांचा गिराए जाने की 31वीं बरसी पर भी पुष्ट हो रहा था। चाहे वह एक मार्च 1528 को आक्रांताओं द्वारा रामजन्मभूमि पर बने मंदिर का ध्वंस रहा हो या उसकी प्रतिक्रिया में 6 दिसंबर, 1992 को विवादित ढांचे का ध्वंस । रामनगरी (ram nagri) अब ध्वंस की स्याह स्मृति से उबर सृजन का स्वर्णिम कीर्तिमान गढ़ रही है जो रामजन्मभूमि (Ramjanmabhoomi) करीब पांच सदी तक ध्वंस की साक्षी थी, वहां अब भव्य मंदिर का निर्माण अंतिम स्पर्श पा रहा है। इसी मंदिर के गर्भगृह में 22 जनवरी, 2024 को रामलला के विग्रह की स्थापना होगी ।
लघु भारत का दर्शन
इस अविस्मरणीय अवसर को चिरस्थायी बनाने के लिए संघ, विहिप, रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Ramjanmabhoomi Teerth Kshetra Trust) से लेकर केंद्र एवं प्रदेश की भाजपा सरकार के प्रयास से रामजन्मभूमि परिसर सहित संपूर्ण रामनगरी को सज्जित किया जा रहा है। बदलाव के वाहक रामजन्मभूमि पथ, भक्ति पथ, धर्म पथ एवं रामपथ के साथ किनारों के भवन भी एक से आकार और रंग में रूपांतरित हो संभावनाएं प्रशस्त कर रहे हैं।
विवादित ढांचा गिराए जाने की तारीख के सवाल पर पुणे से आए अभिषेक नारंग कहते हैं, हमें अतीत में उलझने की जगह आगे बढ़ना है और इसकी परिणति भव्य मंदिर एवं दिव्य अयोध्या निर्मित करने के प्रयास से परिलक्षित भी हो रही है। रामजन्मभूमि से सरयू नदी की ओर बढ़ने पर ऐसे दावों को दम मिलता है। तुलसी उद्यान राम की पैड़ी, रानी हो का स्मारक और भजन संध्या स्थल जैसे पर्यटन केंद्र नया कलेवर ग्रहण कर दिव्य अयोध्या की संभावनाएं प्रशस्त कर रहे हैं। सरयू की नित्य सायंकालीन महाआरती की तैयारी प्रथम बेला से ही कर रहे आंजनेय सेवा संस्थान के अध्यक्ष महंत शशिकांतदास कहते हैं, आज भव्य मंदिर और नव्य अयोध्या का निर्माण सृजनात्मकता की उसी शक्ति से संभव हो पा रहा है, जो अयोध्या के डीएनए में है ।
भारत को विश्व गुरु बनाने के संकल्प का अवसर
हिंदू राष्ट्र की स्थापना के लिए प्रयत्नशील जगद्गुरू परमहंस आचार्य कहते हैं, अब यह अवसर विवाद को पीछे छोड़ श्रीराम को केंद्र में रख कर भारत को पुनः विश्व गुरू के रूतबे से विभूषित करने और राम राज्य की स्थापना का संकल्प लेने का है।
आपसी विश्वास का उत्सव मनाएं
मुस्लिम लीग के प्रांतीय अध्यक्ष डा. नजमुल हसन गनी कहते हैं, सर्वोच्च निर्णय आने के बाद विवाद को पीछे छोड़ अब आपसी विश्वास का उत्सव मनाना चाहिए और अयोध्या को राम मंदिर के साथ साझी विरासत की नगरी के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। वह याद दिलाते हैं कि अयोध्या दूसरे पैगंबर हजरत शीश सहित अनेक सूफी संतों, जैन तीर्थंकरों, गौतम बुद्ध और सिख गुरूओं की भी नगरी है। इस विरासत के साथ अयोध्या में साझी विरासत की सर्वश्रेष्ठ नगरी बनने की संभावना है।
Editorial

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