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नई दिल्ली (एजेंसी) । क्या मध्य प्रदेश (madhya pradesh), राजस्थान (rajasthan) और छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में भाजपा (BJP) नए चेहरे की लाने का प्लान बना चुकी है? कई दिनों से इस बारे में खबरें चल रही हैं, लेकिन अब इस सवाल का जवाब हां के तौर पर ही मिलता दिख रहा है। दरअसल गुरूवार को प्र.म. नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) जब संसदीय दल की मीटिंग में पहुंचे तो उन्हें तीन राज्यों में जीत का भी जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने जबरदस्त जीत के लिए कार्यकर्ताओं को क्रेडिट दिया और कहा की यह टीम वर्क का नतीजा है। उन्होंने कहा कि हमें टीम वर्क से यह सफलता मिली है और आगे भी इसे बनाकर रखना है।
उन्होंने राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे
(vasundhara raje)
, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का नाम नहीं लिया। इसके अलावा मध्य प्रदेश के मौजूदा सीएम शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) को लेकर भी कुछ नहीं कहा। इसके अलावा मध्य प्रदेश की लाडली बहना स्कीम का भी प्र.म. नरेंद्र मोदी ने जिक्र नहीं किया। ऐसे में माना जा रहा है कि पुराने दिग्गजों की बजाय भाजपा किसी नए चेहरे को ही सीएम बनाएगी। बैठक में मौजूद रहे एक सांसद ने कहा कि राज्यों में सभी कार्यकर्ताओं के सामूहिक प्रयास से जीत मिली है।
प्र.म. मोदी ने कहा, पार्टी की स्थापना से लेकर आज तक समय- समय पर योगदान देने वाले सभी नेताओं की वजह से आज यह स्थिति है। उसी दौर से सामूहिक प्रयास की परंपरा रही है। इस बार भी टीम वर्क के चलते हमें जीत हासिल हुई है। प्र.म. मोदी ने कहा कि हमने हमेशा ही ऐंटी- इनकम्बेंसी जैसी चीजों को गलत साबित किया है। इसकी बजाय प्रो- इनकम्बेंसी की स्थिति हमारे काम से बनी है। हमने जनता के हित में योजनाएं चलाई हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान सभी सांसदों से कहा कि वे विकसित भारत यात्रा में शामिल हों।
इस यात्रा में शामिल होकर वे प्र.म. मोदी ने कहा, पार्टी की लोगों को बताएं कि सरकार ने अब तक उनके लिए क्या स्कीमें चलाई हैं। इसके अलावा लोग कैसे उनका फायदा ले सकते हैं, यह भी बताया जाए । यह यात्रा 25 दिसंबर तक चलेगी।
इस दौरान प्र.म. मोदी ने यह भी कहा कि भाजपा सरकारों के रिपीट होने का स्ट्राइक रेट 58 पसेंट है। जबकि कांग्रेस (congress) का स्ट्राइक रेट 17 फीसदी ही है। प्र.म. मोदी की ओर से किसी नेता का नाम न लेने से साफ है कि तीनों राज्यों में भाजपा किसी नए चेहरे को ला सकती है। इससे पहले उत्तराखंड, गुजरात, हरियाणा जैसे राज्यों में भी यही फॉर्मूला लागू किया गया था।
Editorial

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