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84 लाख जीव योनियों में निरंतर भ्रमण करती है आत्मा
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आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने सोमवार को अपने प्रवचन में कहा कि संसार में 84 लाख जीव योनियां बताई गयीं हैं। इनमें आत्मा निरंतर भ्रमण करती रहती है। धर्म का सिद्धांत कहता है कि आत्मा शाश्वत है और शरीर नश्वर है। आत्मा न कोई काट सकता है, न जला सकता है, न ही सुखा सकता है और न ही उसे कोई भिंगो सकता है। आत्मा शाश्वत है, अमर है और यह शरीर नश्वर और अस्थाई है। जन्म-मरण के सिद्धांत के अनुसार शरीर की मृत्यु के होने के बाद आत्मा कर्मों के आधार पर कभी नरक गति में कभी तीर्यंच गति में कभी मनुष्य गति और कभी देव गत

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मुंबई । आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने सोमवार को अपने प्रवचन में कहा कि संसार में 84 लाख जीव योनियां बताई गयीं हैं। इनमें आत्मा निरंतर भ्रमण करती रहती है। धर्म का सिद्धांत कहता है कि आत्मा शाश्वत है और शरीर नश्वर है। आत्मा न कोई काट सकता है, न जला सकता है, न ही सुखा सकता है और न ही उसे कोई भिंगो सकता है। आत्मा शाश्वत है, अमर है और यह शरीर नश्वर और अस्थाई है। जन्म-मरण के सिद्धांत के अनुसार शरीर की मृत्यु के होने के बाद आत्मा कर्मों के आधार पर कभी नरक गति में कभी तीर्यंच गति में कभी मनुष्य गति और कभी देव गति में भी पैदा होती रहती है। इन चौरासी लाख जीव योनियों में मानव जीवन सबसे महत्त्वपूर्ण हैं। मानव उच्च साधना कर मनुष्य आत्मा से परमात्मा, नर से नारायण और जीव से शिव को प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने अणुव्रत विश्व भारती द्वारा आयोजित डिजीटल डिटॉक्स कार्यक्रम के संदर्भ में कहा कि मोबाइल आदि उपकरणों से कितनी सुविधा कितना लाभ है। इसका उजला पक्ष भी है तो इसका अंधेर पक्ष भी है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि सभी लोग एक महीने के लिए रात्रि बारह बजे से सुबह सात बजे तक अति आवश्यक के सिवाय मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करेंगे। सभी ने संकल्प स्वीकार किया। कार्यक्रम में साध्वीवर्या सम्बुद्धयशा ने भी विचार रखे। संचालन मुनि कुमारश्रमण ने किया।
कार्यक्रम संयोजक प्यारचंद मेहता व अणुविभा के सहमंत्री मनोज सिंघवी ने विचार रखे। मुनि जागृतकुमार व मुनि अभिजीतकुमार ने भी अभिव्यक्ति दी। कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ गोस्वामी, तारक मेहता का उल्टा चश्मा के प्रोड्यूसर असित मोदी, प्लानिंग कमिशन की मेम्बर अर्चना जैन, विधायक गीता जैन, डॉ. रिक्की पोरवाल, डॉ. निष्ठा दलवानी, डॉ. दिनेश कोठारी मौजूद रहे।

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